धक्का मारकर स्टार्ट हुई डायल-112 की गाड़ी:औरंगाबाद में सेवा पर उठे सवाल, सदर अस्पताल में मरीज को पहुंचाने के बाद आई खराबी
औरंगाबाद में आपातकालीन परिस्थितियों में लोगों तक सहायता पहुंचाने के उद्देश्य से शुरू की गई डायल 112 सेवा जिले में लगातार लोगों की मदद कर रही है। सड़क दुर्घटना, घरेलू विवाद, मारपीट और अन्य आपात घटनाओं में घायल व्यक्तियों को समय पर अस्पताल पहुंचाकर यह सेवा मानव जीवन बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। आज सदर अस्पताल परिसर में सड़क हादसे में घायल एक व्यक्ति को इलाज के लिए अस्पताल पहुंचाने आई डायल 112 की गाड़ी वापस लौटने के दौरान स्टार्ट ही नहीं हुई। काफी प्रयास के बाद भी गाड़ी के इंजन ने जवाब नहीं दिया। अंततः पुलिसकर्मियों और आसपास मौजूद लोगों की मदद से गाड़ी को धक्का लगाकर स्टार्ट करना पड़ा। यह दृश्य देखकर वहां मौजूद लोगों ने आश्चर्य व्यक्त किया और आपातकालीन सेवा के गाड़ी की स्थिति पर चिंता जताई। ऐसी गाड़ी के नियमित निरीक्षण की मांग स्थानीय लोगों का कहना था कि जिस गाड़ी पर संकट की घड़ी में लोगों तक तेजी से पहुंचने की जिम्मेदारी है, यदि वही बीच रास्ते में खराब हो जाए तो गंभीर परिस्थितियों में लोगों को समय पर सहायता मिलना मुश्किल हो सकता है। लोगों ने ऐसी गाड़ी के नियमित निरीक्षण और समय पर मरम्मत की आवश्यकता पर जोर दिया। मेंटेनेंस की कमी बन रही परेशानी जानकारों की मानें तो डायल 112 के कई गाड़ी की बैटरियां काफी पुरानी हो चुकी हैं। समय पर बैटरी नहीं बदले जाने और नियमित मेंटेनेंस के अभाव में वाहनों में तकनीकी खराबियां बढ़ रही हैं। यही कारण है कि कई बार वाहन बंद होने के बाद दोबारा स्टार्ट नहीं हो पाते और उन्हें धक्का देकर चालू करना पड़ता है। यह पहली घटना नहीं है। कुछ दिन पहले रिसियप थाना क्षेत्र की डायल 112 गाड़ी के साथ भी इसी तरह की समस्या सामने आई थी। कई बार गाड़ी चलने की स्थिति में तो ठीक रहते हैं, लेकिन एक बार इंजन बंद होने पर दोबारा स्टार्ट करने में परेशानी होती है। ऐसे में चालक वाहन को लगातार रनिंग मोड में रखने की कोशिश करते हैं। डायल 112 सेवा को पुलिस और जनता के बीच त्वरित सहायता का सबसे महत्वपूर्ण माध्यम माना जाता है। ऐसे में यदि वाहनों की तकनीकी स्थिति कमजोर रहती है, तो सेवा की प्रभावशीलता प्रभावित हो सकती है। लोगों का कहना है कि संबंधित विभाग को सभी वाहनों की तकनीकी जांच कर आवश्यक मरम्मत और बैटरी बदलने की दिशा में शीघ्र कदम उठाने चाहिए, ताकि आपात स्थिति में मदद पहुंचाने की चुनौती पर कोई असर न पड़े।
औरंगाबाद में आपातकालीन परिस्थितियों में लोगों तक सहायता पहुंचाने के उद्देश्य से शुरू की गई डायल 112 सेवा जिले में लगातार लोगों की मदद कर रही है। सड़क दुर्घटना, घरेलू विवाद, मारपीट और अन्य आपात घटनाओं में घायल व्यक्तियों को समय पर अस्पताल पहुंचाकर यह सेवा मानव जीवन बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। आज सदर अस्पताल परिसर में सड़क हादसे में घायल एक व्यक्ति को इलाज के लिए अस्पताल पहुंचाने आई डायल 112 की गाड़ी वापस लौटने के दौरान स्टार्ट ही नहीं हुई। काफी प्रयास के बाद भी गाड़ी के इंजन ने जवाब नहीं दिया। अंततः पुलिसकर्मियों और आसपास मौजूद लोगों की मदद से गाड़ी को धक्का लगाकर स्टार्ट करना पड़ा। यह दृश्य देखकर वहां मौजूद लोगों ने आश्चर्य व्यक्त किया और आपातकालीन सेवा के गाड़ी की स्थिति पर चिंता जताई। ऐसी गाड़ी के नियमित निरीक्षण की मांग स्थानीय लोगों का कहना था कि जिस गाड़ी पर संकट की घड़ी में लोगों तक तेजी से पहुंचने की जिम्मेदारी है, यदि वही बीच रास्ते में खराब हो जाए तो गंभीर परिस्थितियों में लोगों को समय पर सहायता मिलना मुश्किल हो सकता है। लोगों ने ऐसी गाड़ी के नियमित निरीक्षण और समय पर मरम्मत की आवश्यकता पर जोर दिया। मेंटेनेंस की कमी बन रही परेशानी जानकारों की मानें तो डायल 112 के कई गाड़ी की बैटरियां काफी पुरानी हो चुकी हैं। समय पर बैटरी नहीं बदले जाने और नियमित मेंटेनेंस के अभाव में वाहनों में तकनीकी खराबियां बढ़ रही हैं। यही कारण है कि कई बार वाहन बंद होने के बाद दोबारा स्टार्ट नहीं हो पाते और उन्हें धक्का देकर चालू करना पड़ता है। यह पहली घटना नहीं है। कुछ दिन पहले रिसियप थाना क्षेत्र की डायल 112 गाड़ी के साथ भी इसी तरह की समस्या सामने आई थी। कई बार गाड़ी चलने की स्थिति में तो ठीक रहते हैं, लेकिन एक बार इंजन बंद होने पर दोबारा स्टार्ट करने में परेशानी होती है। ऐसे में चालक वाहन को लगातार रनिंग मोड में रखने की कोशिश करते हैं। डायल 112 सेवा को पुलिस और जनता के बीच त्वरित सहायता का सबसे महत्वपूर्ण माध्यम माना जाता है। ऐसे में यदि वाहनों की तकनीकी स्थिति कमजोर रहती है, तो सेवा की प्रभावशीलता प्रभावित हो सकती है। लोगों का कहना है कि संबंधित विभाग को सभी वाहनों की तकनीकी जांच कर आवश्यक मरम्मत और बैटरी बदलने की दिशा में शीघ्र कदम उठाने चाहिए, ताकि आपात स्थिति में मदद पहुंचाने की चुनौती पर कोई असर न पड़े।