न्यूयॉर्क मॉडल पर चंडीगढ़ में स्काई-गार्डन योजना:पेड़ों के बीच एलीवेटेड वॉकवे, AI तकनीक से होगी हरियाली की सुरक्षा
चंडीगढ़ ईको-स्मार्ट सिटी के रूप में उभरेगा। सोमवार को नगर निगम की फाइनेंस एंड कॉन्ट्रैक्ट कमेटी (FCC) की बैठक में मेयर सौरभ जोशी ने इस प्रोजेक्ट स्काई-गार्डन (Sky-Garden) को पेश किया। यह प्रोजेक्ट न्यूयॉर्क की हाई लाइन और सिंगापुर के स्काई-वे की तर्ज पर तैयार किया जाएगा, जिसमें लोग पेड़ों की कतारों के बीच ऊंचाई पर बनी गैलरी में पैदल सैर कर सकेंगे। यह है अर्बन लेयरिंग कॉन्सेप्ट मेयर ने बताया कि यह प्रोजेक्ट अर्बन लेयरिंग तकनीक पर आधारित है। इसका मतलब है कि शहर की हरियाली को दो स्तरों पर बांटा जाएगा। - पहला ऊपरी स्तर: हाई-टेक एलीवेटेड पेडेस्ट्रियन कॉरिडोर (पैदल पथ), जहां लोग पेड़ों के झुरमुटों के बीच घूम सकेंगे। - दूसरा निचला स्तर: जमीन पर पैदल चलने वाले रास्तों की जगह अब बड़े फूलों के पेड, प्राकृतिक घास और लैंडस्केपिंग के लिए ज्यादा जगह उपलब्ध होगी। AI और डिजिटल ट्विन तकनीक से होगी पेड़ों की सुरक्षा पर्यावरण को लेकर उठने वाले सवालों पर मेयर ने स्पष्ट किया कि यह प्रोजेक्ट पेड़ों को काटने के लिए नहीं, बल्कि उन्हें सहेजने के लिए है। 1. जीरो डैमेज पॉलिसी: हेरिटेज पेड़ों को बचाने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और डिजिटल ट्विन मॉडलिंग का उपयोग किया जाएगा। 2.प्रिसिजन इंजीनियरिंग: तकनीक के जरिए यह सुनिश्चित होगा कि निर्माण के दौरान पेड़ों की जड़ों और उनकी टहनियों (Canopy) को कोई नुकसान न पहुंचे। 3.स्मार्ट लाइटिंग: पक्षियों और वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास को डिस्टर्ब होने से बचाने के लिए एडेप्टिव स्मार्ट लाइटिंग लगाई जाएगी, जिससे लाइट पॉल्यूशन कम होगा। पायलट प्रोजेक्ट के लिए 10 पार्क होंगे शॉर्टलिस्ट विकसित चंडीगढ़ 2047 के विजन को आगे बढ़ाते हुए मेयर सौरभ जोशी ने संबंधित इंजीनियरों को निर्देश दिए हैं कि वह शहर के 9 से 10 प्रमुख पार्कों और ग्रीन बेल्ट की पहचान करें, जहां इस प्रोजेक्ट का ट्रायल यानी पायलट फेज शुरू किया जा सके।
चंडीगढ़ ईको-स्मार्ट सिटी के रूप में उभरेगा। सोमवार को नगर निगम की फाइनेंस एंड कॉन्ट्रैक्ट कमेटी (FCC) की बैठक में मेयर सौरभ जोशी ने इस प्रोजेक्ट स्काई-गार्डन (Sky-Garden) को पेश किया। यह प्रोजेक्ट न्यूयॉर्क की हाई लाइन और सिंगापुर के स्काई-वे की तर्ज पर तैयार किया जाएगा, जिसमें लोग पेड़ों की कतारों के बीच ऊंचाई पर बनी गैलरी में पैदल सैर कर सकेंगे। यह है अर्बन लेयरिंग कॉन्सेप्ट मेयर ने बताया कि यह प्रोजेक्ट अर्बन लेयरिंग तकनीक पर आधारित है। इसका मतलब है कि शहर की हरियाली को दो स्तरों पर बांटा जाएगा। - पहला ऊपरी स्तर: हाई-टेक एलीवेटेड पेडेस्ट्रियन कॉरिडोर (पैदल पथ), जहां लोग पेड़ों के झुरमुटों के बीच घूम सकेंगे। - दूसरा निचला स्तर: जमीन पर पैदल चलने वाले रास्तों की जगह अब बड़े फूलों के पेड, प्राकृतिक घास और लैंडस्केपिंग के लिए ज्यादा जगह उपलब्ध होगी। AI और डिजिटल ट्विन तकनीक से होगी पेड़ों की सुरक्षा पर्यावरण को लेकर उठने वाले सवालों पर मेयर ने स्पष्ट किया कि यह प्रोजेक्ट पेड़ों को काटने के लिए नहीं, बल्कि उन्हें सहेजने के लिए है। 1. जीरो डैमेज पॉलिसी: हेरिटेज पेड़ों को बचाने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और डिजिटल ट्विन मॉडलिंग का उपयोग किया जाएगा। 2.प्रिसिजन इंजीनियरिंग: तकनीक के जरिए यह सुनिश्चित होगा कि निर्माण के दौरान पेड़ों की जड़ों और उनकी टहनियों (Canopy) को कोई नुकसान न पहुंचे। 3.स्मार्ट लाइटिंग: पक्षियों और वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास को डिस्टर्ब होने से बचाने के लिए एडेप्टिव स्मार्ट लाइटिंग लगाई जाएगी, जिससे लाइट पॉल्यूशन कम होगा। पायलट प्रोजेक्ट के लिए 10 पार्क होंगे शॉर्टलिस्ट विकसित चंडीगढ़ 2047 के विजन को आगे बढ़ाते हुए मेयर सौरभ जोशी ने संबंधित इंजीनियरों को निर्देश दिए हैं कि वह शहर के 9 से 10 प्रमुख पार्कों और ग्रीन बेल्ट की पहचान करें, जहां इस प्रोजेक्ट का ट्रायल यानी पायलट फेज शुरू किया जा सके।