पश्चिम बंगाल में चुनावी चाणक्य अमित शाह ने कैसे लिखी भाजपा की जीत की पटकथा?
पश्चिम बंगाल में पहली बार भाजपा की सरकार बनने जा रही है। पश्चिम बंगाल में जीत भाजपा और राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ का वर्षों पुराना सपना था, जिसको इस बार भाजपा के चुनावी चाणक्य अमित शाह ने साकार कर दिया। साल 2014 में दिल्ली में भाजपा के काबिज होने के ...
पश्चिम बंगाल में पहली बार भाजपा की सरकार बनने जा रही है। पश्चिम बंगाल में जीत भाजपा और राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ का वर्षों पुराना सपना था, जिसको इस बार भाजपा के चुनावी चाणक्य अमित शाह ने साकार कर दिया। साल 2014 में दिल्ली में भाजपा के काबिज होने के बाद अमित शाह ने भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष के तौर पर बंगाल विजय का जो मिशन शुरु किया वह अब पूरा हो रहा है। अब तक के रूझान और चुनाव परिणाम बताते है कि पश्चिम बंगाल में भाजपा अपने बल पर बहुमत का आंकड़ा पार करते हुए सरकार बनाने जा रही है।
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पश्चिम बंगाल में भाजपा की जीत का असली शिल्पकार गृहमंत्री अमित शाह है। अमित शाह में बंगाल में वोटिंग से पहले 15 दिन का डेरा डालने के साथ 50 से अधिक चुनावी सभाएं और रोड शो किया। पश्चिम बंगाल में भाजपा की प्रचंड जीत का पूरा श्रेय भाजपा के चुनावी चाणक्य माने जाने वाले केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह को जाता है। 2021 के विधानसभा चुनाव के नतीजों से सबक लेते हुए अमित शाह ने बंगाल विधानसभा की पूरी चुनावी कमान अपने हाथों में रखी। और बंगाल में भाजपा की जीत की पटकथा लिख दी।
अमित शाह की रणनीति सिर्फ रैलियां करना और भरना नहीं, बल्कि उनका पूरा फोकस चुनावी मैंनेजमेंट पर था। अमित शाह की अगुवाई में भाजपा ने एक ऐसा वार रूम तैयार किया हो कोलकाता से लेकर सीधे दिल्ली तक सीधा जुड़ा था। इसके साथ अमित शाह ने संगठन की तरफ से सुनील बंसल, महेश शर्मा, सीपी जोशी और संजय भाटिया जैसे अनुभवी लोगों को बंगाल भेजा और इन नेताओं ने लोकल स्तर पर समन्वय कर एक अक्रामक और सधी रणनीति तैयार की।
अमित शाह ने बंगाल में बूथ मैनेजमेंट पर काफी फोकस किया है। उन्होंने कार्यकर्ताओं को हर बूथ पर 10-15 अतिरिक्त वोटर जोड़ने के निर्देश दिए, ऐसे में एक विधानसभा क्षेत्र में ढाई हजार से लेकर साढ़े तीन हजार वोटर्स जोड़े गए। पश्चिम बंगाल में अब तक के रुझान में जिस तरह का कांटे का मुकाबला देखा गया उसमें यह अतिरिक्त वोट निर्णायक साबित हुए।
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दरअसल बंगाल विजय के लिए अमित शाह ने तीन स्तरीय एक रणनीति तैयार की। उन्होंने भाजपा के बंगाल यूनिट को बूथ स्तर तक री-इंजीनियर किया. हर बूथ पर 5-7 सक्रिय कार्यकर्ता, वोटर लिस्ट का डेटा एनालिसिस और एआई टूल्स से टारगेटेड कैंपेन जारी किया, दूसरा, मुद्दों का चयन. वे टीएमसी को गुंडागर्दी और भ्रष्टाचार का प्रतीक बताया।
तीसरी रणनीति मुद्दों का चुनाव, अमित शाह ने इस बार बंगाल में वोटरों के ध्रुवीकरण के लिए जहां सांप्रदायिक एजेंडा चलाया वहीं विकास का मिश्रण किया। अमित शाह का पूरा फोकस हिंदू वोटरों के ध्रुवीकरण पर था और चुनाव पऱिणाम बता रहे है कि चुनाव में भाजपा के पक्ष में जबरदस्त हिंदू वोटरों का ध्रुवीकरण हुआ। भाजपा ने बंगाल चुनाव में CAA, NRC जैसे मुद्दों को सांस्कृतिक सुरक्षा से जोड़, जिसने वोटर्स को इमोशनल प्रभावित किया। इस बार भाजपा ने जिस तरह से बंगाल के लोगों को अपने से जोड़ने का इमोशनल दांव चला उसका जमकर असर हुआ।
पश्चिम बंगाल चुनाव में अमित शाह की सबसे बड़ी रणनीति रही जमीन से शुरुआत। उन्होंने बंगाल में बूथ स्तर तक संगठन खड़ा करने पर जोर दिया। हजारों कार्यकर्ताओं की भर्ती, प्रशिक्षण और माइक्रो-मैनेजमेंट के जरिए भाजपा ने उन इलाकों में भी अपनी मौजूदगी दर्ज कराई, जहां पहले उसका कोई आधार नहीं था।
अमित शाह जिनकी पहचान एक चुनावी चाणक्य पर होती है, उन्होंने बंगाल में सीट-दर-सीट रणनीति बनाई, जिसमें किस क्षेत्र में किस मुद्दे को उठाना है, किस समुदाय को कैसे साधना है, और किस बूथ पर किस तरह की रणनीति अपनानी है, यह माइक्रो प्लानिंग भाजपा की चुनावी ताकत बनी और भाजपा ने चुनाव में प्रचंड जीत हासिल की।
इसके साथ ही बंगाल की राजनीति जो बीते दो दशक से स्थानीय मुद्दों पर केंद्रित रही, उसको अमित शाह ने बहुत ही आसानी से राष्ट्रीय विमर्श से जोड़ दिया। उन्होंने भ्रष्टाचार, कानून-व्यवस्था और बदलाव जैसे मुद्दों को जोरदार तरीके से उठाया, जिससे चुनावी बहस का फोकस बदल गया और इसका फायदा भाजपा को मिला।



