STP प्लांट नगर निगम को सौंपने पर विवाद:मेरठ में पार्षद का आरोप- कमीशनखोरी के चलते लिया जा रहा फैसला

मेरठ में 13 सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) मेडा से नगर निगम को हस्तांतरित किए जा रहे हैं। इस प्रक्रिया को लेकर औरनगर निगम की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए वार्ड 50 के पार्षद संजय सैनी ने आरोप लगाया है कि पर्याप्त तकनीकी संसाधन और स्टाफ की कमी के बावजूद निगम पर अतिरिक्त जिम्मेदारी डाली जा रही है, जिससे भविष्य में STP संचालन प्रभावित हो सकता है। संजय सैनी का कहना है कि नगर निगम में वर्तमान में उपलब्ध जूनियर इंजीनियर (JE) और सहायक अभियंता (AE) पहले से ही शहर के 90 वार्डों का कार्यभार संभाल रहे हैं। ऐसे में 13 STP प्लांटों के संचालन और रखरखाव की जिम्मेदारी भी उन्हीं अधिकारियों पर डालना व्यावहारिक नहीं है। उनका दावा है कि इस कार्य के लिए अतिरिक्त तकनीकी स्टाफ की आवश्यकता होगी। पार्षद के अनुसार मेरठ विकास प्राधिकरण (MDA) और नगर निगम के बीच हुए समझौते के तहत पहली किश्त में करीब 15 करोड़ रुपये नगर निगम को दिए जाने हैं। इसके बाद अन्य किश्तों में भी धनराशि हस्तांतरित की जाएगी। वहीं जलकल विभाग को प्रतिवर्ष एक करोड़ रुपये दिए जाने का प्रावधान बताया गया है। उन्होंने कहा कि STP संचालन में बिजली, ट्रांसफार्मर मरम्मत, डीजल और अन्य तकनीकी खर्च लगातार आते हैं। उनके मुताबिक यदि किसी प्लांट का ट्रांसफार्मर खराब हो जाए तो उसे तत्काल बदलने में लाखों रुपये का खर्च आता है। इसके अलावा कई प्लांटों में प्रतिदिन बड़ी मात्रा में डीजल की खपत भी होती है। पार्षद ने आरोप लगाया कि नगर निगम की वर्तमान व्यवस्था इस तरह के बड़े तकनीकी प्रोजेक्ट को प्रभावी ढंग से संचालित करने में सक्षम नहीं है। उन्होंने कहा कि यदि पर्याप्त इंजीनियरिंग स्टाफ और संसाधनों की व्यवस्था नहीं की गई तो प्लांटों का संचालन प्रभावित हो सकता है। उन्होंने नगर निगम प्रशासन पर निशाना साधते हुए कहा कि बड़े-बड़े विकास कार्यों और परियोजनाओं के दावे किए जा रहे हैं, लेकिन कई परियोजनाओं की जमीनी स्थिति अपेक्षित परिणाम नहीं दिखा रही है। उन्होंने पूर्व में कूड़ा निस्तारण और अन्य परियोजनाओं का उदाहरण देते हुए कहा कि योजनाओं के सफल क्रियान्वयन पर अधिक ध्यान देने की आवश्यकता है। पार्षद ने यह भी दावा किया कि हस्तांतरण संबंधी करारनामे पर जलकल विभाग और संबंधित अधिकारियों के हस्ताक्षर हो चुके हैं, जबकि कुछ आवश्यक औपचारिकताएं अभी शेष हैं। उन्होंने पूरे मामले की पारदर्शी समीक्षा और तकनीकी मूल्यांकन की मांग की है।

Jun 5, 2026 - 21:34
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STP प्लांट नगर निगम को सौंपने पर विवाद:मेरठ में पार्षद का आरोप- कमीशनखोरी के चलते लिया जा रहा फैसला
मेरठ में 13 सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) मेडा से नगर निगम को हस्तांतरित किए जा रहे हैं। इस प्रक्रिया को लेकर औरनगर निगम की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए वार्ड 50 के पार्षद संजय सैनी ने आरोप लगाया है कि पर्याप्त तकनीकी संसाधन और स्टाफ की कमी के बावजूद निगम पर अतिरिक्त जिम्मेदारी डाली जा रही है, जिससे भविष्य में STP संचालन प्रभावित हो सकता है। संजय सैनी का कहना है कि नगर निगम में वर्तमान में उपलब्ध जूनियर इंजीनियर (JE) और सहायक अभियंता (AE) पहले से ही शहर के 90 वार्डों का कार्यभार संभाल रहे हैं। ऐसे में 13 STP प्लांटों के संचालन और रखरखाव की जिम्मेदारी भी उन्हीं अधिकारियों पर डालना व्यावहारिक नहीं है। उनका दावा है कि इस कार्य के लिए अतिरिक्त तकनीकी स्टाफ की आवश्यकता होगी। पार्षद के अनुसार मेरठ विकास प्राधिकरण (MDA) और नगर निगम के बीच हुए समझौते के तहत पहली किश्त में करीब 15 करोड़ रुपये नगर निगम को दिए जाने हैं। इसके बाद अन्य किश्तों में भी धनराशि हस्तांतरित की जाएगी। वहीं जलकल विभाग को प्रतिवर्ष एक करोड़ रुपये दिए जाने का प्रावधान बताया गया है। उन्होंने कहा कि STP संचालन में बिजली, ट्रांसफार्मर मरम्मत, डीजल और अन्य तकनीकी खर्च लगातार आते हैं। उनके मुताबिक यदि किसी प्लांट का ट्रांसफार्मर खराब हो जाए तो उसे तत्काल बदलने में लाखों रुपये का खर्च आता है। इसके अलावा कई प्लांटों में प्रतिदिन बड़ी मात्रा में डीजल की खपत भी होती है। पार्षद ने आरोप लगाया कि नगर निगम की वर्तमान व्यवस्था इस तरह के बड़े तकनीकी प्रोजेक्ट को प्रभावी ढंग से संचालित करने में सक्षम नहीं है। उन्होंने कहा कि यदि पर्याप्त इंजीनियरिंग स्टाफ और संसाधनों की व्यवस्था नहीं की गई तो प्लांटों का संचालन प्रभावित हो सकता है। उन्होंने नगर निगम प्रशासन पर निशाना साधते हुए कहा कि बड़े-बड़े विकास कार्यों और परियोजनाओं के दावे किए जा रहे हैं, लेकिन कई परियोजनाओं की जमीनी स्थिति अपेक्षित परिणाम नहीं दिखा रही है। उन्होंने पूर्व में कूड़ा निस्तारण और अन्य परियोजनाओं का उदाहरण देते हुए कहा कि योजनाओं के सफल क्रियान्वयन पर अधिक ध्यान देने की आवश्यकता है। पार्षद ने यह भी दावा किया कि हस्तांतरण संबंधी करारनामे पर जलकल विभाग और संबंधित अधिकारियों के हस्ताक्षर हो चुके हैं, जबकि कुछ आवश्यक औपचारिकताएं अभी शेष हैं। उन्होंने पूरे मामले की पारदर्शी समीक्षा और तकनीकी मूल्यांकन की मांग की है।