LDA की संपत्ति हड़पने का आरोपी गिरफ्तार:मकान के फर्जी दस्तावेज बनाकर 35 लाख रुपए में बेचकर 4 साल से फरार था

लखनऊ विकास प्राधिकरण (एलडीए) की लाखों रुपए की संपत्ति को फर्जी दस्तावेजों के जरिए हड़पने और बेचने के मामले में क्राइम ब्रांच की आर्थिक अपराध शाखा (EOW) ने करीब चार साल से फरार आरोपी सचिन सिंह को गिरफ्तार किया है। आरोपी पर फर्जी दस्तावेज तैयार कराने और संपत्ति की बिक्री से मिली रकम में हिस्सा लेने का आरोप है। एडीसीपी क्राइम किरण यादव ने बताया आजमगढ़ सदर निवासी मधवेश कुमार एलडीए में उपसचिव के पद पर कार्यरत हैं, उन्होंने दिसंबर 2022 में फर्जी कागजों से जमीन बेचने का मुकदमा दर्ज कराया था। शिवानी के नाम दर्ज कराई गई संपत्ति जांच में सामने आया कि एलडीए के पोर्टल पर संपत्ति से जुड़े फर्जी दस्तावेज तैयार कराए गए। इन दस्तावेजों में दिखाया गया कि गोमतीनगर विराज खंड स्थित 2/81 एलडीए ने साल 2000 में शिवानी रस्तोगी को आवंटित किया था। हालांकि, एलडीए की जांच में दस्तावेज फर्जी और कूटरचित पाए गए। शिवानी रस्तोगी ने इन फर्जी दस्तावेजों के आधार पर 28 अक्टूबर 2020 को संपत्ति का खरीदकर वैष्णवी सोनी के पक्ष में दिया गया। विवेचना में सामने आया कि एलडीए के निलंबित कनिष्ठ लिपिक अजय प्रताप वर्मा ने भी संपत्ति से संबंधित रिकॉर्ड को फर्जी तरीके से कंप्यूटरीकृत करने में भूमिका निभाई थी। 35 लाख में आगे बेच दी गई संपत्ति पुलिस के मुताबिक, वैष्णवी सोनी ने बाद में इस संपत्ति को 35 लाख रुपए में रंजना देवी को बेच दिया। संपत्ति की बिक्री से मिली रकम वैष्णवी सोनी के बैंक खाते में पहुंची। जांच में यह भी सामने आया कि बेचने के बाद मिली हुई रकम के लाभांश का एक हिस्सा आरोपी सचिन सिंह के बैंक खाते में पहुंचा था। इसी आधार पर पुलिस को सचिन के शामिल होने का पता चला। होटल में बनती थी फर्जीवाड़े की योजना पुलिस के अनुसार, सचिन सिंह पहले विभूतिखंड स्थित होटल जेएमडी इन का संचालन करता था। जांच में जानकारी मिली कि होटल में ही सह-आरोपियों के साथ फर्जी दस्तावेज तैयार करने और संपत्ति हड़पने की योजना बनाई गई थी। मामले में नाम सामने आने के बाद सचिन गिरफ्तारी से बचने के लिए फरार हो गया था। मौजूदा समय में वह ललितपुर में एक डैम का ठेका लेकर मत्स्य पालन का कारोबार कर रहा था। क्राइम ब्रांच की आर्थिक अपराध ब्रांच ने सर्विलांस और टेक्निकल सबूतों की मदद से आरोपी की लोकेशन ट्रेस की। इसके बाद 1 सितंबर 2026 को जेहटा दुबग्गा निवासी सचिन सिंह (36) को गोमतीनगर विस्तार स्थित छोटा भरवारा में इंडियन ऑयल पेट्रोल पंप के पास से गिरफ्तार कर लिया गया। मामले में 5 आरोपियों की भूमिका सामने आई पुलिस के मुताबिक, इस प्रकरण में कुल पांच आरोपियों की संलिप्तता सामने आई थी। इनमें से तीन आरोपियों को पहले ही गिरफ्तार कर उनके खिलाफ कोर्ट में आरोप पत्र दाखिल किया जा चुका है। एक आरोपी की मौत हो चुकी है। वहीं, करीब चार साल से फरार चल रहा अंतिम वांछित आरोपी सचिन सिंह अब पुलिस के हत्थे चढ़ गया है।

Sep 3, 2026 - 18:41
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LDA की संपत्ति हड़पने का आरोपी गिरफ्तार:मकान के फर्जी दस्तावेज बनाकर 35 लाख रुपए में बेचकर 4 साल से फरार था
लखनऊ विकास प्राधिकरण (एलडीए) की लाखों रुपए की संपत्ति को फर्जी दस्तावेजों के जरिए हड़पने और बेचने के मामले में क्राइम ब्रांच की आर्थिक अपराध शाखा (EOW) ने करीब चार साल से फरार आरोपी सचिन सिंह को गिरफ्तार किया है। आरोपी पर फर्जी दस्तावेज तैयार कराने और संपत्ति की बिक्री से मिली रकम में हिस्सा लेने का आरोप है। एडीसीपी क्राइम किरण यादव ने बताया आजमगढ़ सदर निवासी मधवेश कुमार एलडीए में उपसचिव के पद पर कार्यरत हैं, उन्होंने दिसंबर 2022 में फर्जी कागजों से जमीन बेचने का मुकदमा दर्ज कराया था। शिवानी के नाम दर्ज कराई गई संपत्ति जांच में सामने आया कि एलडीए के पोर्टल पर संपत्ति से जुड़े फर्जी दस्तावेज तैयार कराए गए। इन दस्तावेजों में दिखाया गया कि गोमतीनगर विराज खंड स्थित 2/81 एलडीए ने साल 2000 में शिवानी रस्तोगी को आवंटित किया था। हालांकि, एलडीए की जांच में दस्तावेज फर्जी और कूटरचित पाए गए। शिवानी रस्तोगी ने इन फर्जी दस्तावेजों के आधार पर 28 अक्टूबर 2020 को संपत्ति का खरीदकर वैष्णवी सोनी के पक्ष में दिया गया। विवेचना में सामने आया कि एलडीए के निलंबित कनिष्ठ लिपिक अजय प्रताप वर्मा ने भी संपत्ति से संबंधित रिकॉर्ड को फर्जी तरीके से कंप्यूटरीकृत करने में भूमिका निभाई थी। 35 लाख में आगे बेच दी गई संपत्ति पुलिस के मुताबिक, वैष्णवी सोनी ने बाद में इस संपत्ति को 35 लाख रुपए में रंजना देवी को बेच दिया। संपत्ति की बिक्री से मिली रकम वैष्णवी सोनी के बैंक खाते में पहुंची। जांच में यह भी सामने आया कि बेचने के बाद मिली हुई रकम के लाभांश का एक हिस्सा आरोपी सचिन सिंह के बैंक खाते में पहुंचा था। इसी आधार पर पुलिस को सचिन के शामिल होने का पता चला। होटल में बनती थी फर्जीवाड़े की योजना पुलिस के अनुसार, सचिन सिंह पहले विभूतिखंड स्थित होटल जेएमडी इन का संचालन करता था। जांच में जानकारी मिली कि होटल में ही सह-आरोपियों के साथ फर्जी दस्तावेज तैयार करने और संपत्ति हड़पने की योजना बनाई गई थी। मामले में नाम सामने आने के बाद सचिन गिरफ्तारी से बचने के लिए फरार हो गया था। मौजूदा समय में वह ललितपुर में एक डैम का ठेका लेकर मत्स्य पालन का कारोबार कर रहा था। क्राइम ब्रांच की आर्थिक अपराध ब्रांच ने सर्विलांस और टेक्निकल सबूतों की मदद से आरोपी की लोकेशन ट्रेस की। इसके बाद 1 सितंबर 2026 को जेहटा दुबग्गा निवासी सचिन सिंह (36) को गोमतीनगर विस्तार स्थित छोटा भरवारा में इंडियन ऑयल पेट्रोल पंप के पास से गिरफ्तार कर लिया गया। मामले में 5 आरोपियों की भूमिका सामने आई पुलिस के मुताबिक, इस प्रकरण में कुल पांच आरोपियों की संलिप्तता सामने आई थी। इनमें से तीन आरोपियों को पहले ही गिरफ्तार कर उनके खिलाफ कोर्ट में आरोप पत्र दाखिल किया जा चुका है। एक आरोपी की मौत हो चुकी है। वहीं, करीब चार साल से फरार चल रहा अंतिम वांछित आरोपी सचिन सिंह अब पुलिस के हत्थे चढ़ गया है।