वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने आज अपने बजट भाषण में एक युगांतरकारी घोषणा की है। उन्होंने स्पष्ट किया कि नया आयकर अधिनियम 2025 (New Income Tax Act 2025) आगामी 1 अप्रैल, 2026 से आधिकारिक रूप से प्रभावी हो जाएगा। यह नया कानून पिछले छह दशकों से चले आ रहे 'आयकर अधिनियम 1961' का स्थान लेगा। सरकार का यह कदम 'ईज ऑफ डूइंग बिजनेस' और करदाताओं के लिए नियमों को सरल बनाने की दिशा में अब तक का सबसे बड़ा सुधार माना जा रहा है।
केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने उन्होंने कहा, "मैं ओवरसीज टूर प्रोग्राम पैकेज की बिक्री पर TCS दर को मौजूदा 5% और 20% से घटाकर 2% करने का प्रस्ताव करती हूं, बिना किसी रकम की शर्त के।" FM सीतारमण ने कहा, "मैं प्रस्ताव करती हूं कि मोटर दुर्घटना दावा ट्रिब्यूनल द्वारा किसी भी व्यक्ति को दिया गया कोई भी ब्याज इनकम टैक्स से मुक्त होगा और इस पर कोई TDS नहीं काटा जाएगा।" उन्होंने कहा, "हम FY27 बजट में छोटे टैक्सपेयर्स के लिए नियम-आधारित ऑटोमेटेड प्रोसेस का प्रस्ताव करते हैं। ITR-1 और ITR-2 फाइल करने वाले लोग 31 जुलाई तक फाइल कर सकते हैं। नॉन-ऑडिट बिजनेस केस और ट्रस्ट को 31 अगस्त तक रिटर्न फाइल करने की अनुमति होगी।" उन्होंने कहा, "अब एक व्यक्ति के तौर पर आप मामूली फीस देकर 31 मार्च तक रिवाइज्ड ITR फाइल कर सकते हैं।
नए कानून की 5 सबसे बड़ी बातें
नया आयकर अधिनियम केवल पुराने कानून का अनुवाद नहीं है, बल्कि यह पूरी तरह से पुनर्गठित और आधुनिक है:
'असेसमेंट ईयर' की विदाई: अब तक करदाता 'प्रीवियस ईयर' (PY) और 'असेसमेंट ईयर' (AY) के चक्कर में उलझे रहते थे। नए कानून में इन दोनों को हटाकर केवल 'टैक्स ईयर' (Tax Year) का सरल कॉन्सेप्ट पेश किया गया है।
कानून का आकार घटा: पुराने कानून में धाराओं (Sections) की संख्या 819 थी, जिसे अब घटाकर 536 कर दिया गया है। शब्द गणना (Word Count) में भी लगभग 40-50% की कमी की गई है।
धाराओं का पुनर्गठन: सभी महत्वपूर्ण छूटों (Exemptions) और कटौतियों (Deductions) को व्यवस्थित तरीके से अलग-अलग 'शेड्यूल' में रखा गया है। उदाहरण के लिए, अब धारा 80C की जगह 'धारा 123' (शेड्यूल XV) ले लेगी।
डिजिटल और फेसलेस: नया कानून पूरी तरह से डिजिटल-फर्स्ट अप्रोच पर आधारित है। इसमें फेसलेस असेसमेंट और नोटिस की प्रक्रिया को और अधिक पारदर्शी और तकनीकी रूप से सक्षम बनाया गया है।
विवादों में कमी: कानूनी भाषा को बेहद सरल (Plain Language) बनाया गया है ताकि अलग-अलग व्याख्याओं के कारण होने वाले मुकदमों और विवादों (Litigations) को न्यूनतम किया जा सके।