यूक्रेन युद्ध के मोर्चे पर बढ़ती सैन्य तनातनी के बीच मॉस्को से एक ऐसी खबर सामने आई है, जिसने वॉशिंगटन, कीव और यूरोपीय राजधानियों की बेचैनी बढ़ा दी है। रिपोर्टों के अनुसार, अमेरिका के खुफिया तंत्र के प्रमुख सीआईए निदेशक जॉन रैटक्लिफ कथित तौर पर एक ‘आपात’ बैठक के लिए मॉस्को पहुंचे थे। दावा है कि उनका संदेश रूस के लिए बेहद सीधा था कि यूक्रेन युद्ध को ऐसे स्तर तक मत ले जाइए, जहां से वापसी संभव नहीं हो। खासतौर पर परमाणु हथियारों के इस्तेमाल या यूक्रेन के पश्चिमी सहयोगियों को सीधे निशाना बनाने जैसी किसी कार्रवाई के खिलाफ कथित तौर पर वॉशिंगटन ने क्रेमलिन को कड़ा संकेत दिया है।
ब्रिटिश अखबार डेली मेल की रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी खुफिया आकलन में आशंका जताई गई है कि युद्ध के मैदान में नए झटकों के बाद रूस तेज और नाटकीय प्रतिक्रिया दे सकता है। इसी पृष्ठभूमि में रैटक्लिफ के जरिए रूसी अधिकारियों तक पहुंचाया गया संदेश कथित तौर पर बेहद स्पष्ट था, “बस ऐसा मत कीजिए।” सवाल यह है कि क्या अमेरिका के पास ऐसी कोई ठोस खुफिया सूचना है, जिसने सीआईए प्रमुख को सीधे मॉस्को भेजने की जरूरत पैदा की?
देखा जाये तो यह कथित यात्रा ऐसे समय में सामने आई है, जब रूस और ब्रिटेन के बीच तनाव भी लगातार बढ़ रहा है। लंदन द्वारा यूक्रेन को सैन्य समर्थन बढ़ाने से मॉस्को पहले ही नाराज है और पश्चिमी देशों की भूमिका को लेकर क्रेमलिन का रुख लगातार आक्रामक बना हुआ है। ऐसे में परमाणु विकल्प की आशंका और पश्चिमी सहयोगियों पर संभावित हमले की चर्चा ने इस युद्ध को केवल रूस-यूक्रेन संघर्ष तक सीमित नहीं रहने दिया है।
मामले का एक और दिलचस्प पहलू यूक्रेन से जुड़ा है। द कीव इंडिपेंडेंट ने स्थिति से परिचित एक सूत्र के हवाले से दावा किया है कि वॉशिंगटन ने कीव से कहा था कि रैटक्लिफ के रूस में रहने के दौरान मॉस्को और सेंट पीटर्सबर्ग पर हमले न किए जाएं। रिपोर्ट के अनुसार, यूक्रेन ने 24 से 26 अगस्त के बीच इन दोनों शहरों पर हमले रोकने पर सहमति जताई। सूत्र का दावा है कि अमेरिकी अधिकारियों को यह भरोसा नहीं था कि इन शहरों के आसपास रूसी वायु रक्षा प्रणाली किसी संभावित हमले को पूरी तरह रोकने के लिए पर्याप्त मजबूत है।
यदि यह दावा सही है तो यह केवल सैन्य संयम का मामला नहीं, बल्कि बेहद संवेदनशील कूटनीतिक संकेत भी है। सवाल उठता है कि क्या वॉशिंगटन ने अपने खुफिया प्रमुख की सुरक्षा और मॉस्को के साथ बातचीत के लिए यूक्रेन से अस्थायी ‘शांत आकाश’ सुनिश्चित करने की कोशिश की? अमेरिकी और रूसी संपर्कों के बीच यह सवाल और भी महत्वपूर्ण हो जाता है।
बताया जा रहा है कि रैटक्लिफ की कथित यात्रा पर पहली नजर तब गई, जब फ्लाइटरडार24 के आंकड़ों में अमेरिकी वायुसेना का एक C-17 सैन्य परिवहन विमान मंगलवार को लातविया की राजधानी रीगा से मॉस्को के वनुकोवो हवाई अड्डे की ओर जाता दिखाई दिया। RCH4555 कॉल साइन वाला विमान सुबह करीब 8:50 बजे रीगा से रवाना हुआ और लगभग 10 बजे के बाद मॉस्को पहुंचा। इससे पहले यह विमान 23 अगस्त को मैरीलैंड के कैंप स्प्रिंग्स से रीगा आया था। कैंप स्प्रिंग्स में ही ज्वाइंट बेस एंड्रयूज स्थित है, जो अमेरिकी राष्ट्रपति और शीर्ष अधिकारियों की हवाई गतिविधियों से जुड़ा एक महत्वपूर्ण सैन्य ठिकाना है।
द कीव इंडिपेंडेंट के अनुसार, एक अमेरिकी अधिकारी ने भी पुष्टि की कि रैटक्लिफ की रूसी अधिकारियों से मुलाकात निर्धारित थी, हालांकि बातचीत का एजेंडा सार्वजनिक नहीं किया गया। क्रेमलिन ने भी इस कथित दौरे पर कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं की है। यही चुप्पी इस पूरे घटनाक्रम को और रहस्यमय बनाती है।
देखा जाये तो यह सब ऐसे समय हो रहा है जब डोनाल्ड ट्रंप के व्हाइट हाउस लौटने के बाद अमेरिका और रूस के बीच संपर्क बढ़े हैं। ट्रंप ने सत्ता में वापसी के साथ ही यूक्रेन युद्ध समाप्त कराने के लिए बातचीत का वादा किया था। उनके शांति दूत स्टीव विटकॉफ और जेरेड कुशनर मॉस्को के कई दौरे कर चुके हैं, लेकिन रूस और यूक्रेन के बीच सबसे बड़ा गतिरोध अब भी क्षेत्रीय नियंत्रण को लेकर बना हुआ है। दोनों पक्षों के बीच जमीन के सवाल पर खाई इतनी गहरी है कि अब तक कोई निर्णायक सफलता नहीं मिली। इस सप्ताह उनकी प्रस्तावित यूक्रेन यात्रा भी टल गई।
ऐसे में जॉन रैटक्लिफ की कथित मॉस्को यात्रा सिर्फ एक खुफिया संपर्क नहीं, बल्कि युद्ध के खतरनाक मोड़ पर पहुंचने की आशंका का संकेत भी हो सकती है। अगर परमाणु विकल्प की चर्चा और पश्चिमी सहयोगियों को निशाना बनाने की आशंका के बीच वास्तव में अमेरिका को सीधे हस्तक्षेप करना पड़ा है, तो यह साफ है कि यूक्रेन युद्ध अब केवल मोर्चों पर नहीं लड़ा जा रहा। असली जंग अब खुफिया सूचनाओं, कूटनीतिक चेतावनियों और उस एक फैसले को रोकने की कोशिश में है, जो पूरे संघर्ष को एक नए और कहीं अधिक विनाशकारी दौर में धकेल सकता है।