सुखबीर बादल ने मांगी पेशी से छूट:चंडीगढ़ कोर्ट- पार्टी बैठक का दिया हवाला, 8 साल पुराना मानहानि केस, पेश न होने पर गैर-जमानती वारंट
आठ साल पुराने मानहानि मामले में शिरोमणि अकाली दल (SAD) के अध्यक्ष और पंजाब के पूर्व उप-मुख्यमंत्री सुखबीर सिंह बादल द्धारा सोमवार को चंडीगढ़ जिला अदालत में व्यक्तिगत पेशी से छूट के लिए अर्जी दाखिल की गई। आवेदन में अमृतसर में आयोजित पार्टी की अहम बैठक का हवाला देते हुए आज की सुनवाई में पेश होने से छूट मांगी गई है। यह आवेदन राजिंदर सिंह बनाम सुखबीर सिंह बादल व अन्य से जुड़े करीब 8 साल पुराने मानहानि मामले में अदालत में लगाया गया है। अर्जी में कहा गया है कि 2 फरवरी को शिरोमणि अकाली दल की पार्टी बैठक अमृतसर में बुलाई गई है, जिसमें कई गांवों, शहरों और राज्यों से बड़ी संख्या में लोग पहुंचने वाले हैं। बैठक में सुखबीर बादल की मौजूदगी जरूरी बताई गई है। आवेदन में यह भी कहा गया कि अगर सुखबीर बादल बैठक में शामिल नहीं होते हैं, तो दूर-दराज से आए लोगों को बिना किसी नतीजे के लौटना पड़ेगा। अर्जी में स्पष्ट किया गया कि उनकी गैरहाजिरी जानबूझकर नहीं है और वह अगली तारीख पर अदालत में पेश होने का वचन देते हैं। 8 साल पुराने मानहानि मामले से जुड़ा है केस यह मामला वर्ष 2017 का है। अखंड कीर्तनी जत्था के प्रवक्ता और मोहाली निवासी राजिंदर पाल सिंह ने सुखबीर सिंह बादल के खिलाफ चंडीगढ़ जिला कोर्ट में मानहानि की शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत भारतीय दंड संहिता की धारा 499 के तहत दायर की गई है। शिकायत के मुताबिक, 4 जनवरी 2017 को दिल्ली के तत्कालीन मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के राजिंदर पाल सिंह के आवास पर जाने के बाद सुखबीर सिंह बादल ने मीडिया में बयान दिया था। इस बयान में अखंड कीर्तनी जत्था को प्रतिबंधित आतंकी संगठन बब्बर खालसा इंटरनेशनल का राजनीतिक फ्रंट बताया गया था। शिकायतकर्ता का आरोप है कि इस बयान से उनके संगठन की छवि और प्रतिष्ठा को गंभीर नुकसान पहुंचा, जिसके बाद मानहानि का केस दायर किया गया। पेश न होने पर जारी हुए थे गैर-जमानती वारंट कोर्ट के आदेश के बावजूद 17 दिसंबर 2025 को सुखबीर बादल पेश नहीं हुए थे। इसके बाद अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट राहुल गर्ग की अदालत ने उनकी जमानत रद्द करते हुए गैर-जमानती वारंट जारी कर दिए थे। सख्त कार्रवाई की आशंका के चलते सुखबीर बादल बाद में अदालत में पेश हुए थे, जहां उन्हें जमानत मिल गई थी। इस मामले को रद्द कराने के लिए सुखबीर बादल ने पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी, लेकिन हाईकोर्ट ने याचिका खारिज कर दी थी। इसके बाद मामला चंडीगढ़ जिला कोर्ट में ही चल रहा है।
आठ साल पुराने मानहानि मामले में शिरोमणि अकाली दल (SAD) के अध्यक्ष और पंजाब के पूर्व उप-मुख्यमंत्री सुखबीर सिंह बादल द्धारा सोमवार को चंडीगढ़ जिला अदालत में व्यक्तिगत पेशी से छूट के लिए अर्जी दाखिल की गई। आवेदन में अमृतसर में आयोजित पार्टी की अहम बैठक का हवाला देते हुए आज की सुनवाई में पेश होने से छूट मांगी गई है। यह आवेदन राजिंदर सिंह बनाम सुखबीर सिंह बादल व अन्य से जुड़े करीब 8 साल पुराने मानहानि मामले में अदालत में लगाया गया है। अर्जी में कहा गया है कि 2 फरवरी को शिरोमणि अकाली दल की पार्टी बैठक अमृतसर में बुलाई गई है, जिसमें कई गांवों, शहरों और राज्यों से बड़ी संख्या में लोग पहुंचने वाले हैं। बैठक में सुखबीर बादल की मौजूदगी जरूरी बताई गई है। आवेदन में यह भी कहा गया कि अगर सुखबीर बादल बैठक में शामिल नहीं होते हैं, तो दूर-दराज से आए लोगों को बिना किसी नतीजे के लौटना पड़ेगा। अर्जी में स्पष्ट किया गया कि उनकी गैरहाजिरी जानबूझकर नहीं है और वह अगली तारीख पर अदालत में पेश होने का वचन देते हैं। 8 साल पुराने मानहानि मामले से जुड़ा है केस यह मामला वर्ष 2017 का है। अखंड कीर्तनी जत्था के प्रवक्ता और मोहाली निवासी राजिंदर पाल सिंह ने सुखबीर सिंह बादल के खिलाफ चंडीगढ़ जिला कोर्ट में मानहानि की शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत भारतीय दंड संहिता की धारा 499 के तहत दायर की गई है। शिकायत के मुताबिक, 4 जनवरी 2017 को दिल्ली के तत्कालीन मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के राजिंदर पाल सिंह के आवास पर जाने के बाद सुखबीर सिंह बादल ने मीडिया में बयान दिया था। इस बयान में अखंड कीर्तनी जत्था को प्रतिबंधित आतंकी संगठन बब्बर खालसा इंटरनेशनल का राजनीतिक फ्रंट बताया गया था। शिकायतकर्ता का आरोप है कि इस बयान से उनके संगठन की छवि और प्रतिष्ठा को गंभीर नुकसान पहुंचा, जिसके बाद मानहानि का केस दायर किया गया। पेश न होने पर जारी हुए थे गैर-जमानती वारंट कोर्ट के आदेश के बावजूद 17 दिसंबर 2025 को सुखबीर बादल पेश नहीं हुए थे। इसके बाद अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट राहुल गर्ग की अदालत ने उनकी जमानत रद्द करते हुए गैर-जमानती वारंट जारी कर दिए थे। सख्त कार्रवाई की आशंका के चलते सुखबीर बादल बाद में अदालत में पेश हुए थे, जहां उन्हें जमानत मिल गई थी। इस मामले को रद्द कराने के लिए सुखबीर बादल ने पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी, लेकिन हाईकोर्ट ने याचिका खारिज कर दी थी। इसके बाद मामला चंडीगढ़ जिला कोर्ट में ही चल रहा है।