हार्मुज स्ट्रेट और बाब अल-मंदेब तेल मार्ग खतरे में, भारत के लिए 'संकटमोचक' बना ओमान का सोहर पोर्ट

पश्चिम एशिया में चल रहे भीषण भू-राजनीतिक संघर्ष का असर अब वैश्विक अर्थव्यवस्था और सप्लाई चेन पर साफ दिखने लगा है। अमेरिका और ईरान के बीच छिड़ी जंग और यमन के हूती विद्रोहियों के आक्रामक रुख ने दुनिया की धड़कनें बढ़ा दी हैं। इस संकट के बीच ओमान का ...

Sep 20, 2026 - 10:53
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हार्मुज स्ट्रेट और बाब अल-मंदेब तेल मार्ग खतरे में, भारत के लिए 'संकटमोचक' बना ओमान का सोहर पोर्ट

oman sohar port पश्चिम एशिया में चल रहे भीषण भू-राजनीतिक संघर्ष का असर अब वैश्विक अर्थव्यवस्था और सप्लाई चेन पर साफ दिखने लगा है। अमेरिका और ईरान के बीच छिड़ी जंग और यमन के हूती विद्रोहियों के आक्रामक रुख ने दुनिया की धड़कनें बढ़ा दी हैं। इस संकट के बीच ओमान का सोहर पोर्ट भारत के लिए संकटमोचक के रूप उभरा है।

 

दो सबसे बड़े समुद्री मार्ग संकट में

दुनिया की शिपिंग और एनर्जी सप्लाई के लिए दो सबसे महत्वपूर्ण रास्ते माने जाने वाले स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) और बाब अल-मंदेब (Bab al-Mandeb) इस समय युद्ध की चपेट में हैं।

 

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज: अमेरिका और ईरान के बीच इस सामरिक मार्ग पर नियंत्रण को लेकर जंग छिड़ी हुई है। ईरान ने इस रास्ते से गुजरने वाले जहाजों पर टोल लगा दिया है और दुश्मन देशों के लिए इसे लगभग बंद कर दिया है, जिससे यह रूट शिपिंग कंपनियों के लिए बेहद खतरनाक हो गया है।

 

बाब अल-मंदेब: यमन के हूती विद्रोहियों ने सऊदी अरब पर हमले तेज कर कई रणनीतिक इलाकों पर कब्जा कर लिया है। इस वजह से दुनिया के करीब 10 फीसदी कच्चे तेल की ढुलाई वाले इस मार्ग पर भी उनका नियंत्रण सा हो गया है।

 

क्यों खास है सोहर पोर्ट?

ओमान के उत्तर-पूर्वी तट पर स्थित सोहर पोर्ट सीधे होर्मुज जलडमरूमध्य के अंदर नहीं आता है। वर्तमान तनाव को देखते हुए इसे एक सुरक्षित वैकल्पिक लॉजिस्टिक्स हब के रूप में देखा जा रहा है।

 

यूएई रेल नेटवर्क से जुड़ाव: इस पोर्ट को संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के रेल नेटवर्क से जोड़ने का काम भी शुरू हो गया है, जिससे सीमा-पार माल और तेल की ढुलाई बेहद आसान हो जाएगी।

रणनीतिक स्थिति: इससे पहले ओमान ने भारत को दुक्म और सलालाह बंदरगाहों की पेशकश की थी, लेकिन उत्तर-पूर्वी ओमान में स्थित होने के कारण सोहर भारत की जरूरतों के लिए कहीं अधिक उपयुक्त है, क्योंकि यह यूएई की तेल पाइपलाइनों और पूर्वी सऊदी अरब के भी नजदीक है।

 

वैश्विक सप्लाई चेन में आ रहे इस बड़े बदलाव के बीच ओमान का यह कदम भारत की ऊर्जा सुरक्षा और व्यापारिक हितों के लिहाज से बेहद अहम साबित होने वाला है।