मेट्रो या मजाक! 5800 करोड़ की मेट्रो डाल दी, सवारी नहीं मिल नहीं रही तो पार्टी, प्री-वेडिंग, फिल्म शूटिंग होगी इंदौर मेट्रो में
5800 करोड़ खर्च कर के तैयार की गई मेट्रो सेवा एक मजाक नजर आ रही है। क्योंकि इससे अब तक कोई आय नहीं हुई है। ऐसे में प्रशासन अब मेट्रो रेल को बर्थडे पार्टी, किटी पार्टी, प्री-वेडिंग शूट, फिल्म शूटिंग, वेब सीरीज, डॉक्यूमेंट्री और विज्ञापन आदि के लिए ...
लोगों को बेहतर ट्रांसपोर्टेशन सुविधा मिल सके, सड़कों से ट्रैफिक का दबाव कम हो सके, इसलिए बेहद धूमधाम से इंदौर में मेट्रो रेल सेवा का शुभारंभ किया गया था। लेकिन लंबे वक्त के बाद इंदौर मेट्रो खाली ही पटरियों पर वॉक कर रही है। न सवारी मिल रही है और न ही इंदौर के नागरिकों का इसे लेकर कोई उत्साह है। आलम यह है कि अब तक ठीक से संचालन भी शुरू नहीं हो सका है।
- 5800 करोड़ के इंदौर मेट्रो रेल प्रोजेक्ट का मजाक बना रहा प्रबंधन
- यात्रियों को आकर्षित करने के बजाए मेट्रो में पार्टी करवाएगा प्रशासन
- मेट्रो की तरफ यात्रियों को आकर्षित करने के लिए कोई कैंपेन नहीं
- बदहाल ट्रैफिक ने निकाल दिया इंदौर की सड़कों का कचूमर
सकारात्मक पहल या विफलता : मेट्रो प्रोजेक्ट के साथ हो रहे इस मजाक को प्रशासन ने ‘सेलिब्रेशन ऑन व्हील्स’ नाम दिया है। यानी कोई भी अब मेट्रो में अपनी पार्टी, प्री-वेडिंग शूट, बर्थडे पार्टी, किटी पार्टी आदि प्लान कर सकता है। इसे प्रचारित तो ऐसे किया जा रहा है जैसे यह कोई सकारात्मक काम है, जबकि हकीकत यह है कि यह प्रशासन की बडी विफलता है।
पार्टी के लिए खर्चे 5800 करोड़ : बता दें कि सुपर कॉरिडोर से रैडिसन चौराहे तक करीब 17 किलोमीटर लंबे वायडक्ट का निर्माण पूरा हो चुका है। इस हिस्से को तैयार करने में लगभग 5800 करोड़ रुपए खर्च किए गए हैं, लेकिन संचालन शुरू नहीं होने के कारण इससे किसी तरह की आय नहीं हो रही है। ऐसे में मेट्रो प्रबंधन अब इस बड़े प्रोजेक्ट से कुछ आमदनी निकालने के लिए नए विकल्प तलाश रहा है।
‘सेलिब्रेशन ऑन व्हील्स’ योजना: इंदौर मेट्रो अधिकारियों ने ‘सेलिब्रेशन ऑन व्हील्स’ योजना तैयार की है। इसके तहत मेट्रो कोच और स्टेशन परिसरों को निजी और व्यावसायिक आयोजनों के लिए किराए पर दिया जाएगा। यानी अब मेट्रो ट्रेन में सिर्फ यात्रा ही नहीं बल्कि जन्मदिन, किटी पार्टी, प्री-वेडिंग शूट जैसे आयोजन भी हो सकेंगे। इसके साथ ही फिल्म, वेब सीरीज, विज्ञापन और फोटोशूट की अनुमति भी दी जाएगी। प्रबंधन का कहना है कि इन आयोजनों को इस तरह से आयोजित किया जाएगा जिससे आम यात्रियों को किसी तरह की परेशानी न हो।
5000 रुपए प्रति घंटे लगेंगे : शुल्क की बात करें तो स्टेशन परिसर में खड़े कोच के उपयोग के लिए 5 हजार रुपए प्रति घंटे किराया तय किया गया है, जबकि वायडक्ट पर चलती मेट्रो में आयोजन करने के लिए 7 हजार रुपए प्रति घंटे देना होगा। एक बार में अधिकतम 50 लोगों को अनुमति दी जाएगी। यदि इससे ज्यादा लोग शामिल होते हैं तो अतिरिक्त शुल्क लिया जाएगा। इसके अलावा हर कोच के लिए 20 हजार रुपए की सुरक्षा राशि भी जमा करनी होगी, जो नियमों का पालन करने पर वापस कर दी जाएगी।
क्या यह इंदौर के लोगों के साथ मजाक है : होना तो यह चाहिए था कि मेट्रो सेवा शुरू होते ही हजारों की संख्या में यात्री इसमें सफर कर रहे होते। करीब 35 लाख जनसंख्या वाले इंदौर शहर में सड़कों का कचूमर निकल चुका है। ट्रैफिक ने पूरे शहर को बदहाल कर दिया है। न कोई नियम है तो कोई कायदा। लोग सिग्नल तोड़ रहे हैं, पार्किंग की कोई व्यवस्था नहीं है। आम लोग परेशान है। अतिक्रमण ने बाजारों का दम निकाल दिया है। ऐसे में मेट्रो के साथ यह मजाक कितना उचित है। इसका साफ मतलब है कि मेट्रो की योजना बनाने वालों को अंदाजा ही नहीं था कि इसमें कितने लोग बैठेंगे, कितने यात्री इसका इस्तेमाल करेंगे। अभी तक सुपर कॉरिडोर से रेडिसन चौराहे तक मेट्रो लाइन तैयार हो चुकी है। यह एक जरूरी रूट है जहां लाखों लोग आते- जाते हैं, फिर भी मेट्रो के लिए लोग उत्साह नहीं दिखा रहे हैं, ऐसे में इसकी संचालन की सफलता का अंदाजा लगाया जा सकता है।
रिपोर्ट : नवीन रांगियाल



