इसराना में नौकरी के नाम पर 30 लाख की ठगी:रुपए हड़पने वाला रोहतक से अरेस्ट, महिला ने खुद को बताया था हाईकोर्ट की जज

पानीपत जिले में इसराना पुलिस ने नौकरी दिलाने के नाम पर 30 लाख रुपए से अधिक की धोखाधड़ी के मामले में दूसरे आरोपी को गिरफ्तार किया है। आरोपी की पहचान रोहतक के अटायल गांव निवासी सुरेंद्र कुमार के रूप में हुई है। उसे अटायल गांव से पकड़ा गया। थाना इसराना प्रभारी इंस्पेक्टर हरिराम ने बताया कि गिरफ्तार आरोपी सुरेंद्र ने फरार चल रहे अन्य आरोपी के साथ मिलकर धोखाधड़ी करने की बात कबूल की है। शनिवार को उसे कोर्ट में पेश किया गया, जहां से उसे एक दिन के पुलिस रिमांड पर लिया गया है। रिमांड अवधि के दौरान पुलिस फरार आरोपी का पता लगाने का प्रयास करेगी। 2024 में की गई थी ठगी यह मामला परढाना गांव निवासी नवीन की शिकायत पर दर्ज किया गया था। नवीन ने जून 2024 में पुलिस अधीक्षक कार्यालय में शिकायत दी थी। उसने बताया कि रोहतक के दोअब गांव निवासी सुनील ने उसकी मुलाकात बवाना, दिल्ली निवासी ममता से करवाई थी। ममता ने खुद को हाईकोर्ट की जज बताया था। ममता ने नवीन को कृषि भवन में, मोनू को निर्माण भवन में और संजीत को ग्रुप डी में नौकरी लगवाने का आश्वासन दिया। अक्टूबर 2019 में तीनों युवकों से 5-5 लाख रुपए, कुल 15 लाख रुपए लिए गए। फर्जी निकले दस्तावेज नवंबर 2019 में मोनू को जॉयनिंग लेटर दिया गया और आगे के काम के लिए और पैसों की मांग की गई। दिसंबर 2019 में उनसे 3 लाख रुपए नकद, 1 लाख रुपए खाते में ट्रांसफर और 50 हजार रुपए गूगल पे के माध्यम से लिए गए। जनवरी 2020 में नवीन और मोनू को आईडी कार्ड दिए गए, जबकि संजीत का आईडी कार्ड बाद में देने की बात कही गई। बाद में, ममता और सुरेंद्र मलिक कार से इसराना आए और बचे हुए 5 लाख 44 हजार रुपए नकद ले गए। जब नवीन और मोनू अपने आईडी कार्ड लेकर निर्माण भवन और कृषि भवन पहुंचे और उन्हें दिखाया, तो वे फर्जी निकले। नवीन की शिकायत पर थाना इसराना में पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

May 10, 2026 - 10:34
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इसराना में नौकरी के नाम पर 30 लाख की ठगी:रुपए हड़पने वाला रोहतक से अरेस्ट, महिला ने खुद को बताया था हाईकोर्ट की जज
पानीपत जिले में इसराना पुलिस ने नौकरी दिलाने के नाम पर 30 लाख रुपए से अधिक की धोखाधड़ी के मामले में दूसरे आरोपी को गिरफ्तार किया है। आरोपी की पहचान रोहतक के अटायल गांव निवासी सुरेंद्र कुमार के रूप में हुई है। उसे अटायल गांव से पकड़ा गया। थाना इसराना प्रभारी इंस्पेक्टर हरिराम ने बताया कि गिरफ्तार आरोपी सुरेंद्र ने फरार चल रहे अन्य आरोपी के साथ मिलकर धोखाधड़ी करने की बात कबूल की है। शनिवार को उसे कोर्ट में पेश किया गया, जहां से उसे एक दिन के पुलिस रिमांड पर लिया गया है। रिमांड अवधि के दौरान पुलिस फरार आरोपी का पता लगाने का प्रयास करेगी। 2024 में की गई थी ठगी यह मामला परढाना गांव निवासी नवीन की शिकायत पर दर्ज किया गया था। नवीन ने जून 2024 में पुलिस अधीक्षक कार्यालय में शिकायत दी थी। उसने बताया कि रोहतक के दोअब गांव निवासी सुनील ने उसकी मुलाकात बवाना, दिल्ली निवासी ममता से करवाई थी। ममता ने खुद को हाईकोर्ट की जज बताया था। ममता ने नवीन को कृषि भवन में, मोनू को निर्माण भवन में और संजीत को ग्रुप डी में नौकरी लगवाने का आश्वासन दिया। अक्टूबर 2019 में तीनों युवकों से 5-5 लाख रुपए, कुल 15 लाख रुपए लिए गए। फर्जी निकले दस्तावेज नवंबर 2019 में मोनू को जॉयनिंग लेटर दिया गया और आगे के काम के लिए और पैसों की मांग की गई। दिसंबर 2019 में उनसे 3 लाख रुपए नकद, 1 लाख रुपए खाते में ट्रांसफर और 50 हजार रुपए गूगल पे के माध्यम से लिए गए। जनवरी 2020 में नवीन और मोनू को आईडी कार्ड दिए गए, जबकि संजीत का आईडी कार्ड बाद में देने की बात कही गई। बाद में, ममता और सुरेंद्र मलिक कार से इसराना आए और बचे हुए 5 लाख 44 हजार रुपए नकद ले गए। जब नवीन और मोनू अपने आईडी कार्ड लेकर निर्माण भवन और कृषि भवन पहुंचे और उन्हें दिखाया, तो वे फर्जी निकले। नवीन की शिकायत पर थाना इसराना में पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।