दृष्टिबाधित विद्यार्थियों को कीबोर्ड, डिजिटल प्रशिक्षण दिया गया:लखनऊ के डॉ. शकुंतला मिश्रा विश्वविद्यालय में आत्मनिर्भर बनाने की पहल
लखनऊ के डॉ. शकुंतला मिश्रा राष्ट्रीय पुनर्वास विश्वविद्यालय में दृष्टिबाधित विद्यार्थियों को तकनीकी रूप से आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल की गई है। विश्वविद्यालय और हेल्प द ब्लाइंड फाउंडेशन ने संयुक्त रूप से कीबोर्ड वितरण एवं डिजिटल प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया। कार्यक्रम में वक्ताओं ने बताया कि कुलपति प्रो. संजय सिंह के नेतृत्व में विश्वविद्यालय लगातार दिव्यांगजन हितैषी और तकनीकी रूप से समावेशी वातावरण विकसित करने पर काम कर रहा है। इस पहल का उद्देश्य दृष्टिबाधित विद्यार्थियों को आधुनिक डिजिटल तकनीक से जोड़ना है, ताकि वे शिक्षा और रोजगार के क्षेत्र में आगे बढ़ सकें। शैक्षणिक ऐप्स के इस्तेमाल की जानकारी शामिल इस दौरान विद्यार्थियों को कीबोर्ड वितरित किए गए। आगामी चरण में उन्हें विशेष डिजिटल प्रशिक्षण भी प्रदान किया जाएगा। इस प्रशिक्षण में कंप्यूटर संचालन, टाइपिंग, इंटरनेट उपयोग, ऑनलाइन कक्षाओं में सहभागिता और मोबाइल आधारित शैक्षणिक ऐप्स के इस्तेमाल की जानकारी शामिल होगी। प्रशिक्षण में स्क्रीन रीडिंग सॉफ्टवेयर और ऐप्स जैसे एनवीडीए (NVDA), टॉकबैक (TalkBack) और जॉव्स (JAWS) के संचालन पर विशेष जोर दिया जाएगा। विशेषज्ञों ने बताया कि इन तकनीकों की मदद से दृष्टिबाधित विद्यार्थी अपनी अध्ययन सामग्री स्वयं तैयार कर सकते हैं और ऑनलाइन संसाधनों तक आसानी से पहुंच बना सकते हैं। डिजिटल संसाधनों से जोड़ना विश्वविद्यालय की प्राथमिकता कुलसचिव रोहित सिंह ने कहा कि विद्यार्थियों को आधुनिक तकनीक और डिजिटल संसाधनों से जोड़ना विश्वविद्यालय की प्राथमिकताओं में से एक है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि यह पहल विद्यार्थियों को प्रतियोगी परीक्षाओं और रोजगार के अवसरों के लिए सक्षम बनाने में सहायक सिद्ध होगी। एमओयू समन्वयक डॉ. विजय शंकर शर्मा ने कहा कि आधुनिक तकनीक दृष्टिबाधित विद्यार्थियों के लिए शिक्षा और रोजगार के नए अवसर सृजित कर रही है। उन्होंने जोर दिया कि उचित प्रशिक्षण और संसाधनों के माध्यम से विद्यार्थी आत्मनिर्भर बनकर समाज में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। कार्यक्रम में धीरज, आकाश, रिजवान सहित कई विद्यार्थी उपस्थित रहे।
लखनऊ के डॉ. शकुंतला मिश्रा राष्ट्रीय पुनर्वास विश्वविद्यालय में दृष्टिबाधित विद्यार्थियों को तकनीकी रूप से आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल की गई है। विश्वविद्यालय और हेल्प द ब्लाइंड फाउंडेशन ने संयुक्त रूप से कीबोर्ड वितरण एवं डिजिटल प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया। कार्यक्रम में वक्ताओं ने बताया कि कुलपति प्रो. संजय सिंह के नेतृत्व में विश्वविद्यालय लगातार दिव्यांगजन हितैषी और तकनीकी रूप से समावेशी वातावरण विकसित करने पर काम कर रहा है। इस पहल का उद्देश्य दृष्टिबाधित विद्यार्थियों को आधुनिक डिजिटल तकनीक से जोड़ना है, ताकि वे शिक्षा और रोजगार के क्षेत्र में आगे बढ़ सकें। शैक्षणिक ऐप्स के इस्तेमाल की जानकारी शामिल इस दौरान विद्यार्थियों को कीबोर्ड वितरित किए गए। आगामी चरण में उन्हें विशेष डिजिटल प्रशिक्षण भी प्रदान किया जाएगा। इस प्रशिक्षण में कंप्यूटर संचालन, टाइपिंग, इंटरनेट उपयोग, ऑनलाइन कक्षाओं में सहभागिता और मोबाइल आधारित शैक्षणिक ऐप्स के इस्तेमाल की जानकारी शामिल होगी। प्रशिक्षण में स्क्रीन रीडिंग सॉफ्टवेयर और ऐप्स जैसे एनवीडीए (NVDA), टॉकबैक (TalkBack) और जॉव्स (JAWS) के संचालन पर विशेष जोर दिया जाएगा। विशेषज्ञों ने बताया कि इन तकनीकों की मदद से दृष्टिबाधित विद्यार्थी अपनी अध्ययन सामग्री स्वयं तैयार कर सकते हैं और ऑनलाइन संसाधनों तक आसानी से पहुंच बना सकते हैं। डिजिटल संसाधनों से जोड़ना विश्वविद्यालय की प्राथमिकता कुलसचिव रोहित सिंह ने कहा कि विद्यार्थियों को आधुनिक तकनीक और डिजिटल संसाधनों से जोड़ना विश्वविद्यालय की प्राथमिकताओं में से एक है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि यह पहल विद्यार्थियों को प्रतियोगी परीक्षाओं और रोजगार के अवसरों के लिए सक्षम बनाने में सहायक सिद्ध होगी। एमओयू समन्वयक डॉ. विजय शंकर शर्मा ने कहा कि आधुनिक तकनीक दृष्टिबाधित विद्यार्थियों के लिए शिक्षा और रोजगार के नए अवसर सृजित कर रही है। उन्होंने जोर दिया कि उचित प्रशिक्षण और संसाधनों के माध्यम से विद्यार्थी आत्मनिर्भर बनकर समाज में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। कार्यक्रम में धीरज, आकाश, रिजवान सहित कई विद्यार्थी उपस्थित रहे।