भिंडी पोषक तत्वों का पावर हाउस:मधुमेह, हृदय रोग, पाचन और हड्डियों के लिए फायदेमंद, विटामिन के से भरपूर
भिंडी पोषक तत्वों का एक पावर हाउस है, जिसमें कम कैलोरी, उच्च फाइबर, विटामिन, फोलेट, मैग्नीशियम और एंटीऑक्सीडेंट्स प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं। यह पाचन में सुधार, ब्लड शुगर नियंत्रण, हृदय स्वास्थ्य को बेहतर बनाने और हड्डियों को मजबूत करने में सहायक है। आचार्य नरेंद्र देव कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय के सब्जी विज्ञान विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. आस्तिक झा ने इसे एक महत्वपूर्ण सब्जी बताया है। डॉ. झा के अनुसार, भिंडी की ग्रीष्मकालीन बुवाई फरवरी से मार्च के बीच की जाती है। आचार्य नरेंद्र देव कृषि विश्वविद्यालय के सब्जी विज्ञान विभाग ने 'नरेंद्र भिंडी-1' जैसी प्रमुख प्रजातियां विकसित की हैं। भारतीय सब्जी अनुसंधान संस्थान द्वारा विकसित 'काशी लालिमा', 'काशी चमन' और 'काशी सात धारी' जैसी प्रजातियां भी पोषक तत्वों से भरपूर और अधिक उपज देने वाली हैं। डॉ. झा ने बताया कि भिंडी में उच्च घुलनशील फाइबर होता है,जो कार्बोहाइड्रेट के अवशोषण को धीमा करके ब्लड शुगर के स्तर को नियंत्रित करता है। भिंडी की चिपचिपाहट आंतों को आराम देती है और कब्ज से राहत दिलाने में मदद करती है। हृदय स्वास्थ्य के लिए, इसका फाइबर और एंटीऑक्सीडेंट खराब कोलेस्ट्रॉल को कम करने और दिल को स्वस्थ रखने में सहायक होते हैं। भिंडी में विटामिन के और कैल्शियम प्रचुर मात्रा में होने के कारण यह हड्डियों के घनत्व को बढ़ाती है। कम कैलोरी और उच्च फाइबर के कारण यह पेट को लंबे समय तक भरा रखती है, जिससे वजन कम करने में भी मदद मिलती है। डॉ. आस्तिक झा ने यह भी बताया कि भिंडी आयोडीन का एक उच्च स्रोत है, जो आयोडीन की कमी से होने वाले घेंघा रोग से बचाव में सहायक है। उन्होंने दोहराया कि भिंडी में विटामिन सी, के, फोलेट, मैग्नीशियम और एंटीऑक्सीडेंट्स मधुमेह, पाचन, हृदय और हड्डियों को मजबूत करने के साथ-साथ वजन कम करने में भी बहुत सहायक हैं। किसान भिंडी की खेती करके अच्छा लाभ कमा सकते हैं, क्योंकि इसकी औसत उपज100 से120 क्विंटल प्रति हेक्टेयर होती है। लोग इसे अपने किचन गार्डन में भी आसानी से उगा सकते हैं। कृषि विश्वविद्यालय के सब्जी विज्ञान विभाग के सब्जी बीज विक्रय केंद्र पर किसानों को बीज भी आसानी से मिल रहा है।
भिंडी पोषक तत्वों का एक पावर हाउस है, जिसमें कम कैलोरी, उच्च फाइबर, विटामिन, फोलेट, मैग्नीशियम और एंटीऑक्सीडेंट्स प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं। यह पाचन में सुधार, ब्लड शुगर नियंत्रण, हृदय स्वास्थ्य को बेहतर बनाने और हड्डियों को मजबूत करने में सहायक है। आचार्य नरेंद्र देव कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय के सब्जी विज्ञान विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. आस्तिक झा ने इसे एक महत्वपूर्ण सब्जी बताया है। डॉ. झा के अनुसार, भिंडी की ग्रीष्मकालीन बुवाई फरवरी से मार्च के बीच की जाती है। आचार्य नरेंद्र देव कृषि विश्वविद्यालय के सब्जी विज्ञान विभाग ने 'नरेंद्र भिंडी-1' जैसी प्रमुख प्रजातियां विकसित की हैं। भारतीय सब्जी अनुसंधान संस्थान द्वारा विकसित 'काशी लालिमा', 'काशी चमन' और 'काशी सात धारी' जैसी प्रजातियां भी पोषक तत्वों से भरपूर और अधिक उपज देने वाली हैं। डॉ. झा ने बताया कि भिंडी में उच्च घुलनशील फाइबर होता है,जो कार्बोहाइड्रेट के अवशोषण को धीमा करके ब्लड शुगर के स्तर को नियंत्रित करता है। भिंडी की चिपचिपाहट आंतों को आराम देती है और कब्ज से राहत दिलाने में मदद करती है। हृदय स्वास्थ्य के लिए, इसका फाइबर और एंटीऑक्सीडेंट खराब कोलेस्ट्रॉल को कम करने और दिल को स्वस्थ रखने में सहायक होते हैं। भिंडी में विटामिन के और कैल्शियम प्रचुर मात्रा में होने के कारण यह हड्डियों के घनत्व को बढ़ाती है। कम कैलोरी और उच्च फाइबर के कारण यह पेट को लंबे समय तक भरा रखती है, जिससे वजन कम करने में भी मदद मिलती है। डॉ. आस्तिक झा ने यह भी बताया कि भिंडी आयोडीन का एक उच्च स्रोत है, जो आयोडीन की कमी से होने वाले घेंघा रोग से बचाव में सहायक है। उन्होंने दोहराया कि भिंडी में विटामिन सी, के, फोलेट, मैग्नीशियम और एंटीऑक्सीडेंट्स मधुमेह, पाचन, हृदय और हड्डियों को मजबूत करने के साथ-साथ वजन कम करने में भी बहुत सहायक हैं। किसान भिंडी की खेती करके अच्छा लाभ कमा सकते हैं, क्योंकि इसकी औसत उपज100 से120 क्विंटल प्रति हेक्टेयर होती है। लोग इसे अपने किचन गार्डन में भी आसानी से उगा सकते हैं। कृषि विश्वविद्यालय के सब्जी विज्ञान विभाग के सब्जी बीज विक्रय केंद्र पर किसानों को बीज भी आसानी से मिल रहा है।