बरेली मंडल के 4 हजार किसानों के साथ महाघोटाला:4 करोड़ की फसल डकारी, 14 दिन से गांधी प्रतिमा पर सत्याग्रह, NBFC कंपनी और वेयरहाउसिंग पर आरोप

बरेली मंडल के किसानों के साथ धोखाधड़ी और लूट का एक ऐसा सनसनीखेज मामला सामने आया है जिसने प्रशासन और सिस्टम पर सवाल खड़े कर दिए हैं। 'आर्यधन फाइनेंशियल सॉल्यूशंस' और 'आर्या कोलैटरल वेयरहाउसिंग' नामक कंपनियों पर आरोप है कि उन्होंने बदायूं के बगरैन स्थित गोदाम से किसानों का करीब 10 हजार क्विंटल गेहूं और धान जबरन ट्रकों में भरकर लूट लिया। इस ठगी से बरेली आदर्श एग्रीटेक और शुभ कीर्ति प्रोड्यूसर कंपनी से जुड़े 4000 छोटे और सीमांत किसान सड़क पर आ गए हैं। न्याय की गुहार लगाते हुए किसान पिछले 14 दिनों से बरेली के गांधी पार्क में कड़ाके की ठंड के बीच सत्याग्रह पर बैठे हैं। आधी रात को ताले तोड़कर माल पार, गार्ड ने दी सूचना पीड़ित किसानों का कहना है कि उन्होंने उत्तर प्रदेश बीज विकास निगम के बगरैन (बदायूं) स्थित गोदाम को 3 साल के लिए किराए पर लिया था। अनाज की सुरक्षा के लिए 'आर्या कोलैटरल वेयरहाउसिंग' को 53 हजार रुपये प्रति माह दिए जा रहे थे। अनुबंध के अनुसार, सुरक्षा की पूरी जिम्मेदारी कंपनी की थी। लेकिन 8 दिसंबर 2025 और 15 जनवरी 2026 को कंपनी के जिम्मेदारों ने बिना किसी सूचना या सहमति के, गोदाम के ताले तोड़कर किसानों का 1031 मीट्रिक टन अनाज ट्रकों में भरकर गायब कर दिया। गार्ड ने जब इसकी सूचना दी, तब तक करोड़ों की फसल लूटी जा चुकी थी। राष्ट्रपति की दखल के बाद भी प्रशासन मौन, SIT जांच की मांग किसानों की इस लड़ाई ने अब दिल्ली तक हलचल मचा दी है। किसान आंदोलन समिति ने राष्ट्रपति को याचिका भेजी थी, जिस पर कड़ा संज्ञान लेते हुए राष्ट्रपति भवन ने उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव को कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। किसानों ने इस पूरे प्रकरण की जांच SIT (विशेष जांच दल) से कराने की मांग की है। हालांकि, स्थानीय पुलिस प्रशासन इसे 'सिविल नेचर' का मामला बताकर पल्ला झाड़ रहा है, जिससे अन्नदाताओं में भारी रोष है। कर्ज के जाल में फंसे किसान: बच्चों की पढ़ाई और शादी पर संकट सत्याग्रह पर बैठे डॉ. हरीश कुमार गंगवार और विपिन पटेल ने बताया कि किसानों ने फसल के लिए NBFC कंपनी से 90% वित्तपोषण लिया था। अनुबंध के मुताबिक माल रिलीज करने के लिए 90 दिन का अतिरिक्त समय था, लेकिन कंपनी ने समय से पहले ही डकैती की तर्ज पर माल उठा लिया। किसानों का कहना है, “हमारी जमा पूंजी लुट गई है, अब बच्चों की फीस भरने और शादियां करने तक के पैसे नहीं बचे हैं। यह सिर्फ आर्थिक नुकसान नहीं, हमारे साथ विश्वासघात है।” सियासी समर्थन: कांग्रेस और राहुल गांधी से न्याय की उम्मीद किसानों के इस आंदोलन को अब राजनीतिक समर्थन भी मिलने लगा है। सत्याग्रहियों ने नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी, मल्लिकार्जुन खड़गे और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को ज्ञापन भेजकर हस्तक्षेप की मांग की है। कांग्रेस ने किसानों के इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाने का आश्वासन दिया है। किसानों ने स्पष्ट कर दिया है कि जब तक उनकी फसल वापस नहीं मिलती और दोषियों पर कार्रवाई नहीं होती, उनका अनिश्चितकालीन सत्याग्रह जारी रहेगा। इन पर लगा है धोखाधड़ी का आरोप किसानों ने अपनी शिकायत में 'आर्यधन फाइनेंशियल' और 'आर्या कोलैटरल' के निदेशकों के नाम भी उजागर किए हैं, जिनमें आनंद चंद, मार्गपुरी प्रसन्ना राव, वैधेही रवींद्रन और पट्टाननाथन देवराजन शामिल हैं। आरोप है कि मुंबई और नोएडा स्थित इन कार्यालयों के प्रबंधन ने जानबूझकर किसानों को मानसिक और आर्थिक रूप से प्रताड़ित करने के लिए इस 'चोरी' को अंजाम दिया।

Jan 30, 2026 - 15:18
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बरेली मंडल के 4 हजार किसानों के साथ महाघोटाला:4 करोड़ की फसल डकारी, 14 दिन से गांधी प्रतिमा पर सत्याग्रह, NBFC कंपनी और वेयरहाउसिंग पर आरोप
बरेली मंडल के किसानों के साथ धोखाधड़ी और लूट का एक ऐसा सनसनीखेज मामला सामने आया है जिसने प्रशासन और सिस्टम पर सवाल खड़े कर दिए हैं। 'आर्यधन फाइनेंशियल सॉल्यूशंस' और 'आर्या कोलैटरल वेयरहाउसिंग' नामक कंपनियों पर आरोप है कि उन्होंने बदायूं के बगरैन स्थित गोदाम से किसानों का करीब 10 हजार क्विंटल गेहूं और धान जबरन ट्रकों में भरकर लूट लिया। इस ठगी से बरेली आदर्श एग्रीटेक और शुभ कीर्ति प्रोड्यूसर कंपनी से जुड़े 4000 छोटे और सीमांत किसान सड़क पर आ गए हैं। न्याय की गुहार लगाते हुए किसान पिछले 14 दिनों से बरेली के गांधी पार्क में कड़ाके की ठंड के बीच सत्याग्रह पर बैठे हैं। आधी रात को ताले तोड़कर माल पार, गार्ड ने दी सूचना पीड़ित किसानों का कहना है कि उन्होंने उत्तर प्रदेश बीज विकास निगम के बगरैन (बदायूं) स्थित गोदाम को 3 साल के लिए किराए पर लिया था। अनाज की सुरक्षा के लिए 'आर्या कोलैटरल वेयरहाउसिंग' को 53 हजार रुपये प्रति माह दिए जा रहे थे। अनुबंध के अनुसार, सुरक्षा की पूरी जिम्मेदारी कंपनी की थी। लेकिन 8 दिसंबर 2025 और 15 जनवरी 2026 को कंपनी के जिम्मेदारों ने बिना किसी सूचना या सहमति के, गोदाम के ताले तोड़कर किसानों का 1031 मीट्रिक टन अनाज ट्रकों में भरकर गायब कर दिया। गार्ड ने जब इसकी सूचना दी, तब तक करोड़ों की फसल लूटी जा चुकी थी। राष्ट्रपति की दखल के बाद भी प्रशासन मौन, SIT जांच की मांग किसानों की इस लड़ाई ने अब दिल्ली तक हलचल मचा दी है। किसान आंदोलन समिति ने राष्ट्रपति को याचिका भेजी थी, जिस पर कड़ा संज्ञान लेते हुए राष्ट्रपति भवन ने उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव को कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। किसानों ने इस पूरे प्रकरण की जांच SIT (विशेष जांच दल) से कराने की मांग की है। हालांकि, स्थानीय पुलिस प्रशासन इसे 'सिविल नेचर' का मामला बताकर पल्ला झाड़ रहा है, जिससे अन्नदाताओं में भारी रोष है। कर्ज के जाल में फंसे किसान: बच्चों की पढ़ाई और शादी पर संकट सत्याग्रह पर बैठे डॉ. हरीश कुमार गंगवार और विपिन पटेल ने बताया कि किसानों ने फसल के लिए NBFC कंपनी से 90% वित्तपोषण लिया था। अनुबंध के मुताबिक माल रिलीज करने के लिए 90 दिन का अतिरिक्त समय था, लेकिन कंपनी ने समय से पहले ही डकैती की तर्ज पर माल उठा लिया। किसानों का कहना है, “हमारी जमा पूंजी लुट गई है, अब बच्चों की फीस भरने और शादियां करने तक के पैसे नहीं बचे हैं। यह सिर्फ आर्थिक नुकसान नहीं, हमारे साथ विश्वासघात है।” सियासी समर्थन: कांग्रेस और राहुल गांधी से न्याय की उम्मीद किसानों के इस आंदोलन को अब राजनीतिक समर्थन भी मिलने लगा है। सत्याग्रहियों ने नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी, मल्लिकार्जुन खड़गे और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को ज्ञापन भेजकर हस्तक्षेप की मांग की है। कांग्रेस ने किसानों के इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाने का आश्वासन दिया है। किसानों ने स्पष्ट कर दिया है कि जब तक उनकी फसल वापस नहीं मिलती और दोषियों पर कार्रवाई नहीं होती, उनका अनिश्चितकालीन सत्याग्रह जारी रहेगा। इन पर लगा है धोखाधड़ी का आरोप किसानों ने अपनी शिकायत में 'आर्यधन फाइनेंशियल' और 'आर्या कोलैटरल' के निदेशकों के नाम भी उजागर किए हैं, जिनमें आनंद चंद, मार्गपुरी प्रसन्ना राव, वैधेही रवींद्रन और पट्टाननाथन देवराजन शामिल हैं। आरोप है कि मुंबई और नोएडा स्थित इन कार्यालयों के प्रबंधन ने जानबूझकर किसानों को मानसिक और आर्थिक रूप से प्रताड़ित करने के लिए इस 'चोरी' को अंजाम दिया।