किशनगंज संयुक्त आयुक्त शशिभूषण का तबादला, विभागीय विवादों में घिरे:अवैध कोयला एंट्री मामले में जांच के बाद हुई कार्रवाई
किशनगंज में राज्य कर विभाग के संयुक्त आयुक्त शशिभूषण का तबादला विभागीय विवादों की चपेट में आने के बाद हुआ है। लगातार आरोपों और जांच के घेरे में रहे इस अधिकारी के स्थान पर रविंद्र कुमार को प्रभारी बनाकर किशनगंज भेजा गया है। साथ ही, उपायुक्त वंदना वसिष्ठ का कटिहार तबादला हो गया है और उनकी जगह (उत्तर प्रदेश,प्रयागराज की) स्नेहा वर्मा को किशनगंज में नियुक्त किया गया है। अवैध कोयला प्रवेश पर सख्ती, फिर उठे सवाल पिछले कुछ दिनों में विभाग ने कोयला की अवैध एंट्री को लेकर कड़ी कार्रवाई शुरू की थी। पटना से आई विशेष जांच टीम ने महज 2-3 घण्टो के भीतर 23 ट्रकों को पकड़ा, जिनमें राजस्व चोरी का बड़ा खेल चल रहा था। यह कार्रवाई विभाग की सख्ती का संकेत थी, लेकिन इसके तुरंत बाद शशिभूषण पर ही उंगलियां उठने लगीं।सूत्रों के मुताबिक, जांच टीम को यह जानकारी मिली कि इंचार्ज शशिभूषण का इंट्री माफिया के साथ कथित तौर पर अच्छा संबंध था। अवैध कोयला और अन्य सामग्रियों की ढुलाई में चेकपोस्ट पर ढील बरतने के आरोप लगे, जिससे सरकारी खजाने को भारी नुकसान हो रहा था। यह घटना किशनगंज जैसे सीमावर्ती जिले में राजस्व लीकेज की गंभीर समस्या को उजागर करती है, जहां अवैध व्यापार लंबे समय से चुनौती बनी हुई है। एक साल पहले का भ्रष्टाचार का ऑडियो विवाद यह पहला मौका नहीं है जब शशिभूषण के खिलाफ सवाल खड़े हुए हों। करीब एक वर्ष पहले ठेकेदार राजीव कुमार साहा ने उन पर भ्रष्टाचार का गंभीर आरोप लगाया था। उन्होंने विभाग को पटना एक ऑडियो क्लिप साक्ष्य के रूप में भेजी थी, जिसमें कथित रिश्वत और अनियमितता की बातें सामने बताई गई थीं।वाणिज्य कर विभाग ने इसकी जांच के लिए किशनगंज के तत्कालीन डीएम विशाल राज को निर्देश दिए थे। जांच के दौरान ठेकेदार राज कुमार साहा ने इसे मिसअंडरस्टैंडिंग बताते हुए शिकायत वापस ले ली। नाम न छापने की शर्त पर कसेरा पट्टी स्थित एक अधिवक्ता ने बताया कि दोनों पक्षों में समझौता हो गया था, जिसके बाद मामला रफा-दफा कर दिया गया। हालांकि, यह घटना विभाग में शशिभूषण के कामकाज पर सवालों का सिलसिला शुरू कर चुकी थी। विभागीय बदलाव का संदेश शशिभूषण का तबादला बिहार सरकार की उस नीति का हिस्सा लगता है, जिसमें राजस्व विभाग में पारदर्शिता और सख्ती पर जोर दिया जा रहा है। अवैध कोयला व्यापार, जीएसटी चोरी और चेकपोस्ट पर लापरवाही जैसे मुद्दे राज्य के लिए राजस्व हानि का बड़ा कारण बने हुए हैं। नई तैनाती के साथ उम्मीद की जा रही है कि किशनगंज में विभागीय कार्यप्रणाली में सुधार आएगा और माफिया तंत्र पर अंकुश लगेगा। यह बदलाव न केवल प्रशासनिक फेरबदल है, बल्कि भ्रष्टाचार के खिलाफ चल रही मुहिम का भी हिस्सा प्रतीत होता है। विभागीय स्तर पर अब सतर्कता और जवाबदेही बढ़ाने की जरूरत है, ताकि सरकारी खजाने की रक्षा हो सके और आम जनता तक सुविधाएं पहुंच सकें।
किशनगंज में राज्य कर विभाग के संयुक्त आयुक्त शशिभूषण का तबादला विभागीय विवादों की चपेट में आने के बाद हुआ है। लगातार आरोपों और जांच के घेरे में रहे इस अधिकारी के स्थान पर रविंद्र कुमार को प्रभारी बनाकर किशनगंज भेजा गया है। साथ ही, उपायुक्त वंदना वसिष्ठ का कटिहार तबादला हो गया है और उनकी जगह (उत्तर प्रदेश,प्रयागराज की) स्नेहा वर्मा को किशनगंज में नियुक्त किया गया है। अवैध कोयला प्रवेश पर सख्ती, फिर उठे सवाल पिछले कुछ दिनों में विभाग ने कोयला की अवैध एंट्री को लेकर कड़ी कार्रवाई शुरू की थी। पटना से आई विशेष जांच टीम ने महज 2-3 घण्टो के भीतर 23 ट्रकों को पकड़ा, जिनमें राजस्व चोरी का बड़ा खेल चल रहा था। यह कार्रवाई विभाग की सख्ती का संकेत थी, लेकिन इसके तुरंत बाद शशिभूषण पर ही उंगलियां उठने लगीं।सूत्रों के मुताबिक, जांच टीम को यह जानकारी मिली कि इंचार्ज शशिभूषण का इंट्री माफिया के साथ कथित तौर पर अच्छा संबंध था। अवैध कोयला और अन्य सामग्रियों की ढुलाई में चेकपोस्ट पर ढील बरतने के आरोप लगे, जिससे सरकारी खजाने को भारी नुकसान हो रहा था। यह घटना किशनगंज जैसे सीमावर्ती जिले में राजस्व लीकेज की गंभीर समस्या को उजागर करती है, जहां अवैध व्यापार लंबे समय से चुनौती बनी हुई है। एक साल पहले का भ्रष्टाचार का ऑडियो विवाद यह पहला मौका नहीं है जब शशिभूषण के खिलाफ सवाल खड़े हुए हों। करीब एक वर्ष पहले ठेकेदार राजीव कुमार साहा ने उन पर भ्रष्टाचार का गंभीर आरोप लगाया था। उन्होंने विभाग को पटना एक ऑडियो क्लिप साक्ष्य के रूप में भेजी थी, जिसमें कथित रिश्वत और अनियमितता की बातें सामने बताई गई थीं।वाणिज्य कर विभाग ने इसकी जांच के लिए किशनगंज के तत्कालीन डीएम विशाल राज को निर्देश दिए थे। जांच के दौरान ठेकेदार राज कुमार साहा ने इसे मिसअंडरस्टैंडिंग बताते हुए शिकायत वापस ले ली। नाम न छापने की शर्त पर कसेरा पट्टी स्थित एक अधिवक्ता ने बताया कि दोनों पक्षों में समझौता हो गया था, जिसके बाद मामला रफा-दफा कर दिया गया। हालांकि, यह घटना विभाग में शशिभूषण के कामकाज पर सवालों का सिलसिला शुरू कर चुकी थी। विभागीय बदलाव का संदेश शशिभूषण का तबादला बिहार सरकार की उस नीति का हिस्सा लगता है, जिसमें राजस्व विभाग में पारदर्शिता और सख्ती पर जोर दिया जा रहा है। अवैध कोयला व्यापार, जीएसटी चोरी और चेकपोस्ट पर लापरवाही जैसे मुद्दे राज्य के लिए राजस्व हानि का बड़ा कारण बने हुए हैं। नई तैनाती के साथ उम्मीद की जा रही है कि किशनगंज में विभागीय कार्यप्रणाली में सुधार आएगा और माफिया तंत्र पर अंकुश लगेगा। यह बदलाव न केवल प्रशासनिक फेरबदल है, बल्कि भ्रष्टाचार के खिलाफ चल रही मुहिम का भी हिस्सा प्रतीत होता है। विभागीय स्तर पर अब सतर्कता और जवाबदेही बढ़ाने की जरूरत है, ताकि सरकारी खजाने की रक्षा हो सके और आम जनता तक सुविधाएं पहुंच सकें।