सर्जरी करने वाले फर्जी डॉक्टर की जमानत अर्जी खारिज:बिना डिग्री अस्पताल संचालित करने का मामला, हाईकोर्ट ने नहीं दी राहत

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बिना मेडिकल डिग्री के अस्पताल संचालित करने और एक मरीज की सर्जरी में शामिल रहने के आरोपित की जमानत अर्जी खारिज कर दी। मामला रामपुर जिले के सिविल लाइंस थाना क्षेत्र में दर्ज केस से जुड़ा है, जिसमें आरोपी पर भारतीय न्याय संहिता की धारा 105, 318(4) तथा इंडियन मेडिकल एक्ट की धारा 34 के तहत आरोप लगाए गए हैं। न्यायमूर्ति अरुण कुमार सिंह देशवाल की अदालत में सुनवाई के दौरान आरोपी पक्ष ने दलील दी कि उसे झूठा फंसाया गया है। हालांकि उसने यह स्वीकार किया कि वह बिना किसी मेडिकल डिग्री के अस्पताल चला रहा था। बचाव पक्ष का कहना था कि मृतक का ऑपरेशन डॉ. अजय कुमार गौतम ने किया था और आरोपी को जमानत दी जानी चाहिए। सरकार ने जमानत का विरोध किया प्रथम सूचक और राज्य सरकार की ओर से जमानत का विरोध करते हुए कहा गया कि सीसीटीवी फुटेज में आरोपी और डॉ. अजय कुमार गौतम दोनों ऑपरेशन थिएटर में जाते दिखाई दे रहे हैं। साथ ही शुरुआती उपचार भी आरोपी द्वारा किए जाने की बात सामने आई है। अभियोजन पक्ष ने यह भी बताया कि डॉ. अजय कुमार गौतम के बयान तथा स्टाफ नर्स मंताशा के बयान में भी आरोपी की सर्जरी में सक्रिय भूमिका का उल्लेख है। अदालत ने मामले के तथ्यों, उपलब्ध साक्ष्यों, सीसीटीवी फुटेज, सह-अभियुक्त और नर्स के बयानों को ध्यान में रखते हुए माना कि आरोपी के खिलाफ प्रथम दृष्टया गंभीर आरोप हैं। अदालत ने यह भी माना कि आरोपी के पास कोई मेडिकल डिग्री नहीं थी, फिर भी वह सर्जरी में शामिल रहा। इन परिस्थितियों में हाईकोर्ट ने जमानत देने से इनकार करते हुए याचिका खारिज कर दी।

Jun 5, 2026 - 21:34
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सर्जरी करने वाले फर्जी डॉक्टर की जमानत अर्जी खारिज:बिना डिग्री अस्पताल संचालित करने का मामला, हाईकोर्ट ने नहीं दी राहत
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बिना मेडिकल डिग्री के अस्पताल संचालित करने और एक मरीज की सर्जरी में शामिल रहने के आरोपित की जमानत अर्जी खारिज कर दी। मामला रामपुर जिले के सिविल लाइंस थाना क्षेत्र में दर्ज केस से जुड़ा है, जिसमें आरोपी पर भारतीय न्याय संहिता की धारा 105, 318(4) तथा इंडियन मेडिकल एक्ट की धारा 34 के तहत आरोप लगाए गए हैं। न्यायमूर्ति अरुण कुमार सिंह देशवाल की अदालत में सुनवाई के दौरान आरोपी पक्ष ने दलील दी कि उसे झूठा फंसाया गया है। हालांकि उसने यह स्वीकार किया कि वह बिना किसी मेडिकल डिग्री के अस्पताल चला रहा था। बचाव पक्ष का कहना था कि मृतक का ऑपरेशन डॉ. अजय कुमार गौतम ने किया था और आरोपी को जमानत दी जानी चाहिए। सरकार ने जमानत का विरोध किया प्रथम सूचक और राज्य सरकार की ओर से जमानत का विरोध करते हुए कहा गया कि सीसीटीवी फुटेज में आरोपी और डॉ. अजय कुमार गौतम दोनों ऑपरेशन थिएटर में जाते दिखाई दे रहे हैं। साथ ही शुरुआती उपचार भी आरोपी द्वारा किए जाने की बात सामने आई है। अभियोजन पक्ष ने यह भी बताया कि डॉ. अजय कुमार गौतम के बयान तथा स्टाफ नर्स मंताशा के बयान में भी आरोपी की सर्जरी में सक्रिय भूमिका का उल्लेख है। अदालत ने मामले के तथ्यों, उपलब्ध साक्ष्यों, सीसीटीवी फुटेज, सह-अभियुक्त और नर्स के बयानों को ध्यान में रखते हुए माना कि आरोपी के खिलाफ प्रथम दृष्टया गंभीर आरोप हैं। अदालत ने यह भी माना कि आरोपी के पास कोई मेडिकल डिग्री नहीं थी, फिर भी वह सर्जरी में शामिल रहा। इन परिस्थितियों में हाईकोर्ट ने जमानत देने से इनकार करते हुए याचिका खारिज कर दी।