सुप्रीम कोर्ट बोला- प्रोफेसर खान पर केस न चलाएं:हरियाणा सरकार बड़प्पन दिखाए, महमूदाबाद भी जिम्मेदारी दिखाएंगे; ऑपरेशन सिंदूर को लेकर टिप्पणी की थी

हरियाणा के सोनीपत में अशोका यूनिवसिर्टी के प्रोफेसर अली खान महमूदाबाद केस की सुनाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने हरियाणा सरकार को नरमी बरतने का सुझाव दिया है। साथ ही हरियाणा सरकार से अपील की है कि केस चलाने की मंजूरी न देकर सरकार बड़प्पन दिखाए। सुप्रीम कोर्ट ने यह भी आशा जताई है कि यदि हरियाणा सरकार केस नहीं चलाएगी तो प्रोफेसर खान भी भविष्य में जिम्मेदारी से पेश आएंगे। प्रो. खान पिछले साल भारतीय सेना की ओर से चलाए गए ऑपरेशन सिंदूर और इसे ब्रीफ करने वाली महिला सैन्य अधिकारियों पर आपत्तिजनक टिप्पणी के मामले में घिरे हुए हैं। सरकार मंजूरी नहीं देगी तो कोर्ट को मेरिट में जाने की जरूरत नहीं जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची की बेंच इस मामले की सुनवाई कर रही है। मंगलवार को हुई सुनवाई के दौरान कोर्ट ने मौखिक रूप से कहा कि यदि राज्य सरकार इस मामले में उदारता बरतते हुए मुकदमा चलाने की मंजूरी नहीं देती है, तो कोर्ट को मामले की मेरिट में जाने की आवश्यकता नहीं होगी। इस पर हरियाणा सरकार की ओर से पेश हुए एडिशनल सॉलिसिटर जनरल (ASG) एस.वी. राजू ने कहा कि वह इस बारे में सरकार से निर्देश लेंगे। केस की सुनवाई के दौरान सामने आया कि हरियाणा सरकार ने अभी तक इस मामले में केस चलाने की मंजूरी नहीं दी है। कोर्ट ने कहा- प्रोफेसर से भी जिम्मेदारी की उम्मीद कोर्ट ने सरकार की ओर से पेश ASG एस.वी. राजू से पूछा गया कि इस मामले में चार्जशीट कब दाखिल की गई? इस पर ASG ने कहा कि चार्जशीट 22 अगस्त 2025 को दाखिल की जा चुकी है। उन्होंने कहा कि प्रोफेसर पर मुकदमा चलाने की मंजूरी अभी लंबित है। सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने इस पर कहा कि सरकार प्रोफेसर पर मुकदमा चलाने की मंजूरी न देकर बड़प्पन दिखाए। हालांकि, कोर्ट ने यह भी साफ किया कि यदि मामला बंद होता है, तो प्रोफेसर से भी भविष्य में बेहद जिम्मेदारी से पेश आने की उम्मीद की जाएगी। जानें क्या है पूरा मामला? यह विवाद करीब 8 महीने पहले तब शुरू हुआ था जब अशोका यूनिवर्सिटी के एसोसिएट प्रोफेसर अली खान महमूदाबाद ने अपनी एक सोशल मीडिया पोस्ट में सेना के ऑपरेशन सिंदूर को लेकर विवादित टिप्पणी की थी। इसके अलावा, उन्होंने कर्नल सोफिया कुरैशी और विंग कमांडर व्योमिका सिंह पर भी आपत्तिजनक सोशल मीडिया पोस्ट किए थे। प्रोफेसर पर 2 FIR दर्ज हुईं टिप्पणी के बाद प्रोफेसर के खिलाफ 2 FIR दर्ज की गईं। पहली FIR राई थाने में हुई जिसे जठेड़ी गांव के सरपंच की शिकायत पर दर्ज किया गया था। वहीं, दूसरी FIR महिला आयोग की चेयरपर्सन रेणु भाटिया की शिकायत पर दर्ज की गई। दिल्ली से गिरफ्तार हुए थे प्रोफेसर केस दर्ज होने के बाद सोनीपत पुलिस ने प्रोफेसर महमूदाबाद को दिल्ली के ग्रेटर कैलाश इलाके से गिरफ्तार किया था। हालांकि, गिरफ्तारी के कुछ समय बाद प्रोफेसर को जमानत मिल गई थी। केस को बाद में सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई थी। ॰॰॰॰॰॰ यह खबर भी पढ़ें... हरियाणा के प्रोफेसर इंग्लैंड की कैंब्रिज यूनिवर्सिटी से पढ़े, गिरफ्तारी को गलत बताया सेना के ऑपरेशन सिंदूर पर कमेंट करने वाले सोनीपत की अशोका यूनिवर्सिटी के एसोसिएट प्रोफेसर अली खान महमूदाबाद अपनी गिरफ्तारी के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट पहुंच गए। उनके एडवोकेट कपिल सिब्बल ने चीफ जस्टिस बीआर गवई की बेंच से जल्द सुनवाई की मांग की है। पूरी खबर पढ़ें...

Jan 6, 2026 - 20:06
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सुप्रीम कोर्ट बोला- प्रोफेसर खान पर केस न चलाएं:हरियाणा सरकार बड़प्पन दिखाए, महमूदाबाद भी जिम्मेदारी दिखाएंगे; ऑपरेशन सिंदूर को लेकर टिप्पणी की थी
हरियाणा के सोनीपत में अशोका यूनिवसिर्टी के प्रोफेसर अली खान महमूदाबाद केस की सुनाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने हरियाणा सरकार को नरमी बरतने का सुझाव दिया है। साथ ही हरियाणा सरकार से अपील की है कि केस चलाने की मंजूरी न देकर सरकार बड़प्पन दिखाए। सुप्रीम कोर्ट ने यह भी आशा जताई है कि यदि हरियाणा सरकार केस नहीं चलाएगी तो प्रोफेसर खान भी भविष्य में जिम्मेदारी से पेश आएंगे। प्रो. खान पिछले साल भारतीय सेना की ओर से चलाए गए ऑपरेशन सिंदूर और इसे ब्रीफ करने वाली महिला सैन्य अधिकारियों पर आपत्तिजनक टिप्पणी के मामले में घिरे हुए हैं। सरकार मंजूरी नहीं देगी तो कोर्ट को मेरिट में जाने की जरूरत नहीं जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची की बेंच इस मामले की सुनवाई कर रही है। मंगलवार को हुई सुनवाई के दौरान कोर्ट ने मौखिक रूप से कहा कि यदि राज्य सरकार इस मामले में उदारता बरतते हुए मुकदमा चलाने की मंजूरी नहीं देती है, तो कोर्ट को मामले की मेरिट में जाने की आवश्यकता नहीं होगी। इस पर हरियाणा सरकार की ओर से पेश हुए एडिशनल सॉलिसिटर जनरल (ASG) एस.वी. राजू ने कहा कि वह इस बारे में सरकार से निर्देश लेंगे। केस की सुनवाई के दौरान सामने आया कि हरियाणा सरकार ने अभी तक इस मामले में केस चलाने की मंजूरी नहीं दी है। कोर्ट ने कहा- प्रोफेसर से भी जिम्मेदारी की उम्मीद कोर्ट ने सरकार की ओर से पेश ASG एस.वी. राजू से पूछा गया कि इस मामले में चार्जशीट कब दाखिल की गई? इस पर ASG ने कहा कि चार्जशीट 22 अगस्त 2025 को दाखिल की जा चुकी है। उन्होंने कहा कि प्रोफेसर पर मुकदमा चलाने की मंजूरी अभी लंबित है। सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने इस पर कहा कि सरकार प्रोफेसर पर मुकदमा चलाने की मंजूरी न देकर बड़प्पन दिखाए। हालांकि, कोर्ट ने यह भी साफ किया कि यदि मामला बंद होता है, तो प्रोफेसर से भी भविष्य में बेहद जिम्मेदारी से पेश आने की उम्मीद की जाएगी। जानें क्या है पूरा मामला? यह विवाद करीब 8 महीने पहले तब शुरू हुआ था जब अशोका यूनिवर्सिटी के एसोसिएट प्रोफेसर अली खान महमूदाबाद ने अपनी एक सोशल मीडिया पोस्ट में सेना के ऑपरेशन सिंदूर को लेकर विवादित टिप्पणी की थी। इसके अलावा, उन्होंने कर्नल सोफिया कुरैशी और विंग कमांडर व्योमिका सिंह पर भी आपत्तिजनक सोशल मीडिया पोस्ट किए थे। प्रोफेसर पर 2 FIR दर्ज हुईं टिप्पणी के बाद प्रोफेसर के खिलाफ 2 FIR दर्ज की गईं। पहली FIR राई थाने में हुई जिसे जठेड़ी गांव के सरपंच की शिकायत पर दर्ज किया गया था। वहीं, दूसरी FIR महिला आयोग की चेयरपर्सन रेणु भाटिया की शिकायत पर दर्ज की गई। दिल्ली से गिरफ्तार हुए थे प्रोफेसर केस दर्ज होने के बाद सोनीपत पुलिस ने प्रोफेसर महमूदाबाद को दिल्ली के ग्रेटर कैलाश इलाके से गिरफ्तार किया था। हालांकि, गिरफ्तारी के कुछ समय बाद प्रोफेसर को जमानत मिल गई थी। केस को बाद में सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई थी। ॰॰॰॰॰॰ यह खबर भी पढ़ें... हरियाणा के प्रोफेसर इंग्लैंड की कैंब्रिज यूनिवर्सिटी से पढ़े, गिरफ्तारी को गलत बताया सेना के ऑपरेशन सिंदूर पर कमेंट करने वाले सोनीपत की अशोका यूनिवर्सिटी के एसोसिएट प्रोफेसर अली खान महमूदाबाद अपनी गिरफ्तारी के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट पहुंच गए। उनके एडवोकेट कपिल सिब्बल ने चीफ जस्टिस बीआर गवई की बेंच से जल्द सुनवाई की मांग की है। पूरी खबर पढ़ें...