गाजे-बाजे और रामधुनी के साथ कुत्ते का अंतिम संस्कार:ग्रामीण की मौत पर शवयात्रा में श्वान होता था शामिल; बैठक कर बारहवां भी करेंगे लोग

गांव में किसी की भी मौत होने पर कुत्ता मृतक के घर पर पहुंच जाता था और लोगों के साथ शव यात्रा में शामिल था। अंतिम संस्कार होने तक श्मशान में बैठा रहता था। ब्यावर के निकट राजियावास गांव के सरपंच ब्रजपाल रावत ने बताया- जब इस कुत्ते की मौत की सूचना ग्रामीणों को मिली तो गांव में शोक की लहर दौड़ पड़ी। गाजे बाजे के साथ ग्रामीणों ने इसकी शव यात्रा निकाली और अंतिम संस्कार किया। इसके 12वें का कार्यक्रम 15 जनवरी को रखा गया। सरपंच रावत ने बताया- गांव में किसी की भी मृत्यु होने पर यह कुत्ता बिना बुलाए मृतक के घर पहुंच जाता था और ना केवल अंतिम यात्रा में शामिल होता बल्कि अंतिम संस्कार होने तक श्मशान घाट परिसर में ही बैठा रहता था। शोकसभा सम्पन्न होने पर ही निकलता था। कुत्ते के इसी सेवाभाव ने ग्रामीणों का दिल जीत लिया था। सुबह अज्ञात कारणों से यह कुत्ता सड़क किनारे मृत दिखाई दिया तो इसके बाद यह खबर पूरे गांव में फैल गई और फिर ग्रामीणों ने अंतिम संस्कार की तैयारियां शुरू कर दी। डीजे साउण्ड पर रामधुनि के साथ शुरू कुत्ते की अंतिम यात्रा गांव में आशापुरा माता मंदिर से राजियावास हिन्दू मुक्तिधाम पहुंची, ज़हां विधि-विधान पूर्वक अंतिम संस्कार किया गया। 15 जनवरी को होगा 12वें का कार्यक्रम इस कुत्ते का उठावना आज शाम को आशापुरा माता मंदिर के पास धर्मशाला में किया जाएगा और इसका 12वें का कार्यक्रम आगामी 15 जनवरी को रखा गया है। अंतिम यात्रा में स्थानीय सरपंच ब्रजपालसिंह रावत, समाजसेवी किशनसिंह सीआरपीएफ, मंगलसिंह, महेन्द्रसिंह, छितरसिंह, वार्ड पंच कल्याणसिंह, भरतसिंह, नैनासिंह, कालूराम समेत बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित थे।

Jan 6, 2026 - 16:15
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गाजे-बाजे और रामधुनी के साथ कुत्ते का अंतिम संस्कार:ग्रामीण की मौत पर शवयात्रा में श्वान होता था शामिल; बैठक कर बारहवां भी करेंगे लोग
गांव में किसी की भी मौत होने पर कुत्ता मृतक के घर पर पहुंच जाता था और लोगों के साथ शव यात्रा में शामिल था। अंतिम संस्कार होने तक श्मशान में बैठा रहता था। ब्यावर के निकट राजियावास गांव के सरपंच ब्रजपाल रावत ने बताया- जब इस कुत्ते की मौत की सूचना ग्रामीणों को मिली तो गांव में शोक की लहर दौड़ पड़ी। गाजे बाजे के साथ ग्रामीणों ने इसकी शव यात्रा निकाली और अंतिम संस्कार किया। इसके 12वें का कार्यक्रम 15 जनवरी को रखा गया। सरपंच रावत ने बताया- गांव में किसी की भी मृत्यु होने पर यह कुत्ता बिना बुलाए मृतक के घर पहुंच जाता था और ना केवल अंतिम यात्रा में शामिल होता बल्कि अंतिम संस्कार होने तक श्मशान घाट परिसर में ही बैठा रहता था। शोकसभा सम्पन्न होने पर ही निकलता था। कुत्ते के इसी सेवाभाव ने ग्रामीणों का दिल जीत लिया था। सुबह अज्ञात कारणों से यह कुत्ता सड़क किनारे मृत दिखाई दिया तो इसके बाद यह खबर पूरे गांव में फैल गई और फिर ग्रामीणों ने अंतिम संस्कार की तैयारियां शुरू कर दी। डीजे साउण्ड पर रामधुनि के साथ शुरू कुत्ते की अंतिम यात्रा गांव में आशापुरा माता मंदिर से राजियावास हिन्दू मुक्तिधाम पहुंची, ज़हां विधि-विधान पूर्वक अंतिम संस्कार किया गया। 15 जनवरी को होगा 12वें का कार्यक्रम इस कुत्ते का उठावना आज शाम को आशापुरा माता मंदिर के पास धर्मशाला में किया जाएगा और इसका 12वें का कार्यक्रम आगामी 15 जनवरी को रखा गया है। अंतिम यात्रा में स्थानीय सरपंच ब्रजपालसिंह रावत, समाजसेवी किशनसिंह सीआरपीएफ, मंगलसिंह, महेन्द्रसिंह, छितरसिंह, वार्ड पंच कल्याणसिंह, भरतसिंह, नैनासिंह, कालूराम समेत बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित थे।