'हार्टअटैक नहीं, कार्डियक अरेस्ट है युवाओं की मौत की वजह':सर्जन डॉ. धीरज शांडिल्य बोले- सही समय पर जांच से इसे रोका जा सकता है; खान-पान का ध्यान रखें
कोरोना महामारी के बाद से देश में युवाओं की अचानक मौत की खबरें डराने वाली है। जिम में कसरत करते हुए, शादी में नाचते हुए या बस चलते-फिरते युवाओं को अचानक गिरते और दम तोड़ते देखा गया है। इन घटनाओं को अक्सर हार्ट अटैक का नाम दिया जाता है। लेकिन जाने-माने हार्ट सर्जन डॉ. धीरज शांडिल्य ने इस पर एक बड़ा खुलासा किया है। डॉ. धीरज शांडिल्य के अनुसार युवाओं में हो रही इन अचानक मौतों की मुख्य वजह हार्ट अटैक नहीं, बल्कि कार्डियक अरेस्ट है। उन्होंने बताया कि हार्ट अटैक और कार्डियक अरेस्ट के बुनियादी फर्क समझना जरूरी है। दो अलग-अलग स्थितियां हैं, जिन्हें लोग अक्सर एक ही समझ लेते हैं। हार्ट अटैक तब होता है जब हृदय की मांसपेशियों तक रक्त पहुंचाने वाली नली में रुकावट(ब्लॉकेज) आ जाती है। जब किसी नली में खून का थक्का (प्लाक) जम जाता है, तो हृदय की मांसपेशियों को पर्याप्त ऑक्सीजन और खून नहीं मिल पाता। इससे मांसपेशियां क्षतिग्रस्त होने लगती है और हृदय पंप करना बंद कर देता है। जबकि कार्डियक अरेस्ट में हृदय अचानक धड़कना बंद कर देता है। यह अक्सर हृदय की विद्युत प्रणाली (electrical system) में खराबी के कारण होता है। कोविड के बाद युवाओं में यही स्थिति अधिक देखी जा रही है। कोविड के कारण हृदय की मांसपेशियों में सूजन (Inflammation) आ गई है। इसे मेडिकल भाषा में मायोकार्डिटिस भी कहा जा सकता है। सडन कार्डियक अरेस्ट डॉ. शांडिल्य के अनुसार कोविड संक्रमण के बाद कई लोगों के हृदय की मांसपेशियों में सूक्ष्म स्तर पर बदलाव आए हैं। हृदय की मांसपेशियों में होने वाली इस सूजन के कारण उनकी सिकुड़ने और फैलने की क्षमता प्रभावित हुई है। नतीजतन, हृदय अचानक काम करना बंद कर देता है, जिसे 'सडन कार्डियक अरेस्ट' कहा जाता है। इस सूजन के कारण हृदय की मांसपेशियों के सिकुड़ने और फैलने की क्षमता आणविक स्तर (molecular level) पर प्रभावित हुई है। जब हृदय की मांसपेशियां सही ढंग से प्रतिक्रिया नहीं दे पाती तो हृदय धड़कने के बजाय स्थिर हो जाता है। इसी स्थिति को कार्डियक अरेस्ट कहते हैं। तीन जांच खोल देगा हृदय का राज सही समय पर जांच से अचानक होने वाली इन मौतों को रोका जा सकता है। इसके लिए तीन प्रमुख टेस्ट है जो संभावित खतरे का समय रहते पता लगाने में मदद कर सकती है। ट्रोपोनिन आई (Troponin I)- एक ब्लड टेस्ट है जो हृदय की मांसपेशियों को होने वाले सूक्ष्म नुकसान का पता लगाता है। एचएस-सीआरपी (HS-CRP)- शरीर और हृदय में होने वाली सूजन (Inflammation) के स्तर को माप कर पता लगाने में सहायक है। कार्डियक एमआरआई (Cardiac MRI)- सबसे संवेदनशील और प्रभावी जांच है। यह हृदय की मांसपेशियों की सूजन को शुरुआती चरणों में ही पहचानने में सक्षम है। बचाव का इकोस्पिरिन फॉर्मूला डॉ. धीरज शांडिल्य ने बताया कि अगर किसी व्यक्ति को सूजन या हृदय संबंधी समस्या का पता चलता है, तो डॉक्टर की सलाह पर लो-डोज इकोस्पिरिन (Ecosprin) शुरू की जा सकती है। यह दवाई रक्त को पतला रखने और अचानक होने वाले कार्डियक अरेस्ट के खतरे को कम करने में प्रभावी हो सकती है। हर मौत के लिए हार्ट अटैक को जिम्मेदार न ठहराएं जब तक कि उसकी पुष्टि न हो जाए। कार्डियक अरेस्ट को रोकने की मुहिम शुरू करने की जरूरत है। समय पर जांच कराएं, विशेषज्ञों की सलाह लें और इस अप्रत्याशित खतरे को हराएं। अगर जिम जाते हैं या भारी व्यायाम करते हैं, तो पहले एक बार अपना हृदय चेकअप जरूर कराएं। चेकअप आपके दिल की सेहत का आईना हो सकते हैं। हर मौत के लिए हार्ट अटैक को जिम्मेदार ठहराना बंद करें और कार्डियक अरेस्ट के मूल कारणों को समझकर बचाव की दिशा में कदम बढ़ाएं। हृदय को कैसे रखें स्वस्थ हृदय की सूजन (Inflammation) को कम करने और अचानक होने वाले कार्डियक अरेस्ट के जोखिम को कम करने के लिए सबसे बड़ी जरूरत है जीवनशैली में बदलाव नियमित व्यायाम पर ध्यान दें- भारी वर्कआउट या अचानक जिम जाकर भारी वजन उठाने के बजाय मध्यम गति से व्यायाम (जैसे तेज चलना या योग) शुरू करें। पर्याप्त नींद- शरीर और हृदय की मरम्मत (Repairing) के लिए 7-8 घंटे की गहरी नींद अनिवार्य है। तनाव प्रबंधन- मानसिक तनाव हृदय की धड़कन (Heart Rate) को अस्थिर कर सकता है। इसके लिए मेडिटेशन या प्राणायाम का सहारा लें। खान-पान में सुधार एंटी इंफ्लेमेटरी डाइट लें, मुख्य समस्या सूजन है। इसलिए हल्दी, ओमेगा-3 (अखरोट, अलसी) और हरी पत्तेदार सब्जियों का सेवन बढ़ाएं। नमक और चीनी पर नियंत्रण रखें, अधिक नमक ब्लड प्रेशर बढ़ाता है। जबकि अधिक चीनी शरीर में सूजन को बढ़ावा देती है। हाइड्रेटेड रहें, पर्याप्त पानी पिएं, जिससे शरीर के टॉक्सिन्स बाहर निकल सकें। यदि सीने में हल्का दर्द, सांस फूलना या बहुत ज्यादा थकान महसूस होती है, तो इसे नजरअंदाज नहीं करें। दवाओं का स्व-उपचार नहीं करें। ईकोस्प्रिन (Ecosprin) या अन्य दवाएं केवल डॉक्टर की लिखित सलाह के बाद ही लें। यदि गंभीर रूप से कोविड संक्रमित रहे थे, तो साल में कम से कम एक बार कार्डियक स्क्रीनिंग जरूर करवाएं क्या नहीं करें धूम्रपान और शराब धमनियों को सिकोड़ते हैं और सूजन को कई गुना बढ़ा देते हैं। बिना डॉक्टरी सलाह के जिम सप्लीमेंट्स या स्टेरॉयड का सेवन हृदय के इलेक्ट्रिकल सिस्टम को बिगाड़ सकता है। बहुत ज्यादा कॉफी या एनर्जी ड्रिंक्स का सेवन हृदय की लय (Rhythm) को प्रभावित कर सकता है। अगर आपके आस-पास किसी को अचानक कार्डियक अरेस्ट आता है, तो CPR (Cardiopulmonary Resuscitation) देना शुरू करें और तुरंत एंबुलेंस बुलाएं। यह तकनीक जान बचाने में सबसे प्रभावी साबित होती है।
कोरोना महामारी के बाद से देश में युवाओं की अचानक मौत की खबरें डराने वाली है। जिम में कसरत करते हुए, शादी में नाचते हुए या बस चलते-फिरते युवाओं को अचानक गिरते और दम तोड़ते देखा गया है। इन घटनाओं को अक्सर हार्ट अटैक का नाम दिया जाता है। लेकिन जाने-माने हार्ट सर्जन डॉ. धीरज शांडिल्य ने इस पर एक बड़ा खुलासा किया है। डॉ. धीरज शांडिल्य के अनुसार युवाओं में हो रही इन अचानक मौतों की मुख्य वजह हार्ट अटैक नहीं, बल्कि कार्डियक अरेस्ट है। उन्होंने बताया कि हार्ट अटैक और कार्डियक अरेस्ट के बुनियादी फर्क समझना जरूरी है। दो अलग-अलग स्थितियां हैं, जिन्हें लोग अक्सर एक ही समझ लेते हैं। हार्ट अटैक तब होता है जब हृदय की मांसपेशियों तक रक्त पहुंचाने वाली नली में रुकावट(ब्लॉकेज) आ जाती है। जब किसी नली में खून का थक्का (प्लाक) जम जाता है, तो हृदय की मांसपेशियों को पर्याप्त ऑक्सीजन और खून नहीं मिल पाता। इससे मांसपेशियां क्षतिग्रस्त होने लगती है और हृदय पंप करना बंद कर देता है। जबकि कार्डियक अरेस्ट में हृदय अचानक धड़कना बंद कर देता है। यह अक्सर हृदय की विद्युत प्रणाली (electrical system) में खराबी के कारण होता है। कोविड के बाद युवाओं में यही स्थिति अधिक देखी जा रही है। कोविड के कारण हृदय की मांसपेशियों में सूजन (Inflammation) आ गई है। इसे मेडिकल भाषा में मायोकार्डिटिस भी कहा जा सकता है। सडन कार्डियक अरेस्ट डॉ. शांडिल्य के अनुसार कोविड संक्रमण के बाद कई लोगों के हृदय की मांसपेशियों में सूक्ष्म स्तर पर बदलाव आए हैं। हृदय की मांसपेशियों में होने वाली इस सूजन के कारण उनकी सिकुड़ने और फैलने की क्षमता प्रभावित हुई है। नतीजतन, हृदय अचानक काम करना बंद कर देता है, जिसे 'सडन कार्डियक अरेस्ट' कहा जाता है। इस सूजन के कारण हृदय की मांसपेशियों के सिकुड़ने और फैलने की क्षमता आणविक स्तर (molecular level) पर प्रभावित हुई है। जब हृदय की मांसपेशियां सही ढंग से प्रतिक्रिया नहीं दे पाती तो हृदय धड़कने के बजाय स्थिर हो जाता है। इसी स्थिति को कार्डियक अरेस्ट कहते हैं। तीन जांच खोल देगा हृदय का राज सही समय पर जांच से अचानक होने वाली इन मौतों को रोका जा सकता है। इसके लिए तीन प्रमुख टेस्ट है जो संभावित खतरे का समय रहते पता लगाने में मदद कर सकती है। ट्रोपोनिन आई (Troponin I)- एक ब्लड टेस्ट है जो हृदय की मांसपेशियों को होने वाले सूक्ष्म नुकसान का पता लगाता है। एचएस-सीआरपी (HS-CRP)- शरीर और हृदय में होने वाली सूजन (Inflammation) के स्तर को माप कर पता लगाने में सहायक है। कार्डियक एमआरआई (Cardiac MRI)- सबसे संवेदनशील और प्रभावी जांच है। यह हृदय की मांसपेशियों की सूजन को शुरुआती चरणों में ही पहचानने में सक्षम है। बचाव का इकोस्पिरिन फॉर्मूला डॉ. धीरज शांडिल्य ने बताया कि अगर किसी व्यक्ति को सूजन या हृदय संबंधी समस्या का पता चलता है, तो डॉक्टर की सलाह पर लो-डोज इकोस्पिरिन (Ecosprin) शुरू की जा सकती है। यह दवाई रक्त को पतला रखने और अचानक होने वाले कार्डियक अरेस्ट के खतरे को कम करने में प्रभावी हो सकती है। हर मौत के लिए हार्ट अटैक को जिम्मेदार न ठहराएं जब तक कि उसकी पुष्टि न हो जाए। कार्डियक अरेस्ट को रोकने की मुहिम शुरू करने की जरूरत है। समय पर जांच कराएं, विशेषज्ञों की सलाह लें और इस अप्रत्याशित खतरे को हराएं। अगर जिम जाते हैं या भारी व्यायाम करते हैं, तो पहले एक बार अपना हृदय चेकअप जरूर कराएं। चेकअप आपके दिल की सेहत का आईना हो सकते हैं। हर मौत के लिए हार्ट अटैक को जिम्मेदार ठहराना बंद करें और कार्डियक अरेस्ट के मूल कारणों को समझकर बचाव की दिशा में कदम बढ़ाएं। हृदय को कैसे रखें स्वस्थ हृदय की सूजन (Inflammation) को कम करने और अचानक होने वाले कार्डियक अरेस्ट के जोखिम को कम करने के लिए सबसे बड़ी जरूरत है जीवनशैली में बदलाव नियमित व्यायाम पर ध्यान दें- भारी वर्कआउट या अचानक जिम जाकर भारी वजन उठाने के बजाय मध्यम गति से व्यायाम (जैसे तेज चलना या योग) शुरू करें। पर्याप्त नींद- शरीर और हृदय की मरम्मत (Repairing) के लिए 7-8 घंटे की गहरी नींद अनिवार्य है। तनाव प्रबंधन- मानसिक तनाव हृदय की धड़कन (Heart Rate) को अस्थिर कर सकता है। इसके लिए मेडिटेशन या प्राणायाम का सहारा लें। खान-पान में सुधार एंटी इंफ्लेमेटरी डाइट लें, मुख्य समस्या सूजन है। इसलिए हल्दी, ओमेगा-3 (अखरोट, अलसी) और हरी पत्तेदार सब्जियों का सेवन बढ़ाएं। नमक और चीनी पर नियंत्रण रखें, अधिक नमक ब्लड प्रेशर बढ़ाता है। जबकि अधिक चीनी शरीर में सूजन को बढ़ावा देती है। हाइड्रेटेड रहें, पर्याप्त पानी पिएं, जिससे शरीर के टॉक्सिन्स बाहर निकल सकें। यदि सीने में हल्का दर्द, सांस फूलना या बहुत ज्यादा थकान महसूस होती है, तो इसे नजरअंदाज नहीं करें। दवाओं का स्व-उपचार नहीं करें। ईकोस्प्रिन (Ecosprin) या अन्य दवाएं केवल डॉक्टर की लिखित सलाह के बाद ही लें। यदि गंभीर रूप से कोविड संक्रमित रहे थे, तो साल में कम से कम एक बार कार्डियक स्क्रीनिंग जरूर करवाएं क्या नहीं करें धूम्रपान और शराब धमनियों को सिकोड़ते हैं और सूजन को कई गुना बढ़ा देते हैं। बिना डॉक्टरी सलाह के जिम सप्लीमेंट्स या स्टेरॉयड का सेवन हृदय के इलेक्ट्रिकल सिस्टम को बिगाड़ सकता है। बहुत ज्यादा कॉफी या एनर्जी ड्रिंक्स का सेवन हृदय की लय (Rhythm) को प्रभावित कर सकता है। अगर आपके आस-पास किसी को अचानक कार्डियक अरेस्ट आता है, तो CPR (Cardiopulmonary Resuscitation) देना शुरू करें और तुरंत एंबुलेंस बुलाएं। यह तकनीक जान बचाने में सबसे प्रभावी साबित होती है।