Holika Dahan Puja 2026: क्यों खास है होलिका पूजन? इन Special चीजों को अर्पित करने से मिलेगा वरदान

होली का त्योहार एकदम नजदीक आ चुका है। हिंदू धर्म में होली पर्व को महत्वपूर्ण और अत्यंत पवित्र माना जाता है। होलिका दहन फाल्गुन महीने की पूर्णिमा तिथि को मनाया जाता है। यह पर्व बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक माना जाता है। इस पर्व के पीछे पौराणिक मान्यता है कि इसी अवसर पर होलिका ने भक्त प्रह्लाद को अपनी गोद में लेकर अग्नि में बैठकर उसे जलाने का प्रयास किया था। उसे यह वरदान प्राप्त था कि अग्नि उसका कुछ भी बिगाड़ नहीं सकेगी। लेकिन प्रह्लाद की अटूट भक्ति और भगवान विष्णु की कृपा से वह सुरक्षित रहे, जबकि होलिका स्वयं अग्नि की ज्वाला में भस्म हो गई। तभी से होलिका दहन की परंपरा शुरू हुई। मान्यता है कि इस अग्नि के साथ नकारात्मकता और अधर्म का अंत होता है तथा सत्य और धर्म की जीत का संदेश मिलता है।माना जाता है कि होलिका दहन के दिन अगर आप सही पूजा विधि से पूजन करते हैं, तो घर में हमेशा खुशहाली बनीं रहती है और जीवन में सकारात्मकता बनीं रहती है। आइए आपको बताते हैं होलिका दहन की पूजा किस विधि से करनी चाहिए।होलिका दहन पूजा विधि - होलिका दहन की पूजा करते समय आपको दिशा का ध्यान जरुर रखना चाहिए। पूजन के समय आप पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके बैठें।- होलिका की पूजा करते समय एक लोटा जल, माला, रोली, चावल गंध पुष्प कच्चा, सूत गुड़ साबुत हल्दी मूंग, बताशे गुलाल, गुजिया आदि रखनी चाहिए। - इसके बाद पकी हुई फसलें जैसे चने या गेहूं की बालियां भी सामग्री के रुप में रखी जाती हैं।- होलिका दहन करते समय गाय के गोबर से बनें उपलों की माला लाएं और होलिका पूजन के स्थान पर रखें।- गोबर के उपलों की एक माला पितरों के नाम की, एक हनुमान जी के नाम की, एक शीतला माता के नाम की और एक अपने घर के परिवार के नाम का रखें।- होलिका पूजन के समय कच्चे धागे को होलिका के चारों ओर तीन या सात बार परिक्रमा करते हुए लपेटें। इसके बाद लोटे में रखा शुद्ध जल लेकर श्रद्धा से होलिका के चारों तरफ अर्पित करें।- वस्तुएं भी एक-एक करके होलिका के पास समर्पित करें और रोली चावल और पुष्प सभी चीजों को इस पूजा में इस्तेमाल करें।- इस विधि के अनुसार होलिका का पूजन करें और होलिका की परिक्रमा 7 बार करें।- होलिका दहन की पूजा के साथ नरसिंह भगवान की पूजा करें और घर की समृद्धि की कामना करें।- होलिका दहन के दौरान श्रद्धापूर्वक जलती हुई होलिका की सात बार परिक्रमा करें। इसके साथ ही शुभ फल की कामना से अग्नि में नारियल और कपूर अर्पित करें।- होलिका दहन के दिन आपको घर के सभी लोगों को उबटन लगाकर उस उबटन को होलिका को अर्पित कर देना चाहिए। ऐसा करने से घर की सभी नकारात्मक ऊर्जाएं दूर होती है। होलिका दहन का धार्मिक परमपराएंहोलिका दहन के अवसर पर लकड़ी, सूखे पत्ते और गोबर के उपलों से पवित्र अग्नि प्रज्वलित करना प्रमुख परंपरा मानी जाती है। इस दौरान श्रद्धालु अग्नि की परिक्रमा करते हैं और नारियल, गेहूं की बालियां, चना तथा पुष्प जैसी सामग्रियां समर्पित करते हैं। मान्यता है कि यह पावन अग्नि नकारात्मक ऊर्जा और अशुद्धियों का नाश कर जीवन में सुख, शांति और समृद्धि का संदेश देती है।

Mar 1, 2026 - 18:00
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Holika Dahan Puja 2026: क्यों खास है होलिका पूजन? इन Special चीजों को अर्पित करने से मिलेगा वरदान
होली का त्योहार एकदम नजदीक आ चुका है। हिंदू धर्म में होली पर्व को महत्वपूर्ण और अत्यंत पवित्र माना जाता है। होलिका दहन फाल्गुन महीने की पूर्णिमा तिथि को मनाया जाता है। यह पर्व बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक माना जाता है। इस पर्व के पीछे पौराणिक मान्यता है कि इसी अवसर पर होलिका ने भक्त प्रह्लाद को अपनी गोद में लेकर अग्नि में बैठकर उसे जलाने का प्रयास किया था। उसे यह वरदान प्राप्त था कि अग्नि उसका कुछ भी बिगाड़ नहीं सकेगी। लेकिन प्रह्लाद की अटूट भक्ति और भगवान विष्णु की कृपा से वह सुरक्षित रहे, जबकि होलिका स्वयं अग्नि की ज्वाला में भस्म हो गई। तभी से होलिका दहन की परंपरा शुरू हुई। मान्यता है कि इस अग्नि के साथ नकारात्मकता और अधर्म का अंत होता है तथा सत्य और धर्म की जीत का संदेश मिलता है।

माना जाता है कि होलिका दहन के दिन अगर आप सही पूजा विधि से पूजन करते हैं, तो घर में हमेशा खुशहाली बनीं रहती है और जीवन में सकारात्मकता बनीं रहती है। आइए आपको बताते हैं होलिका दहन की पूजा किस विधि से करनी चाहिए।

होलिका दहन पूजा विधि 

- होलिका दहन की पूजा करते समय आपको दिशा का ध्यान जरुर रखना चाहिए। पूजन के समय आप पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके बैठें।

- होलिका की पूजा करते समय एक लोटा जल, माला, रोली, चावल गंध पुष्प कच्चा, सूत गुड़ साबुत हल्दी मूंग, बताशे गुलाल, गुजिया आदि रखनी चाहिए। 

- इसके बाद पकी हुई फसलें जैसे चने या गेहूं की बालियां भी सामग्री के रुप में रखी जाती हैं।

- होलिका दहन करते समय गाय के गोबर से बनें उपलों की माला लाएं और होलिका पूजन के स्थान पर रखें।

- गोबर के उपलों की एक माला पितरों के नाम की, एक हनुमान जी के नाम की, एक शीतला माता के नाम की और एक अपने घर के परिवार के नाम का रखें।

- होलिका पूजन के समय कच्चे धागे को होलिका के चारों ओर तीन या सात बार परिक्रमा करते हुए लपेटें। इसके बाद लोटे में रखा शुद्ध जल लेकर श्रद्धा से होलिका के चारों तरफ अर्पित करें।

- वस्तुएं भी एक-एक करके होलिका के पास समर्पित करें और रोली चावल और पुष्प सभी चीजों को इस पूजा में इस्तेमाल करें।

- इस विधि के अनुसार होलिका का पूजन करें और होलिका की परिक्रमा 7 बार करें।

- होलिका दहन की पूजा के साथ नरसिंह भगवान की पूजा करें और घर की समृद्धि की कामना करें।

- होलिका दहन के दौरान श्रद्धापूर्वक जलती हुई होलिका की सात बार परिक्रमा करें। इसके साथ ही शुभ फल की कामना से अग्नि में नारियल और कपूर अर्पित करें।

- होलिका दहन के दिन आपको घर के सभी लोगों को उबटन लगाकर उस उबटन को होलिका को अर्पित कर देना चाहिए। ऐसा करने से घर की सभी नकारात्मक ऊर्जाएं दूर होती है। 

होलिका दहन का धार्मिक परमपराएं

होलिका दहन के अवसर पर लकड़ी, सूखे पत्ते और गोबर के उपलों से पवित्र अग्नि प्रज्वलित करना प्रमुख परंपरा मानी जाती है। इस दौरान श्रद्धालु अग्नि की परिक्रमा करते हैं और नारियल, गेहूं की बालियां, चना तथा पुष्प जैसी सामग्रियां समर्पित करते हैं। मान्यता है कि यह पावन अग्नि नकारात्मक ऊर्जा और अशुद्धियों का नाश कर जीवन में सुख, शांति और समृद्धि का संदेश देती है।