भागलपुर शहर की दीवारों पर उभरी मंजूषा कला:लोक विरासत को मिला नया मंच, महिला कलाकार जीवंत कर रही अंग क्षेत्र की पहचान

भागलपुर. अंग क्षेत्र की गौरवशाली लोक कला मंजूषा एक बार फिर अपनी जड़ों से निकलकर शहर की दीवारों पर जीवंत हो उठी है। परंपरा, आस्था और संस्कृति का यह अनूठा संगम अब सरकारी भवनों की दीवारों पर रंगों के माध्यम से अपनी कहानी खुद बयां कर रहा है। जिला प्रशासन की पहल का उद्देश्य स्पष्ट है कि मंजूषा कला को नया मंच दिया जाए और युवा पीढ़ी को अपनी लोक विरासत से जोड़ा जाए। जिला प्रशासन के सहयोग से मंजूषा गुरु मनोज पंडित के नेतृत्व में महिला कलाकारों की टीम शहर के विभिन्न सरकारी भवनों की दीवारों पर आकृतियां उकेर रही हैं। तीन रंगों से बनाई जा रही इन कलाकृतियों में हर स्ट्रोक इतिहास की झलक देता है और हर रंग अंग क्षेत्र की पहचान को मजबूत करता है। दीवारों पर बिक्रमशिला विश्वविद्यालय के भग्नावशेष, अजगैबीनाथ धाम, तिलकामांझी, लोक आस्था का महापर्व छठ और मनसा विषहरी पूजा को बेहद सजीव रूप में दर्शाया गया है, जो राहगीरों को ठहरकर देखने पर मजबूर करता है। लोक कला को बढ़ावा मिल रहा मंजूषा गुरु मनोज पंडित ने बताया कि प्रशासन की पहल से इस लोक कला को बढ़ावा मिल रहा है। इससे न सिर्फ सांस्कृतिक विरासत को पहचान मिल रही है, बल्कि महिलाओं को रोजगार के अवसर भी मिले हैं। ये कला मनसा विषहरी गाथा से जुड़ी बेहद पुरानी और पौराणिक कला है। इसमें गुलाबी, हरा और पीला, तीन रंगों का विशेष महत्व है। गुलाबी प्रेम, हरा समृद्धि और पीला विकास का प्रतीक माना जाता है। फिलहाल करीब 30 महिला कलाकार कई महीनों से अलग-अलग टोलियों में सरकारी भवनों की दीवारों पर मंजूषा कला को साकार कर रही हैं। कलाकार पूनम कुमारी ने बताया कि सात साल पहले मंजूषा कला सीखा था और आज विभिन्न शैलियों में कलाकृतियां बना रही हैं। मंजूषा कला की खास पहचान ये है कि इसमें बनाए गए स्त्री-पुरुष चित्रों के कान और भौंहें नहीं होतीं, जो इसे विशिष्ट बनाता है। बिहुला-विषहरी की अमर लोकगाथा से जुड़ी यह कला अब सिर्फ दीवारों तक सीमित नहीं रही। अतिथियों के सम्मान में मंजूषा चित्र भेंट किए जा रहे हैं और वस्त्रों पर उकेरी गई मंजूषा कला देश-विदेश तक अंग क्षेत्र की सांस्कृतिक खुशबू फैला रही है। कुल मिलाकर, यह पहल लोककला को वैश्विक पहचान दिलाने की दिशा में एक सशक्त कदम साबित हो रही है। DM नवल किशोर चौधरी ने बताया कि मंजूषा भागलपुर की धरोहर है, जिसे बढ़ावा देने के लिए सभी सरकारी भवनों में मंजूषा पेंटिंग उकेरी जा रही है।

Jan 10, 2026 - 15:48
 0
भागलपुर शहर की दीवारों पर उभरी मंजूषा कला:लोक विरासत को मिला नया मंच, महिला कलाकार जीवंत कर रही अंग क्षेत्र की पहचान
भागलपुर. अंग क्षेत्र की गौरवशाली लोक कला मंजूषा एक बार फिर अपनी जड़ों से निकलकर शहर की दीवारों पर जीवंत हो उठी है। परंपरा, आस्था और संस्कृति का यह अनूठा संगम अब सरकारी भवनों की दीवारों पर रंगों के माध्यम से अपनी कहानी खुद बयां कर रहा है। जिला प्रशासन की पहल का उद्देश्य स्पष्ट है कि मंजूषा कला को नया मंच दिया जाए और युवा पीढ़ी को अपनी लोक विरासत से जोड़ा जाए। जिला प्रशासन के सहयोग से मंजूषा गुरु मनोज पंडित के नेतृत्व में महिला कलाकारों की टीम शहर के विभिन्न सरकारी भवनों की दीवारों पर आकृतियां उकेर रही हैं। तीन रंगों से बनाई जा रही इन कलाकृतियों में हर स्ट्रोक इतिहास की झलक देता है और हर रंग अंग क्षेत्र की पहचान को मजबूत करता है। दीवारों पर बिक्रमशिला विश्वविद्यालय के भग्नावशेष, अजगैबीनाथ धाम, तिलकामांझी, लोक आस्था का महापर्व छठ और मनसा विषहरी पूजा को बेहद सजीव रूप में दर्शाया गया है, जो राहगीरों को ठहरकर देखने पर मजबूर करता है। लोक कला को बढ़ावा मिल रहा मंजूषा गुरु मनोज पंडित ने बताया कि प्रशासन की पहल से इस लोक कला को बढ़ावा मिल रहा है। इससे न सिर्फ सांस्कृतिक विरासत को पहचान मिल रही है, बल्कि महिलाओं को रोजगार के अवसर भी मिले हैं। ये कला मनसा विषहरी गाथा से जुड़ी बेहद पुरानी और पौराणिक कला है। इसमें गुलाबी, हरा और पीला, तीन रंगों का विशेष महत्व है। गुलाबी प्रेम, हरा समृद्धि और पीला विकास का प्रतीक माना जाता है। फिलहाल करीब 30 महिला कलाकार कई महीनों से अलग-अलग टोलियों में सरकारी भवनों की दीवारों पर मंजूषा कला को साकार कर रही हैं। कलाकार पूनम कुमारी ने बताया कि सात साल पहले मंजूषा कला सीखा था और आज विभिन्न शैलियों में कलाकृतियां बना रही हैं। मंजूषा कला की खास पहचान ये है कि इसमें बनाए गए स्त्री-पुरुष चित्रों के कान और भौंहें नहीं होतीं, जो इसे विशिष्ट बनाता है। बिहुला-विषहरी की अमर लोकगाथा से जुड़ी यह कला अब सिर्फ दीवारों तक सीमित नहीं रही। अतिथियों के सम्मान में मंजूषा चित्र भेंट किए जा रहे हैं और वस्त्रों पर उकेरी गई मंजूषा कला देश-विदेश तक अंग क्षेत्र की सांस्कृतिक खुशबू फैला रही है। कुल मिलाकर, यह पहल लोककला को वैश्विक पहचान दिलाने की दिशा में एक सशक्त कदम साबित हो रही है। DM नवल किशोर चौधरी ने बताया कि मंजूषा भागलपुर की धरोहर है, जिसे बढ़ावा देने के लिए सभी सरकारी भवनों में मंजूषा पेंटिंग उकेरी जा रही है।