PM Modi ने विनिर्माण क्षेत्र को बढ़ावा देने का आह्वान किया और सप्त धारा रूपरेखा पेश की

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने शनिवार को विनिर्माण क्षेत्र की वृद्धि को बढ़ावा देने का आह्वान करते हुए कहा कि लागत, गुणवत्ता, पैमाने, उपयोगकर्ता के अनुकूल उत्पादों और आकर्षक पैकेजिंग पर ध्यान देने की जरूरत है। उन्होंने 80वें स्वतंत्रता दिवस पर लाल किले की प्राचीर से देश को संबोधित करते हुए 2047 तक भारत को एक विकसित राष्ट्र बनाने के लिए सप्त धारा नाम से सात सूत्रीय सुधार रूपरेखा पेश की। इसमें विनिर्माण, कृषि-खाद्य उत्पादन और खाद्य प्रसंस्करण, प्रौद्योगिकी एवं नवाचार, लॉजिस्टिक, रक्षा, हरित एवं नीली अर्थव्यवस्था, और सॉफ्ट पावर पर ध्यान केंद्रित किया गया है।उन्होंने कहा कि सप्त धारा की पहली ताकत विनिर्माण शक्ति है। उन्होंने आगे कहा, हमें विनिर्माण क्षेत्र को महत्वपूर्ण रूप से बढ़ावा देने की आवश्यकता है। उत्पादन बढ़ाने के साथ-साथ हमें छोटे घटकों और बड़े उत्पादों, दोनों का निर्माण करना है।मोदी ने कहा कि डिजाइन से लेकर विनिर्माण तक, भारत को वैश्विक आपूर्ति शृंखला में एक विश्वसनीय केंद्र बनना चाहिए। उन्होंने कहा, इसके लिए मैं तीन चीजों पर विशेष जोर देना चाहूंगा... विनिर्माण क्षेत्र के लोगों के लिए यह एक अवसर है। इसे अनदेखा न करें, और इसे हासिल करने के लिए हमें लागत, गुणवत्ता और पैमाने के मामले में वैश्विक मानकों को पूरा करना होगा।प्रधानमंत्री ने कहा, हमारे कारखाने प्रतिस्पर्धी होने चाहिए, हमारे उत्पाद उपयोग में आसान होने चाहिए और हमारी पैकेजिंग दुनिया भर के लोगों के लिए आकर्षक होनी चाहिए। सटीक विनिर्माण हमारी पहचान बननी चाहिए। उन्होंने कहा कि वैश्विक बाजार में घरेलू निर्माताओं, उद्यमियों और एमएसएमई की पहचान विश्वसनीयता और गुणवत्ता पर आधारित होनी चाहिए।उन्होंने आगे कहा, गुणवत्ता से कोई समझौता नहीं होना चाहिए, और हमारा मंत्र गुणवत्ता, गुणवत्ता, गुणवत्ता होना चाहिए।

Aug 15, 2026 - 20:37
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PM Modi ने विनिर्माण क्षेत्र को बढ़ावा देने का आह्वान किया और सप्त धारा रूपरेखा पेश की

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने शनिवार को विनिर्माण क्षेत्र की वृद्धि को बढ़ावा देने का आह्वान करते हुए कहा कि लागत, गुणवत्ता, पैमाने, उपयोगकर्ता के अनुकूल उत्पादों और आकर्षक पैकेजिंग पर ध्यान देने की जरूरत है। उन्होंने 80वें स्वतंत्रता दिवस पर लाल किले की प्राचीर से देश को संबोधित करते हुए 2047 तक भारत को एक विकसित राष्ट्र बनाने के लिए सप्त धारा नाम से सात सूत्रीय सुधार रूपरेखा पेश की। इसमें विनिर्माण, कृषि-खाद्य उत्पादन और खाद्य प्रसंस्करण, प्रौद्योगिकी एवं नवाचार, लॉजिस्टिक, रक्षा, हरित एवं नीली अर्थव्यवस्था, और सॉफ्ट पावर पर ध्यान केंद्रित किया गया है।

उन्होंने कहा कि सप्त धारा की पहली ताकत विनिर्माण शक्ति है। उन्होंने आगे कहा, हमें विनिर्माण क्षेत्र को महत्वपूर्ण रूप से बढ़ावा देने की आवश्यकता है। उत्पादन बढ़ाने के साथ-साथ हमें छोटे घटकों और बड़े उत्पादों, दोनों का निर्माण करना है।

मोदी ने कहा कि डिजाइन से लेकर विनिर्माण तक, भारत को वैश्विक आपूर्ति शृंखला में एक विश्वसनीय केंद्र बनना चाहिए। उन्होंने कहा, इसके लिए मैं तीन चीजों पर विशेष जोर देना चाहूंगा... विनिर्माण क्षेत्र के लोगों के लिए यह एक अवसर है। इसे अनदेखा न करें, और इसे हासिल करने के लिए हमें लागत, गुणवत्ता और पैमाने के मामले में वैश्विक मानकों को पूरा करना होगा।

प्रधानमंत्री ने कहा, हमारे कारखाने प्रतिस्पर्धी होने चाहिए, हमारे उत्पाद उपयोग में आसान होने चाहिए और हमारी पैकेजिंग दुनिया भर के लोगों के लिए आकर्षक होनी चाहिए। सटीक विनिर्माण हमारी पहचान बननी चाहिए। उन्होंने कहा कि वैश्विक बाजार में घरेलू निर्माताओं, उद्यमियों और एमएसएमई की पहचान विश्वसनीयता और गुणवत्ता पर आधारित होनी चाहिए।

उन्होंने आगे कहा, गुणवत्ता से कोई समझौता नहीं होना चाहिए, और हमारा मंत्र गुणवत्ता, गुणवत्ता, गुणवत्ता होना चाहिए।