नालंदा में जीवित बुजुर्ग को कागजों में मार डाला:पेंशन के लिए दर-दर भटक रहा पीड़ित परिवार, लापरवाह अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग

नालंदा में प्रशासनिक व्यवस्था की संवेदनहीनता और लापरवाही का मामला सामने आया है। अस्थावां के लखनु बीघा निवासी नगीना राम सरकारी फाइलों की भेंट चढ़ गए। जिस बुजुर्ग को अपनी ढलती उम्र में सरकार से सहारे की उम्मीद थी, उसे व्यवस्था ने कागजों में 'मृत' घोषित कर अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ लिया है। अब स्थिति यह है कि नगीना राम खुद के जीवित होने का प्रमाण लेकर दफ्तरों के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन उनकी सुनने वाला कोई नहीं है। मामले का खुलासा तब हुआ जब नगीना राम अपनी रुकी हुई वृद्धावस्था पेंशन शुरू कराने के लिए ई-केवाईसी कराने प्रखंड कार्यालय पहुंचे। वहां मौजूद ऑपरेटर ने बताया कि सरकारी रिकॉर्ड में उन्हें मृत दर्ज किया गया है। इसी वजह से उनकी पेंशन स्थायी रूप से बंद कर दी गई है। यह सुनते ही बुजुर्ग के पैरों तले जमीन खिसक गई। पीड़ित नगीना राम के मुताबिक, 11 सितंबर 2025 के बाद से उनके खाते में एक रुपए भी नहीं आया है। शुरुआत में उन्होंने इसे तकनीकी समस्या समझा, लेकिन सच सामने आने के बाद उन्हें अहसास हुआ कि वे जीते-जी 'भूत' बना दिए गए हैं। पत्नी ने जताई नाराजगी नगीना राम की पत्नी कैलाश देवी ने बताया कि उनके पति करीब नौ महीने पहले एक सड़क हादसे का शिकार हो गए थे, जिसमें उनके दोनों पैर टूट गए। आज भी उनका इलाज चल रहा है। घर में दाने-दाने की किल्लत है। ऐसे में वृद्धावस्था पेंशन ही उनके गुजारे का एकमात्र जरिया थी। आखिर बिना किसी स्थलीय जांच या भौतिक सत्यापन के किसी व्यक्ति को मृत कैसे मान लिया गया। क्या प्रखंड के अधिकारियों ने अपनी कुर्सी पर बैठकर ही मौत का प्रमाणपत्र जारी कर दिया? उन्होंने इस साजिश या घोर लापरवाही के पीछे जिम्मेदार अधिकारियों पर कड़ी कानूनी कार्रवाई की मांग की है। ग्रामीणों ने जांच की मांग उठाई वहीं, इस मामले को लेकर ग्रामीणों में भी रोष है। कुटूस देवी ने बताया कि नगीना राम सबके सामने जीवित खड़े हैं, फिर भी प्रशासन ने उन्हें मृत दिखा दिया। ग्रामीण इसे एक बड़ा फर्जीवाड़ा मान रहे हैं और सामूहिक रूप से मांग कर रहे हैं कि उनकी पेंशन तत्काल बहाल की जाए। BDO ने ई-केवाईसी को बताया कारण दूसरी तरफ, अस्थावां के प्रखंड विकास पदाधिकारी सीमा कुमारी का तर्क है कि ई-केवाईसी न कराने के कारण अक्सर पेंशन रुक जाती है। हालांकि, अधिकारी का यह बयान पोर्टल पर दर्ज 'मृत' स्टेटस के आगे फीका पड़ रहा है, क्योंकि केवाईसी न होना एक तकनीकी त्रुटि है, लेकिन किसी को मृत घोषित कर देना सीधे तौर पर एक मानवीय और प्रशासनिक अपराध की श्रेणी में आता है।

May 10, 2026 - 10:35
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नालंदा में जीवित बुजुर्ग को कागजों में मार डाला:पेंशन के लिए दर-दर भटक रहा पीड़ित परिवार, लापरवाह अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग
नालंदा में प्रशासनिक व्यवस्था की संवेदनहीनता और लापरवाही का मामला सामने आया है। अस्थावां के लखनु बीघा निवासी नगीना राम सरकारी फाइलों की भेंट चढ़ गए। जिस बुजुर्ग को अपनी ढलती उम्र में सरकार से सहारे की उम्मीद थी, उसे व्यवस्था ने कागजों में 'मृत' घोषित कर अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ लिया है। अब स्थिति यह है कि नगीना राम खुद के जीवित होने का प्रमाण लेकर दफ्तरों के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन उनकी सुनने वाला कोई नहीं है। मामले का खुलासा तब हुआ जब नगीना राम अपनी रुकी हुई वृद्धावस्था पेंशन शुरू कराने के लिए ई-केवाईसी कराने प्रखंड कार्यालय पहुंचे। वहां मौजूद ऑपरेटर ने बताया कि सरकारी रिकॉर्ड में उन्हें मृत दर्ज किया गया है। इसी वजह से उनकी पेंशन स्थायी रूप से बंद कर दी गई है। यह सुनते ही बुजुर्ग के पैरों तले जमीन खिसक गई। पीड़ित नगीना राम के मुताबिक, 11 सितंबर 2025 के बाद से उनके खाते में एक रुपए भी नहीं आया है। शुरुआत में उन्होंने इसे तकनीकी समस्या समझा, लेकिन सच सामने आने के बाद उन्हें अहसास हुआ कि वे जीते-जी 'भूत' बना दिए गए हैं। पत्नी ने जताई नाराजगी नगीना राम की पत्नी कैलाश देवी ने बताया कि उनके पति करीब नौ महीने पहले एक सड़क हादसे का शिकार हो गए थे, जिसमें उनके दोनों पैर टूट गए। आज भी उनका इलाज चल रहा है। घर में दाने-दाने की किल्लत है। ऐसे में वृद्धावस्था पेंशन ही उनके गुजारे का एकमात्र जरिया थी। आखिर बिना किसी स्थलीय जांच या भौतिक सत्यापन के किसी व्यक्ति को मृत कैसे मान लिया गया। क्या प्रखंड के अधिकारियों ने अपनी कुर्सी पर बैठकर ही मौत का प्रमाणपत्र जारी कर दिया? उन्होंने इस साजिश या घोर लापरवाही के पीछे जिम्मेदार अधिकारियों पर कड़ी कानूनी कार्रवाई की मांग की है। ग्रामीणों ने जांच की मांग उठाई वहीं, इस मामले को लेकर ग्रामीणों में भी रोष है। कुटूस देवी ने बताया कि नगीना राम सबके सामने जीवित खड़े हैं, फिर भी प्रशासन ने उन्हें मृत दिखा दिया। ग्रामीण इसे एक बड़ा फर्जीवाड़ा मान रहे हैं और सामूहिक रूप से मांग कर रहे हैं कि उनकी पेंशन तत्काल बहाल की जाए। BDO ने ई-केवाईसी को बताया कारण दूसरी तरफ, अस्थावां के प्रखंड विकास पदाधिकारी सीमा कुमारी का तर्क है कि ई-केवाईसी न कराने के कारण अक्सर पेंशन रुक जाती है। हालांकि, अधिकारी का यह बयान पोर्टल पर दर्ज 'मृत' स्टेटस के आगे फीका पड़ रहा है, क्योंकि केवाईसी न होना एक तकनीकी त्रुटि है, लेकिन किसी को मृत घोषित कर देना सीधे तौर पर एक मानवीय और प्रशासनिक अपराध की श्रेणी में आता है।