पंचभूर झरने को इको-टूरिज्म डेस्टिनेशन बनाने की पहल:डीएम-एसपी ने दुर्गम पहाड़ियों की पैदल यात्रा की, पर्यटन की संभावनाएं तलाशीं
जमुई जिला प्रशासन ने पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए एक महत्वपूर्ण पहल की है। जिलाधिकारी नवीन कुमार और पुलिस अधीक्षक विश्वजीत दयाल के नेतृत्व में अधिकारियों की एक टीम ने खैरा प्रखंड स्थित गिद्धेश्वर पर्वत श्रृंखला के दुर्गम जंगलों और पथरीले रास्तों से होकर 'पंचभूर झरना' तक पैदल यात्रा की। वनवासियों से झरने तक पहुंचने के सुरक्षित रास्ते की जानकारी ली यह पदयात्रा केवल प्राकृतिक सौंदर्य का अन्वेषण नहीं थी, बल्कि प्रशासन ने इस दौरान जमीनी हकीकत, बुनियादी सुविधाओं और विकास की संभावनाओं का भी गहन आकलन किया। टीम ने स्थानीय ग्रामीणों और वनवासियों से संवाद कर झरने तक पहुंचने के लिए सबसे सुरक्षित और सुगम मार्ग की जानकारी ली, ताकि भविष्य में पर्यटकों को कोई परेशानी न हो। यात्रा के दौरान क्षेत्र में सकारात्मक बदलाव भी देखने को मिले। कभी नक्सल प्रभावित रहे इस इलाके के लोगों ने बताया कि अब भय का माहौल समाप्त हो चुका है। दूरस्थ गांवों तक बिजली और सौर ऊर्जा जैसी सुविधाएं पहुंच रही हैं। एक दिव्यांग व्यक्ति और उनकी वृद्ध माता ने सरकारी योजनाओं, विशेषकर वृद्धा पेंशन, से संतोष व्यक्त किया। प्रशासनिक टीम ने पंचभूर झरने के विभिन्न स्तरों का निरीक्षण किया। टीम विशेष रूप से तीसरे स्तर से प्रभावित हुई, जहां स्वच्छ जल और चट्टानी संरचनाओं के बीच अद्भुत प्राकृतिक दृश्य दिखा। इसे जल-क्रीड़ा और पर्यटन के लिए सबसे उपयुक्त स्थल के रूप में चिन्हित किया गया। मौके पर ही जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक ने इस स्थल को सुरक्षित, स्वच्छ और पर्यटक अनुकूल बनाने को लेकर अधिकारियों के साथ चर्चा की। ग्रामीणों की भागीदारी से स्वच्छता और व्यवस्था बनाए रखने पर जोर दिया गया। यह पहल पंचभूर झरने को एक प्रमुख इको-टूरिज्म डेस्टिनेशन के रूप में स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण साबित हो सकती है।
जमुई जिला प्रशासन ने पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए एक महत्वपूर्ण पहल की है। जिलाधिकारी नवीन कुमार और पुलिस अधीक्षक विश्वजीत दयाल के नेतृत्व में अधिकारियों की एक टीम ने खैरा प्रखंड स्थित गिद्धेश्वर पर्वत श्रृंखला के दुर्गम जंगलों और पथरीले रास्तों से होकर 'पंचभूर झरना' तक पैदल यात्रा की। वनवासियों से झरने तक पहुंचने के सुरक्षित रास्ते की जानकारी ली यह पदयात्रा केवल प्राकृतिक सौंदर्य का अन्वेषण नहीं थी, बल्कि प्रशासन ने इस दौरान जमीनी हकीकत, बुनियादी सुविधाओं और विकास की संभावनाओं का भी गहन आकलन किया। टीम ने स्थानीय ग्रामीणों और वनवासियों से संवाद कर झरने तक पहुंचने के लिए सबसे सुरक्षित और सुगम मार्ग की जानकारी ली, ताकि भविष्य में पर्यटकों को कोई परेशानी न हो। यात्रा के दौरान क्षेत्र में सकारात्मक बदलाव भी देखने को मिले। कभी नक्सल प्रभावित रहे इस इलाके के लोगों ने बताया कि अब भय का माहौल समाप्त हो चुका है। दूरस्थ गांवों तक बिजली और सौर ऊर्जा जैसी सुविधाएं पहुंच रही हैं। एक दिव्यांग व्यक्ति और उनकी वृद्ध माता ने सरकारी योजनाओं, विशेषकर वृद्धा पेंशन, से संतोष व्यक्त किया। प्रशासनिक टीम ने पंचभूर झरने के विभिन्न स्तरों का निरीक्षण किया। टीम विशेष रूप से तीसरे स्तर से प्रभावित हुई, जहां स्वच्छ जल और चट्टानी संरचनाओं के बीच अद्भुत प्राकृतिक दृश्य दिखा। इसे जल-क्रीड़ा और पर्यटन के लिए सबसे उपयुक्त स्थल के रूप में चिन्हित किया गया। मौके पर ही जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक ने इस स्थल को सुरक्षित, स्वच्छ और पर्यटक अनुकूल बनाने को लेकर अधिकारियों के साथ चर्चा की। ग्रामीणों की भागीदारी से स्वच्छता और व्यवस्था बनाए रखने पर जोर दिया गया। यह पहल पंचभूर झरने को एक प्रमुख इको-टूरिज्म डेस्टिनेशन के रूप में स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण साबित हो सकती है।