सांस नली में फंसी मूंगफली, ऑक्सीजन 40% गिरी:फरीदाबाद में दो मासूम बच्चों की मौत को डॉक्टरों ने दी मात

फरीदाबाद में मूंगफली का दाना दो मासूमों के लिए जान का जोखिम बन गया। दोनों को गंभीर हालात में एक निजी अस्पताल लाया गया ,जहां पर डॉक्टरों ने दूरबीन विधि से सांस नली में फंसा मूंगफली का दाना निकाल लिया। दोनों बच्चों की सांस की नली में मूंगफली का दाना फंस गया था। एक बच्चे को अस्पताल ने छुट्‌टी दे दी है जबकि दूसरा बच्चा अभी भी एडमिट है। डॉक्टरों के मुताबिक अगर दोनों को समय रहते इलाज नही मिलता तो जान भी जा सकती थी। दोनों ही बच्चे फरीदाबाद के रहने वाले है। 1 साल 3 महीने के बच्चे की सांस नली में फंसी मूंगफली अस्पताल के प्रवक्ता पुनीत ने जानकारी देते हुए बताया कि पहले मामले 14 जनवरी को सुबह 1 साल तीन महीने के बच्चे को अस्पताल में लाया गया। बच्चे के परिजनों ने उसको करीब एक हफ्ते से खांसी और सांस लेने में दिक्कत बताई। उसका इलाज किसी दूसरे अस्पताल से चल रहा था। लेकिन हालात में सुधार ना होने पर उसको अमृता अस्पताल लाया गया। बच्चा जब अस्पताल लाया गया उसकी हालत लगातार बिगड़ती जा रही थी और उसका ऑक्सीजन स्तर गिर चुका था और बच्चा ठीक से सांस नहीं ले पा रहा था। बच्चे को तुरंत पीडियाट्रिक आईसीयू में भर्ती किया गया। अगले दिन सुबह इमरजेंसी ब्रोंकोस्कोपी की गई। जांच में पता चला कि बच्चे की दाईं मुख्य सांस की नली में एक मूंगफली पूरी तरह फंसी हुई थी, जिससे पूरे फेफड़े तक हवा पहुंच ही नहीं पा रही थी। दूरबीन विधि से मूंगफली के दाने को निकाला जिसके बाद डाक्टरों ने दूरबीन विधि से सांस नली में फंसा मूंगफली का दाना निकाल लिया । कुछ ही घंटों में बच्चे का ऑक्सीजन स्तर सामान्य होने लगा और अगले दिन उसे अस्पताल से छुट्टी दे दी गई। पल्मोनरी मेडिसिन के सीनियर कंसल्टेंट डॉ. सौरभ पाहुजा ने बताया,“मूंगफली और ऐसे खाद्य पदार्थ सांस की नली में जाने के बाद नमी के संपर्क में आकर फूल जाते हैं। इस बच्चे के फेफड़े तक बिल्कुल हवा नहीं पहुंच रही थी। अगर देर होती तो फेफड़ा बैठ सकता था, गंभीर संक्रमण या जानलेवा ऑक्सीजन की कमी हो सकती थी।” 1 साल 8 माह के बच्चे की ऑक्सीजन 40 प्रतिशत तक पहुंची दूसरे मामले में 1 साल 8 महीने के बच्चे को गंभीर हालात में अस्पताल में 14 जनवरी को ही लाया गया। बच्चे को महज 40 प्रतिशत ऑक्सीजन ही पहुंच रही थी। मेडिकल रिकॉर्ड के अनुसार बच्चा पिछले 10 दिनों से बीमार था और उसका इलाज कहीं और चल रहा था। स्कैन में पता चला कि उसके बाएं फेफड़े में गहराई तक कोई मूंगफली का दाना फंसा हुआ है। डॉ. सौरभ पाहुजा की देखरेख में बच्चे को तुरंत ऑपरेशन थिएटर ले जाया गया। बच्चे की बेहद छोटी सांस की नली और ऑक्सीजन कम होने के कारण सामान्य उपकरण काम नहीं आए, तब डॉक्टरों ने अत्याधुनिक क्रायोथेरेपी (फ्रीजिंग तकनीक) का इस्तेमाल कर दाने को सुरक्षित तरीके से बाहर निकाला। डॉ. पाहुजा के अनुसार दाने को कुछ ही समय में निकाल लिया , लेकिन कई दिनों तक फंसी रहने के कारण सांस की नली में सूजन और नुकसान हो चुका था। बच्चे को 2 से 3 दिन तक आईसीयू में निगरानी में रखा गया। जिसके बाद उसको सामान्य वार्ड में अभी भी अस्पताल में रखा गया है। डॉक्टरों की सख्त चेतावनी डॉक्टरों का कहना है कि इस तरह के मामले के लक्षणों को नजरअंदाज करने या इलाज में देरी के कारण ये जानलेवा बन जाते हैं। डॉ पाहुजा ने चेतावनी दी है कि ,“खाना खाते वक्त अचानक आई तेज खांसी को हल्के में न लें। अगर खांसी, घरघराहट या सांस की दिक्कत एक दिन से ज्यादा रहे, तो तुरंत डॉक्टर को दिखाएं। हो सकता है खाना नली में जाने की बजाय सांस की नली में चला गया हो।

Jan 17, 2026 - 22:02
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सांस नली में फंसी मूंगफली, ऑक्सीजन 40% गिरी:फरीदाबाद में दो मासूम बच्चों की मौत को डॉक्टरों ने दी मात
फरीदाबाद में मूंगफली का दाना दो मासूमों के लिए जान का जोखिम बन गया। दोनों को गंभीर हालात में एक निजी अस्पताल लाया गया ,जहां पर डॉक्टरों ने दूरबीन विधि से सांस नली में फंसा मूंगफली का दाना निकाल लिया। दोनों बच्चों की सांस की नली में मूंगफली का दाना फंस गया था। एक बच्चे को अस्पताल ने छुट्‌टी दे दी है जबकि दूसरा बच्चा अभी भी एडमिट है। डॉक्टरों के मुताबिक अगर दोनों को समय रहते इलाज नही मिलता तो जान भी जा सकती थी। दोनों ही बच्चे फरीदाबाद के रहने वाले है। 1 साल 3 महीने के बच्चे की सांस नली में फंसी मूंगफली अस्पताल के प्रवक्ता पुनीत ने जानकारी देते हुए बताया कि पहले मामले 14 जनवरी को सुबह 1 साल तीन महीने के बच्चे को अस्पताल में लाया गया। बच्चे के परिजनों ने उसको करीब एक हफ्ते से खांसी और सांस लेने में दिक्कत बताई। उसका इलाज किसी दूसरे अस्पताल से चल रहा था। लेकिन हालात में सुधार ना होने पर उसको अमृता अस्पताल लाया गया। बच्चा जब अस्पताल लाया गया उसकी हालत लगातार बिगड़ती जा रही थी और उसका ऑक्सीजन स्तर गिर चुका था और बच्चा ठीक से सांस नहीं ले पा रहा था। बच्चे को तुरंत पीडियाट्रिक आईसीयू में भर्ती किया गया। अगले दिन सुबह इमरजेंसी ब्रोंकोस्कोपी की गई। जांच में पता चला कि बच्चे की दाईं मुख्य सांस की नली में एक मूंगफली पूरी तरह फंसी हुई थी, जिससे पूरे फेफड़े तक हवा पहुंच ही नहीं पा रही थी। दूरबीन विधि से मूंगफली के दाने को निकाला जिसके बाद डाक्टरों ने दूरबीन विधि से सांस नली में फंसा मूंगफली का दाना निकाल लिया । कुछ ही घंटों में बच्चे का ऑक्सीजन स्तर सामान्य होने लगा और अगले दिन उसे अस्पताल से छुट्टी दे दी गई। पल्मोनरी मेडिसिन के सीनियर कंसल्टेंट डॉ. सौरभ पाहुजा ने बताया,“मूंगफली और ऐसे खाद्य पदार्थ सांस की नली में जाने के बाद नमी के संपर्क में आकर फूल जाते हैं। इस बच्चे के फेफड़े तक बिल्कुल हवा नहीं पहुंच रही थी। अगर देर होती तो फेफड़ा बैठ सकता था, गंभीर संक्रमण या जानलेवा ऑक्सीजन की कमी हो सकती थी।” 1 साल 8 माह के बच्चे की ऑक्सीजन 40 प्रतिशत तक पहुंची दूसरे मामले में 1 साल 8 महीने के बच्चे को गंभीर हालात में अस्पताल में 14 जनवरी को ही लाया गया। बच्चे को महज 40 प्रतिशत ऑक्सीजन ही पहुंच रही थी। मेडिकल रिकॉर्ड के अनुसार बच्चा पिछले 10 दिनों से बीमार था और उसका इलाज कहीं और चल रहा था। स्कैन में पता चला कि उसके बाएं फेफड़े में गहराई तक कोई मूंगफली का दाना फंसा हुआ है। डॉ. सौरभ पाहुजा की देखरेख में बच्चे को तुरंत ऑपरेशन थिएटर ले जाया गया। बच्चे की बेहद छोटी सांस की नली और ऑक्सीजन कम होने के कारण सामान्य उपकरण काम नहीं आए, तब डॉक्टरों ने अत्याधुनिक क्रायोथेरेपी (फ्रीजिंग तकनीक) का इस्तेमाल कर दाने को सुरक्षित तरीके से बाहर निकाला। डॉ. पाहुजा के अनुसार दाने को कुछ ही समय में निकाल लिया , लेकिन कई दिनों तक फंसी रहने के कारण सांस की नली में सूजन और नुकसान हो चुका था। बच्चे को 2 से 3 दिन तक आईसीयू में निगरानी में रखा गया। जिसके बाद उसको सामान्य वार्ड में अभी भी अस्पताल में रखा गया है। डॉक्टरों की सख्त चेतावनी डॉक्टरों का कहना है कि इस तरह के मामले के लक्षणों को नजरअंदाज करने या इलाज में देरी के कारण ये जानलेवा बन जाते हैं। डॉ पाहुजा ने चेतावनी दी है कि ,“खाना खाते वक्त अचानक आई तेज खांसी को हल्के में न लें। अगर खांसी, घरघराहट या सांस की दिक्कत एक दिन से ज्यादा रहे, तो तुरंत डॉक्टर को दिखाएं। हो सकता है खाना नली में जाने की बजाय सांस की नली में चला गया हो।