नारनौल में लॉजिस्टिक हब भूमि अधिग्रहण पर सवाल:सहमति मॉडल पर प्रति एकड़ 35 लाख कम मुआवजा, पूर्व विधायक पर साजिश व कमीशन आरोप
हरियाणा के नारनौल में सामाजिक कार्यकर्ता तेजपाल इंजीनियर ने कहा कि नांगल चौधरी विधानसभा के बसीरपुर, तलोट व छीलरो गांव में बनने वाले मल्टी मॉडल लॉजिस्टिक हब में जमीन अधिग्रहण को लेकर किसानों के साथ बड़ा खिलवाड़ हुआ है। वे आज यहां पत्रकारों से बात कर रहे थे। उन्हाेंने कहा कि केंद्र सरकार ने 2013 में भूमि अधिग्रहण कानून लागू कर दिया था। इसके बावजूद यहां पर लॉजिस्टिक हब के लिए अधिग्रहण की गई जमीन का मुआवजा किसानों को सहमति मॉडल के अनुसार दिया गया। जिसके हिसाब से किसानों को केवल 30 लाख रुपए प्रति एकड़ मिले। 65 लाख होना चाहिए उन्हाेंने कहा कि अगर भूमि अधिग्रहण कानून के हिसाब से किसानों को मुआवजा दिया जाता तो किसानों को एक एकड़ के करीब 65 लाख रुपए मिलते। ऐसे में किसानों के साथ मजाक किया गया तथा उसे उस समय 35 लाख रुपए प्रति एकड़ कम दिया गया। तत्कालीन विधायक ने की साजिश उन्होंने कहा कि यह सब तत्कालीन भाजपा विधायक अभय सिंह यादव की साजिश के तहत किया गया, क्योंकि अभय सिंह ने यहां के भोले भाले किसानों पर सहमति मॉडल थोप दिया। उन्होंने कहा कि इसके लिए एक कमेटी बनाई गई। जिसमें तत्कालीन सांसद व डीसी भी थे। कमिशन भी लिया उन्होंने आरोप लगाया कि अभय सिंह ने इसमें एक प्रतिशत कमिशन भी लिया। इस प्रकार उन्होंने करीब साढ़े तीन कराेड़ रुपए किसानों की जमीन का कमिशन खा लिया। उन्होंने कहा कि एचएसआईडीसी बिचौलिए को आधा-आधा प्रतिशत कमिशन करके कुल एक प्रतिशत कमिशन दो हिस्सों में देती है। अभय सिंह ने इस जमीन में बिचौलिए की भूमिका निभाई थी। किसानों की आपत्ति भी नहीं सुनी उन्होंने कहा कि किसानों ने जमीनों के रेट में आपत्तियां दर्ज कराई थी, इसके बावजूद न तो उन्हें व्यक्तिगत सुनवाई दी गई और न ही उनकी आपत्तियों को खारिज करने का कोई लिखित कारणयुक्त आदेश पारित किया गया। जबरदस्ती कराए हस्ताक्षर उन्होंने कहा कि जमीनों के लिए उचित रेट का मुआवजे का हवाला देकर किसानों को हस्ताक्षर करवाए गए तथा उन किसानों ने जमीन के रेट को लेकर बाद में आपत्तियां भी डाली। इनको पूर्ण रूप से नजरअंदाज किया गया। जिसके बाद कुछ किसानों ने कोर्ट का सहारा लिया। वहीं किसानों को समिति से बाहर रखा। डीसी ने भी नहीं बताया स्पष्ट इस मौके पर जय किसान आंदोलन के नेता अजय राव ने कहा कि यदि प्रशासनिक प्रक्रिया निष्पक्ष होती तो डीसी किसानों को यह स्पष्ट बताते 2013 की भूमि अधिग्रहण कानून के अंतर्गत भूमि देने पर कितना मुआवजा बनता है तथा सहमति मॉडल में क्या अंतर है। उन्होंने इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है।



