ग्रामीणों ने डंडों की ताल पर किया लहंगी लोकनृत्य:समरानियां कस्बे में पहली बार हुआ आयोजन, लोकगीतों की स्वर लहरियां गूंजी
बारां के समरानियां कस्बे में पहली बार लहंगी नृत्य का आयोजन किया गया। हनुमान चौराहे पर हुई इस प्रस्तुति में बड़ी संख्या में युवा और बुजुर्ग शामिल हुए, जिससे पूरा माहौल लोक रंग में रंग गया। प्रतिभागियों ने हाथों में डंडे लेकर सामूहिक रूप से नृत्य किया। लोकगीतों के साथ दी गई प्रस्तुतियों ने वहां मौजूद लोगों का ध्यान खींचा। नृत्य और लोकगीतों का यह संगम देखने के लिए बड़ी संख्या में दर्शक जुटे रहे। समरानियां कस्बे में पहली बार हुए इस कार्यक्रम को लेकर बुजुर्गों में खास उत्साह दिखा। उनका कहना था कि समय के साथ कई पारंपरिक लोक आयोजन गांवों और कस्बों में कम होते जा रहे हैं। ऐसे में लहंगी नृत्य का यह आयोजन नई पीढ़ी को अपनी लोक संस्कृति और परंपराओं से जोड़ने का एक अच्छा माध्यम बन सकता है। बुजुर्गों के साथ युवाओं ने भी बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया इस कार्यक्रम की खास बात यह रही कि इसमें बुजुर्गों के साथ युवाओं ने भी बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। लंबे समय बाद दोनों पीढ़ियां एक ही आयोजन में साथ नजर आईं। मौजूद बुजुर्गों ने कहा कि युवा बड़ी संख्या में मोबाइल और सोशल मीडिया की दुनिया में व्यस्त रहते हैं। ऐसे पारंपरिक कार्यक्रम युवाओं को अपनी जड़ों और ग्रामीण लोक संस्कृति से जुड़ने का अवसर देते हैं। उन्होंने जोर दिया कि गांवों और कस्बों में समय-समय पर ऐसे आयोजन होने चाहिए, ताकि नई पीढ़ी को पुरानी परंपराओं की जानकारी मिल सके और लोक संस्कृति जीवंत बनी रहे। हनुमान चौराहे पर मौजूद दर्शक पूरे आयोजन के दौरान उत्साह के साथ कार्यक्रम देखते रहे। आसपास के गांवों से पहुंचे युवाओं और बुजुर्गों की भागीदारी ने इस कार्यक्रम को और व्यापक रूप दिया। आयोजन में शामिल लोगों ने भविष्य में भी इस तरह के सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाने की जरूरत बताई।



