जब मंच से आवाज उठी और शब्दों ने असर दिखाया,*
जब मंच से आवाज उठी और शब्दों ने असर दिखाया,*
*जब मंच से आवाज उठी और शब्दों ने असर दिखाया,*
“*धुरंधर” कहकर नेता को नया मुकाम दिलाया।*
नाम नहीं ये पहचान बनी,
काम से ही ये शान बनी।
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इरादे फौलादी, फैसले दमदार,
हर कदम पर दिखा नेतृत्व शानदार।
*तभी तो देश के बड़े नेता ने कहा खुले मंच से,*
*ये धाकड़ नहीं… “धुरंधर” है असल अर्थ में।*



