न्याय के साथ खड़ा उत्तराखंड, संवेदनशील नेतृत्व की मिसाल – मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी”
न्याय के साथ खड़ा उत्तराखंड, संवेदनशील नेतृत्व की मिसाल – मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी”
“न्याय के साथ खड़ा उत्तराखंड, संवेदनशील नेतृत्व की मिसाल – मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी”
बेटी अंकिता भंडारी को न्याय दिलाना केवल एक प्रशासनिक निर्णय नहीं, बल्कि देवभूमि उत्तराखंड की आत्मा और संवेदनशीलता का प्रतीक है। मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने यह स्पष्ट कर दिया है कि उनकी सरकार के लिए न्याय, मानवता और मातृशक्ति का सम्मान सर्वोपरि है।
अंकिता के माता-पिता से भेंट के दौरान उनकी मांग को गंभीरता से सुनते हुए *मुख्यमंत्री जी ने CBI जांच का निर्णय* लेकर यह साबित कर दिया कि उत्तराखंड में किसी भी प्रकार का दबाव, प्रभाव या राजनीतिक हस्तक्षेप न्याय के मार्ग में बाधा नहीं बन सकता। यह निर्णय उस भरोसे को मजबूत करता है जो जनता ने धामी सरकार पर जताया है।
मुख्यमंत्री धामी जी का यह स्पष्ट संदेश है कि *देवभूमि उत्तराखंड में कानून का राज है।* यहाँ दोषी चाहे कितना भी प्रभावशाली क्यों न हो, उसे किसी भी स्थिति में बख्शा नहीं जाएगा। यह निर्णय उन सभी परिवारों के लिए आश्वासन है, जो न्याय की उम्मीद में सरकार की ओर देखते हैं।
मातृशक्ति की सुरक्षा और सम्मान के लिए धामी सरकार की प्रतिबद्धता केवल घोषणाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि ठोस फैसलों और कठोर कार्रवाई में दिखाई देती है। बेटी अंकिता को न्याय दिलाने की दिशा में उठाया गया यह कदम, प्रदेश की हर बेटी के लिए एक सुरक्षा कवच है।
आज जब देश नेतृत्व में संवेदनशीलता, दृढ़ता और नैतिक साहस की तलाश करता है, तब मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का यह निर्णय उन्हें एक *जिम्मेदार, संवेदनशील और न्यायप्रिय* नेता के रूप में स्थापित करता है। पूरा उत्तराखंड इस फैसले के साथ खड़ा है और न्याय की इस लड़ाई में सरकार के साथ कदम से कदम मिलाकर आगे बढ़ रहा है।
*धामी सरकार – न्याय, विश्वास और मातृशक्ति सम्मान की पहचान।*



