दो साल पहले बना जलमीनार, पानी के लिए लोग परेशान:भागलपुर में गुस्साए ग्रामीणों ने दी आंदोलन की चेतावनी, कहा- मोटर अक्सर खराब रहता
भागलपुर के शाहकुंड प्रखंड की दरियापुर पंचायत के वार्ड संख्या-5 बोरगांव में पिछले पांच महीनों से जल संकट बना हुआ है। इससे हजारों की आबादी प्रभावित है, जिससे ग्रामीणों में भारी आक्रोश है। ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने पंचायत स्तर से लेकर जिला प्रशासन तक कई बार अपनी समस्या से अवगत कराया, लेकिन अब तक कोई ठोस पहल नहीं की गई। ग्रामीणों के अनुसार, लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग (पीएचईडी) ने लगभग दो साल पहले गांव में एक जलमीनार का निर्माण कराया था। हालांकि, यह जलमीनार आज तक सुचारु रूप से संचालित नहीं हो सकी है। जलमीनार का मोटर अक्सर खराब होता ग्रामीणों का कहना है कि जलमीनार का मोटर अक्सर खराब हो जाता है। वर्तमान में भी पिछले पांच महीनों से मोटर जला हुआ है। इसकी न तो मरम्मत कराई गई है और न ही पानी की कोई वैकल्पिक व्यवस्था की गई है। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि जलमीनार निर्माण में ठेकेदार की मनमानी के कारण यह स्थिति उत्पन्न हुई है। जब भी वे अपनी समस्या लेकर ठेकेदार या संबंधित अधिकारियों के पास जाते हैं, तो उन्हें फटकार लगाकर भगा दिया जाता है। जलमीनार के गेट पर 24 घंटे ताला लगा रहता है। ग्रामीणों की दिनचर्या बुरी तरह प्रभावित जल संकट के कारण ग्रामीणों की दिनचर्या बुरी तरह प्रभावित हो रही है। महिलाओं और बच्चों को दूर-दराज के इलाकों से पानी लाना पड़ता है या पड़ोसियों पर निर्भर रहना पड़ता है। बुजुर्गों, बच्चों और बीमार लोगों को सबसे अधिक परेशानी हो रही है। ग्रामीणों ने कई बार लिखित आवेदन देकर विभागीय अधिकारियों को स्थिति से अवगत कराया है, लेकिन किसी भी अधिकारी ने गांव में निरीक्षण नहीं किया है। न ही समस्या समाधान के लिए कोई ठोस कदम उठाया गया है। इससे ग्रामीणों में प्रशासन के प्रति नाराजगी बढ़ रही है और उन्होंने आंदोलन की चेतावनी दी है।
भागलपुर के शाहकुंड प्रखंड की दरियापुर पंचायत के वार्ड संख्या-5 बोरगांव में पिछले पांच महीनों से जल संकट बना हुआ है। इससे हजारों की आबादी प्रभावित है, जिससे ग्रामीणों में भारी आक्रोश है। ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने पंचायत स्तर से लेकर जिला प्रशासन तक कई बार अपनी समस्या से अवगत कराया, लेकिन अब तक कोई ठोस पहल नहीं की गई। ग्रामीणों के अनुसार, लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग (पीएचईडी) ने लगभग दो साल पहले गांव में एक जलमीनार का निर्माण कराया था। हालांकि, यह जलमीनार आज तक सुचारु रूप से संचालित नहीं हो सकी है। जलमीनार का मोटर अक्सर खराब होता ग्रामीणों का कहना है कि जलमीनार का मोटर अक्सर खराब हो जाता है। वर्तमान में भी पिछले पांच महीनों से मोटर जला हुआ है। इसकी न तो मरम्मत कराई गई है और न ही पानी की कोई वैकल्पिक व्यवस्था की गई है। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि जलमीनार निर्माण में ठेकेदार की मनमानी के कारण यह स्थिति उत्पन्न हुई है। जब भी वे अपनी समस्या लेकर ठेकेदार या संबंधित अधिकारियों के पास जाते हैं, तो उन्हें फटकार लगाकर भगा दिया जाता है। जलमीनार के गेट पर 24 घंटे ताला लगा रहता है। ग्रामीणों की दिनचर्या बुरी तरह प्रभावित जल संकट के कारण ग्रामीणों की दिनचर्या बुरी तरह प्रभावित हो रही है। महिलाओं और बच्चों को दूर-दराज के इलाकों से पानी लाना पड़ता है या पड़ोसियों पर निर्भर रहना पड़ता है। बुजुर्गों, बच्चों और बीमार लोगों को सबसे अधिक परेशानी हो रही है। ग्रामीणों ने कई बार लिखित आवेदन देकर विभागीय अधिकारियों को स्थिति से अवगत कराया है, लेकिन किसी भी अधिकारी ने गांव में निरीक्षण नहीं किया है। न ही समस्या समाधान के लिए कोई ठोस कदम उठाया गया है। इससे ग्रामीणों में प्रशासन के प्रति नाराजगी बढ़ रही है और उन्होंने आंदोलन की चेतावनी दी है।