कानपुर में कांग्रेसियों ने चलाया 90 साल पुराना चरखा:महात्मा गांधी का निर्वाण दिवस मनाया, सन् 1934 की कुर्सी और तस्वीर संजोकर रखी
कानपुर के कांग्रेस कार्यालय में आज महात्गांधी का निर्वाण दिवस मनाया गया। गांधी जी ने ही मेस्टन रोड के तिलक हाल का सन् 1931 उद्घाटन किया था। 90 साल पुराने चरखा से सूत कताई की गई। गांधी जी के कानपुर आने के दौरान जो भी यादगार चीजें यहां संजोकर रखी गईं है। कांग्रेस जिला इकाई ने आज कार्यालय मे सर्वधम सभा का आयोजन किया गया। इस दौरान गांधी जी को याद कर श्रद्धांजलि दी गई। कांग्रेस जिला अध्यक्ष पवन गुप्ता ने बताया कि 30 जनवरी के दिन गांधी जी के निर्वाण दिवस के मौके पर सभी कांग्रेसी एकत्र हुये हैं। यहां हिन्दू, मुस्लिम, सिख और इसाई धर्म के लोग ने एक साथ श्रद्धांजलि दी है। राष्ट्रपिता माहत्मा गांधी को याद किया कि किस तरह से उन्होंने देश की आजादी के लिये त्याग और बलिदान किया। 90 साल पुराना चरखा चलाया गया… 86 साल के डा हमीद उल्लाह खां ने बाताया कि आज निवार्ण दिवस के मौके पर तिलक हाल मे 90 साल पुराना चरखा चलाकर सूत कताई की गई। उन्होंने कहा कि उनके पिता हमीद खां गांधी जी के आदर्शों का पालन करते थे। आज हम लोग भी उन्ही के दिखाये गये रास्ते पर चल रहें। मेरे पिता कानपुर के मध्यपूर्वी से दो बार विधायक रहे। लेकिन हमारे घर में आज तक किसी ने भी सरकारी पेंशन नहीं ली। मुझे याद है कि जब गांधी जी की हत्या की खबर आयी थी, तो पिता जी तुरंत ही दिल्ली के लिये निकल गये थे। सात बार गांधी जी कानपुर आये… 88 साल के नारायण दत्त मिश्रा बताया कि गांधी जी कानपुर सात बार आयें है। जिसमें पांच बार तिलक हाल आयें हैं। सबसे पहले साल 1931 कांग्रेस कार्यलय का उद्घाटन करने वो कानपुर आये थे। फिर इसके बाद 1934 मे वो आशोक लाईब्रेरी आये थे। तिलकहाल के पीछे पार्क का शिलान्यास किया। उस दौरान उनके साथ कांग्रेस के जिला अध्यक्ष नारायण दत्त अरोड़ा मौजूद थे। उस पार्क में ली गई तस्वीर आज भी आशोक लाईब्रेरी मे रखी हुई है। अशोक लाईब्रेरी में आज भी रखी है गांधी जी की कुर्सी और तस्वीर… अशोक लाईब्रेरी की देख रेख करने वाले प्रदीप ने बताया आज भी वो कुर्सी मौजूद है। जिस पर सन् 1934 में गांधी जी बैठे थे। इसके साथ वो तस्वीर भी रखी है, जिसमे नारायण दत्त अरोडा साथ में पार्क मे बैठे हुये हैं।



