पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में बीजेपी की प्रचंड जीत के 5 बड़े कारण?
पश्चिम बंगाल में पहली बार भाजपा की सरकार बनने जा रही है। अब तक के चुनावी रुझान और परिणाम बता रहे है कि बंगाल में भाजपा बहुमत का आंकड़ा पारकर अपने बल पर सरकार बनाने जा रही है। पश्चिम बंगाल में भाजपा की जीत के 5 बड़े कारण क्या है जिसके चलते भाजपा ...
पश्चिम बंगाल में पहली बार भाजपा की सरकार बनने जा रही है। अब तक के चुनावी रुझान और परिणाम बता रहे है कि बंगाल में भाजपा बहुमत का आंकड़ा पारकर अपने बल पर सरकार बनाने जा रही है। पश्चिम बंगाल में भाजपा की जीत के 5 बड़े कारण क्या है जिसके चलते भाजपा प्रचंड जीत दर्ज करती हुई दिख रही है।
1-ममता के खिलाफ सत्ता विरोधी लहर- पश्चिम बंगाल में भाजपा की प्रचंड जीत के पीछे सबसे बड़ा कारण ममता सरकार के खिलाफ जबरदस्त सत्ता विरोधी लहर होना था। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में इस बार रिकॉर्ड 92 प्रतिशत से अधिक मतदान हुआ। चुनावी राज्य में जब रिकॉर्ड मतदान होता है तो इसे एंटी इनकंबेंसी यानी सत्ता विरोधी लहर माना जाता है और अब बंगाल के चुनाव नतीजे इस बात की पुष्टि भी करते है, यह बढ़ा वोट प्रतिशत सत्ता विरोधी लहर का था।
बंगाल में पहले चरण की वोटिंगं के बाद भाजपा की ओर से खुद गृहमंत्री अमित शाह ने बंगाल में रिक़ॉर्ड मतदान को सत्ता विरोधी लहर बताने के साथ परिवर्तन की लहर बताया था। मीडिया से बात करते हुए गृहमंत्री अमित शाह ने कहा था भी कि बंगाल में ममता सरकार के खिलाफ जो एंटी इंकमबेंसी थी उसके चलते इनकी बड़ी संख्या में लोग अपने घरों से निकलकर वोट दिए।
दरअसल विधानसभा चुनाव में भाजपा को बंगाल के लोगों ने एक विकल्प के तौर पर देखा। यह ठीक उसी तरह का था जिस तरह का 2011 वामपंथी शासन को हटाकर ममता सत्ता में आई थी उसी तरह इस बार विधानसभा चुनावों में लोगों के सामने भाजपा एक विकल्प के तौर पर नजर आई। बंगाल में वोटर्स ने भाजपा को एक विकल्प के तौर पर पंसद किया। बंगाल में भाजपा को विकल्प के दौर पर देखने के लिए ममता सरकार की नीतियां और महिला सुरक्षा और भष्टाचार का मुद्दा थता।
पश्चिम बंगाल में महिलाओं की सुरक्षा का मुद्दा आरजीकर मेडिकल कॉलेज के चलते ममता बनर्जी के विरोध में गया और जो महिला वोटर्स उनके पक्ष में जाता था वह इस बार छिटक गया। इसी तरह भ्रष्टाचार का मुद्दा भी इस चुनाव में प्रमुखता से उठाया गया। भाजपा ने लगातार आरोप लगाए कि राज्य में भ्रष्टाचार अपने चरम पर है और इसी मुद्दे को लेकर जनता के बीच अपनी बात रखने की कोशिश की और चुनाव नतीजे बताते है कि भाजपा इसमें सफल भी रही।
2-हिंदू वोटरों का भाजपा के पक्ष में जबरदस्त ध्रुवीकरण- पश्चिम बंगाल में हिंदू वोटरों का भाजपा के पक्ष में ध्रुवीकरण भाजपा की जीत का बड़ा कारण है। भाजपा ने पूरे चुनाव के दौरान हिंदू वोटर्स को रिझाने के कोई कोर कसर नहीं छोड़ी। चुनाव में भाजपा वोटर्स को इस बात को समझाने में सफल रही कि ममता बनर्जी और उनकी पार्टी टीएमसी मुस्लिमों की पार्टी है। ममता बनर्जी केवल मुस्लिम वोटर्स को रिझाने के लिए तुष्टिकरण की राजनीति कर रही है। चुनाव के दौरान अमित शाह से लेकर सुवेंदु अधिकारी ने साफ कहा कि हिंदू भाजपा के लिए वोट कर रहा है।
पश्चिम बंगाल में भाजपा के नेता जिस तरह से चुनावी मंच पर जय श्री राम का नारा लगाते हुए नजर आए, उनसे हिंदू वोटोरों का जबरदस्त ध्रुवीकरण किया। खुद पीएम मोदी ने जय मां काली और जय श्री राम के नारे के साथ बंगाल में भाजपा के चुनावी अभियान का आगाज किया था। चुनाव नतीजे बताते है कि भाजपा ने हिंदू बाहुल्य इलाकों क्लीन स्वीप किया है। वहीं मुस्लिम वोटर्स के बाहुल्य इलाकों में टीएमसी ने पिछले चुनाव के तुलना में कई सीटों का नुकसान उठाना पड़ा था।
3-मोदी का चेहरा ममता पर पड़ा भारी-बंगाल में भाजपा की प्रचंड जीत का बड़ा कारण मोदी का चेहरा रहा। चुनाव में भाजपा ने ममता बनर्जी के खिलाफ मोदी का चेहरा आगे किया। भाजपा ने अपनी पूरी चुनावी रणनीति को प्रधानमंत्री मोदी की लोकप्रियता और उनकी छवि के इर्द-गिर्द केंद्रित किया है। पार्टी के पोस्टर, रैलियां और डिजिटल कैंपेन हर जगह मोदी का प्रभाव साफ दिखाई देता है। यह रणनीति खासतौर पर उन मतदाताओं को आकर्षित करने के लिए बनाई गई है जो राष्ट्रीय मुद्दों और मजबूत नेतृत्व को प्राथमिकता देते हैं।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बंगाल में 19 से अधिक रैलियां करने के साथ 5 बड़े रोड शो किए। मोदी ने टीएमसी के प्रभाव वाले इलाकों में बिष्णुपुर, पुरुलिया, झाड़ग्राम और मेदिनीपुर जैसे क्षेत्रों में जनसभाओं को संबोधित किया। इन रैलियों में उन्होंने घुसपैठ, भ्रष्टाचार और परिवर्तन के मुद्दों पर जोर दिया। चुनाव में ममता बनर्जी की बंगाली अस्मिता का जवाब देने के लिए पीएम मोदी ने हुगली नदी में सैर करने के साथ दुकान पर पहुंचकर झालमुड़ी खाते नजर आए, जिसने बंगाल के लोगों से भाजपा को सीधे कनेक्टर किया। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि मोदी को चुनाव का चेहरा बनाकर भाजपा ने चुनाव को लोकल मुद्दों से उठाकर राष्ट्रीय विमर्श में बदलने की जो कोशिश की थी वह पूरी तरह सफल रही।
4- BJP की चुनावी रणनीति,बूथ मैनेजमेंट पर फोकस- पश्चिम बंगाल में भाजपा की जीत का बड़ा कारण भाजपा की चुनाव रणनीति रही है। केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के नेतृत्व में भाजपा का पूरा फोकस बूथ मैनेजमेंट पर रहा। अमित शाह का वोटिंग से ठीक पहले 15 दिन बंगाल में डेरा डालना और 50 से अधिक सभाएं और रोड शो से भाजपा का कार्यकर्ता मोटिवेट हुआ और उसने वोटर्स के बूथ तक पहुंचाकर भाजपा की जीत की पटकथा लिख दी। भाजपा की ओऱ से अमित शाह के अगुवाई में केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव, सुनील बंसल ने ऐसी रणनीति तैयार की, जिससे ममता के दुर्ग को धाराशयी कर दिया।
वहीं वोटिंग से ठीक पहले जिस तरह से टीएमसी के लिए काम करने वाली कंपनी I-PAC का काम समेटना भी टीएमसी की हार का बड़ा कारण रही। 2021 के चुनाव के बाद पश्चिम बंगाल में भाजपा ने लगातार काम किया और पार्टी ने बूथ स्तर तक संगठन मजबूत किया और कार्यकर्ताओं का एक नेटवर्क खड़ा किया, जिसका फायदा चुनाव में मिला।
5-बंगाल चुनाव में SIR गेमचेंजर-पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में SIR का मुद्दा हावी रहा। चुनाव आयोग ने राज्य में विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के तहत 91 लाख से अधिक वोटरों को सूची से हटाया, जिसका विपक्ष ने खूब विरोध किया। चुनाव आयोग ने माना कि SIR के कारण बंगाल में 92 प्रतिशत से अधिक वोटिंग हुई है। बंगाल की राजनीति के जानकार कहते है कि चुनाव के दौरान बाहरी राज्यों में रह रहे वोटर्स बंगाल लौटे और उन्होंने जमकर वोटिंग की जो भाजपा के पक्ष में मानी गई।



