सायरन बजने के बाद 15 मिनट अंधेरे में डूबा पूर्णिया:सड़क पर थम गई गाड़ियों की रफ्तार; पेट्रोलिंग करती रही पुलिस, एक्टिव रहीं एंबुलेंस
पूर्णिया में गुरुवार शाम सायरन के गूंजते ही शहर अंधेरे में डूब गया। कई इलाकों की बत्तियां एक साथ बुझ गईं, सड़कों पर पुलिस और प्रशासन की हलचल बढ़ गई। हालांकि ये कोई असली हमला नहीं था, बल्कि नागरिक सुरक्षा को लेकर किया गया हाई अलर्ट मॉक ड्रिल था, जिसने कुछ देर के लिए लोगों को युद्ध जैसे हालात का एहसास करा दिया। केंद्र सरकार और गृह मंत्रालय के निर्देश पर आयोजित इस बड़े मॉक ड्रिल में पुलिस, फायर ब्रिगेड, स्वास्थ्य विभाग, बिजली विभाग, होमगार्ड, रेड क्रॉस और सिविल डिफेंस की टीमें एक साथ मैदान में उतरीं। सायरन बजते ही ब्लैकआउट शुरू कर दिया गया। ब्लैकआउट होते ही सड़क पर दौड़ती गाड़ियों पर अचानक ब्रेक लग गया। लोगों ने गाड़ियों की बत्तियां बुझा दी। इससे पहले आर एन साह चौक पर हजारों लोग जमा हो गए। प्रशासन की ओर से मॉक ड्रिल को लेकर यहां विशेष तैयारी की गई थी। एडीएम, एसडीपीओ समेत सभी बड़े अधिकारी मौके पर मौजूद रहे। अचानक बिजली गुल होते ही लोग घरों से बाहर निकले प्रशासन ने ये परखा कि किसी बड़े खतरे की स्थिति में सिस्टम कितनी तेजी से एक्टिव होता है। वहीं दूसरी तरफ शहर के कई हिस्सों में अचानक बिजली गुल होते ही लोग घरों से बाहर निकल आए। कहीं लोग मोबाइल की फ्लैशलाइट जलाते दिखे तो कहीं बच्चे और बुजुर्ग सायरन की आवाज सुनकर सहम गए। हालांकि प्रशासन की पहले से जारी चेतावनी और अपील के कारण कहीं भी अफरा-तफरी की स्थिति नहीं बनी। मॉक ड्रिल के दौरान पुलिस की गश्त तेज रही, एंबुलेंस लगातार दौड़ती नजर आईं और राहत-बचाव टीमों ने अलग-अलग जगहों पर अभ्यास किया। अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर तैयारियों का जायजा लिया और विभागों के बीच तालमेल की जांच की। एसडीओ दीक्षित श्वेतम ने साफ कहा कि यह केवल सुरक्षा अभ्यास था। उन्होंने लोगों से अफवाहों से बचने और प्रशासन का सहयोग करने की अपील की। बिहार के पूर्णिया समेत पटना, किशनगंज, कटिहार, अररिया और बेगूसराय में यह विशेष ब्लैकआउट मॉक ड्रिल आयोजित की गई। इसका मकसद किसी भी आपात स्थिति में प्रशासन और आम लोगों की तैयारी को मजबूत करना है।
पूर्णिया में गुरुवार शाम सायरन के गूंजते ही शहर अंधेरे में डूब गया। कई इलाकों की बत्तियां एक साथ बुझ गईं, सड़कों पर पुलिस और प्रशासन की हलचल बढ़ गई। हालांकि ये कोई असली हमला नहीं था, बल्कि नागरिक सुरक्षा को लेकर किया गया हाई अलर्ट मॉक ड्रिल था, जिसने कुछ देर के लिए लोगों को युद्ध जैसे हालात का एहसास करा दिया। केंद्र सरकार और गृह मंत्रालय के निर्देश पर आयोजित इस बड़े मॉक ड्रिल में पुलिस, फायर ब्रिगेड, स्वास्थ्य विभाग, बिजली विभाग, होमगार्ड, रेड क्रॉस और सिविल डिफेंस की टीमें एक साथ मैदान में उतरीं। सायरन बजते ही ब्लैकआउट शुरू कर दिया गया। ब्लैकआउट होते ही सड़क पर दौड़ती गाड़ियों पर अचानक ब्रेक लग गया। लोगों ने गाड़ियों की बत्तियां बुझा दी। इससे पहले आर एन साह चौक पर हजारों लोग जमा हो गए। प्रशासन की ओर से मॉक ड्रिल को लेकर यहां विशेष तैयारी की गई थी। एडीएम, एसडीपीओ समेत सभी बड़े अधिकारी मौके पर मौजूद रहे। अचानक बिजली गुल होते ही लोग घरों से बाहर निकले प्रशासन ने ये परखा कि किसी बड़े खतरे की स्थिति में सिस्टम कितनी तेजी से एक्टिव होता है। वहीं दूसरी तरफ शहर के कई हिस्सों में अचानक बिजली गुल होते ही लोग घरों से बाहर निकल आए। कहीं लोग मोबाइल की फ्लैशलाइट जलाते दिखे तो कहीं बच्चे और बुजुर्ग सायरन की आवाज सुनकर सहम गए। हालांकि प्रशासन की पहले से जारी चेतावनी और अपील के कारण कहीं भी अफरा-तफरी की स्थिति नहीं बनी। मॉक ड्रिल के दौरान पुलिस की गश्त तेज रही, एंबुलेंस लगातार दौड़ती नजर आईं और राहत-बचाव टीमों ने अलग-अलग जगहों पर अभ्यास किया। अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर तैयारियों का जायजा लिया और विभागों के बीच तालमेल की जांच की। एसडीओ दीक्षित श्वेतम ने साफ कहा कि यह केवल सुरक्षा अभ्यास था। उन्होंने लोगों से अफवाहों से बचने और प्रशासन का सहयोग करने की अपील की। बिहार के पूर्णिया समेत पटना, किशनगंज, कटिहार, अररिया और बेगूसराय में यह विशेष ब्लैकआउट मॉक ड्रिल आयोजित की गई। इसका मकसद किसी भी आपात स्थिति में प्रशासन और आम लोगों की तैयारी को मजबूत करना है।