ललितपुर में जेल से छूटते ही आरोपी जितेंद्र गिरफ्तार:LUCC चिटफंड घोटाले में करोड़ों की धोखाधड़ी मामले में दबोचा
ललितपुर में एलयूसीसी चिटफंड घोटाले के एक वांछित आरोपी को जेल से रिहा होने के कुछ ही घंटों बाद पुलिस ने दोबारा गिरफ्तार कर लिया। आरोपी पर करोड़ों रुपये की धोखाधड़ी और निवेशकों को ठगने का आरोप है। एलयूसीसी चिटफंड घोटाले में वांछित आरोपी जितेंद्र सिंह निरंजन पुत्र रतन सिंह निरंजन को पुलिस ने फिर से गिरफ्तार कर लिया है। खास बात यह है कि वह शनिवार शाम को जेल से रिहा हुआ था और रविवार को ही पुलिस के हत्थे चढ़ गया। पुलिस के अनुसार, तालबेहट कोतवाली में दर्ज एक मामले में एलयूसीसी चिटफंड कंपनी पर धोखाधड़ी, आपराधिक षड्यंत्र और फर्जी दस्तावेज तैयार कर करोड़ों रुपये हड़पने के आरोप हैं। शिकायतकर्ता ने यह भी आरोप लगाया था कि पैसा वापस मांगने पर गाली-गलौज और जान से मारने की धमकी दी गई। पूछताछ में आरोपी जितेंद्र ने बताया कि वर्ष 2015-16 में समीर अग्रवाल ने एलयूसीसी नामक चिटफंड कंपनी की शुरुआत की थी। उसे पहले डायरेक्टर और वर्ष 2017 में चेयरमैन बनाया गया था, जहां वह फरवरी 2021 तक पद पर रहा। जितेंद्र के मुताबिक, कंपनी का संचालन समीर अग्रवाल और उसके अन्य सहयोगियों द्वारा किया जाता था, जिनका नेटवर्क मुंबई, इंदौर, लखनऊ समेत कई राज्यों में फैला हुआ था। लोगों को लुभाने के लिए महंगे होटलों में सेमिनार आयोजित किए जाते थे और विदेश यात्राओं का लालच दिया जाता था, ताकि वे अधिक से अधिक निवेश करें। आरोपी ने यह भी बताया कि कंपनी के जरिए जुटाई गई धनराशि को विभिन्न स्थानों पर निवेश कर भारी मुनाफे का झांसा दिया जाता था। उसने ललितपुर, जालौन, टीकमगढ़, अशोकनगर और विदिशा सहित कई जिलों में अपना नेटवर्क फैलाया था। पुलिस के अनुसार, गिरफ्तारी के डर से आरोपी और उसके साथी हर 7-8 महीने में अपना कार्यालय बदलते रहते थे। फिलहाल पुलिस पूरे नेटवर्क की जांच कर रही है और अन्य आरोपियों की तलाश जारी है।
ललितपुर में एलयूसीसी चिटफंड घोटाले के एक वांछित आरोपी को जेल से रिहा होने के कुछ ही घंटों बाद पुलिस ने दोबारा गिरफ्तार कर लिया। आरोपी पर करोड़ों रुपये की धोखाधड़ी और निवेशकों को ठगने का आरोप है। एलयूसीसी चिटफंड घोटाले में वांछित आरोपी जितेंद्र सिंह निरंजन पुत्र रतन सिंह निरंजन को पुलिस ने फिर से गिरफ्तार कर लिया है। खास बात यह है कि वह शनिवार शाम को जेल से रिहा हुआ था और रविवार को ही पुलिस के हत्थे चढ़ गया। पुलिस के अनुसार, तालबेहट कोतवाली में दर्ज एक मामले में एलयूसीसी चिटफंड कंपनी पर धोखाधड़ी, आपराधिक षड्यंत्र और फर्जी दस्तावेज तैयार कर करोड़ों रुपये हड़पने के आरोप हैं। शिकायतकर्ता ने यह भी आरोप लगाया था कि पैसा वापस मांगने पर गाली-गलौज और जान से मारने की धमकी दी गई। पूछताछ में आरोपी जितेंद्र ने बताया कि वर्ष 2015-16 में समीर अग्रवाल ने एलयूसीसी नामक चिटफंड कंपनी की शुरुआत की थी। उसे पहले डायरेक्टर और वर्ष 2017 में चेयरमैन बनाया गया था, जहां वह फरवरी 2021 तक पद पर रहा। जितेंद्र के मुताबिक, कंपनी का संचालन समीर अग्रवाल और उसके अन्य सहयोगियों द्वारा किया जाता था, जिनका नेटवर्क मुंबई, इंदौर, लखनऊ समेत कई राज्यों में फैला हुआ था। लोगों को लुभाने के लिए महंगे होटलों में सेमिनार आयोजित किए जाते थे और विदेश यात्राओं का लालच दिया जाता था, ताकि वे अधिक से अधिक निवेश करें। आरोपी ने यह भी बताया कि कंपनी के जरिए जुटाई गई धनराशि को विभिन्न स्थानों पर निवेश कर भारी मुनाफे का झांसा दिया जाता था। उसने ललितपुर, जालौन, टीकमगढ़, अशोकनगर और विदिशा सहित कई जिलों में अपना नेटवर्क फैलाया था। पुलिस के अनुसार, गिरफ्तारी के डर से आरोपी और उसके साथी हर 7-8 महीने में अपना कार्यालय बदलते रहते थे। फिलहाल पुलिस पूरे नेटवर्क की जांच कर रही है और अन्य आरोपियों की तलाश जारी है।