मनोज पुगलिया के बेटे ने किया बड़ा खुलासा, ईवी कार से नहीं, इलेक्‍ट्रिक पोल से लगी आग, रेस्‍क्‍यू टीम को ये करना था

इंदौर के ब्रजेश्‍वरी एनेक्‍स में हुए अग्‍निकांड ने पूरे शहर को हिला कर रख दिया। इसमें एक ही परिवार और उनके रिश्‍तेदारों समेत 8 लोगों की मौत हो गई। हादसे के बाद मनोज पुगलिया के बेटे ने कुछ सवाल खडे किए हैं। उनका एक वीडियो वायरल हो रहा है। जिसमें वे ...

Mar 19, 2026 - 20:19
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मनोज पुगलिया के बेटे ने किया बड़ा खुलासा, ईवी कार से नहीं, इलेक्‍ट्रिक पोल से लगी आग, रेस्‍क्‍यू टीम को ये करना था

Indore Fire Tragedy
इंदौर के ब्रजेश्‍वरी एनेक्‍स में हुए अग्‍निकांड ने पूरे शहर को हिला कर रख दिया। इसमें एक ही परिवार और उनके रिश्‍तेदारों समेत 8 लोगों की मौत हो गई। हादसे के बाद मनोज पुगलिया के बेटे ने कुछ सवाल खडे किए हैं। उनका एक वीडियो वायरल हो रहा है। जिसमें वे मीडिया के सवालों का जवाब देते हुए कह रहे हैं कि घर में आग ईवी कार से नहीं लगी बल्‍कि घर के पास इलेक्‍ट्रिक पोल में शॉर्ट सर्किट से आग लगी।

ALSO READ: घर में डिजिटल लॉक और लोहे की जाली बनी 'काल', इंदौर के पुगलिया परिवार के 8 सदस्यों की जिंदा जलकर मौत उन्‍होंने कहा कि उन्‍होंने कहा कि ईवी कार का चार्जर तो लगा हुआ ही नहीं था। पोल से आग लगी जो घर में फैली। उन्‍होंने कहा कि रेस्‍क्‍यू टीम को सबसे पहले बिजली सप्‍लाय बंद करना था, लेकिन उन्‍होंने पानी डाल दिया, क्‍या पता करंट फैलने से परिवार के लोगों की मौत हुई हो। उन्‍होंने बताया कि जब वे घर में गए तो घुटनों तक पानी भरा था।

उन्‍होंने बताया कि सबसे पहले टीम को बिजली सप्‍लाय बंद करना था और पीएनजी गैस का कनेक्‍शन बंद करना था। अगर गैस पाइपलाइन में आग लग जाती तो पूरी कॉलोनी उड जाती।

लॉक की वजह से फंस गए : बता दें कि आग लगने के बाद बहू सिमरन और एक अन्य महिला का शव इसी चैनल गेट के पास सीढ़ियों पर मिला। आग से बचने के लिए वे सीढ़ियों के रास्ते छत के करीब तक तो पहुंचे, लेकिन ताला लगा होने के कारण वहीं फंस गए। बताया गया है कि चैनल गेट की चाबी मंदिर के पास रखी रहती थी।

एमओएस के लिए जगह नहीं : मनोज पुगलिया ने कोने के प्लॉट पर कुछ साल पहले ही तीन मंजिला मकान बनवाया था लेकिन इसमें एमओएस के लिए जगह नहीं छोड़ी गई थी। पूरे प्लॉट को कवर करके निर्माण किया गया था। कॉर्नर प्लॉट होने के बावजूद मकान को चारों तरफ से पैक रखा गया।

यदि घर में खुले हिस्से होते तो धुएं के कारण लोगों का दम घुटने से बच सकता था। मकान के पास ही बिजली का पोल था। कार में आग लगने के बाद पोल के तार भी जल गए थे और उसी के जरिए पहली मंजिल तक आग पहुंची। घर की किसी भी मंजिल पर आग बुझाने के यंत्र मौजूद नहीं थे।
Edited By: Naveen R Rangiyal