शरीर के हर अंग को प्रभावित करता है जंगल की आग का धुआं
शोधकर्ता अब इंसान की सेहत पर जंगल के धुएं के लंबे समय तक पड़ने वाले असर को समझने लगे हैं। और सच कहें, तो यह काफी डरावना है। अटलांटा की एमोरी यूनिवर्सिटी में पर्यावरण स्वास्थ्य के प्रोफेसर यांग लियू का कहना है, "यह धुआं आपके पूरे शरीर को प्रभावित करता ...
नाओमी मिहारा
शोधकर्ता अब इंसान की सेहत पर जंगल के धुएं के लंबे समय तक पड़ने वाले असर को समझने लगे हैं। और सच कहें, तो यह काफी डरावना है। अटलांटा की एमोरी यूनिवर्सिटी में पर्यावरण स्वास्थ्य के प्रोफेसर यांग लियू का कहना है, "यह धुआं आपके पूरे शरीर को प्रभावित करता है। यह शरीर में ऑक्सीडेटिव तनाव (अंदरूनी क्षति) पैदा करता है और बीमारियों को बहुत तेजी से बढ़ाता है या उनके होने की रफ्तार तेज कर देता है।” ALSO READ: इसराइली मंत्री के "टारगेट किलिंग" वाले बयान पर उबाल
जनवरी 2026 में इससे जुड़ा एक अध्ययन प्रकाशित हुआ है। इसमें यांग लियू और दूसरे शोधकर्ताओं ने पाया कि कम मात्रा में भी बार-बार धुएं के संपर्क में आने से बुजुर्गों में स्ट्रोक का खतरा बढ़ जाता है। एक महीने बाद, एक और अध्ययन में पाया गया कि 2006 और 2020 के बीच अमेरिका में जंगल की आग के धुएं के लंबे समय तक संपर्क में रहने से हर साल औसतन 24,100 लोगों की मौत हुई।
वनाग्नि के धुएं में कई तरह के खतरनाक और जहरीले वायु प्रदूषक घुले होते हैं। लेकिन इनमें से सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचाने वाला तत्व धूल और धुएं के अतिसूक्ष्म कण होते हैं, जिन्हें पार्टिकुलेट मैटर, पीएम2।5 कहा जाता है।
पीएम2.5 राख, धूल और अन्य पदार्थों से बना होता है, जो स्पंज की तरह काम करता है और जहरीली धातुओं व ऑर्गेनिक कंपाउंड को अपने अंदर सोख लेता है। सांस के जरिए शरीर में घुसने पर पीएम2.5 के ये कण फेफड़ों और खून की नसों तक पहुंच जाते हैं। वहां से ये शरीर के बाकी अंगों में जलन, सूजन और भारी नुकसान पहुंचाते हैं।
लंबे समय तक पीएम2.5 के संपर्क में रहने से अस्थमा जैसी फेफड़ों की बीमारियों के साथ-साथ दिल की बीमारी, डायबिटीज, डिमेंशिया और कैंसर का खतरा भी बढ़ सकता है।
जंगल की आग का धुआं गर्भवती महिलाओं के लिए खास तौर पर खतरनाक होता है। इससे समय से पहले बच्चे के जन्म और जन्म के समय बच्चे का वजन कम होने का खतरा बढ़ सकता है। ALSO READ: जलवायु परिवर्तन से बचने के लिए जर्मन शहर ने उठाए कदम
जंगल की आग के धुएं में मौजूद पीएम 2.5 इतना जहरीला क्यों होता है?
जंगल की आग से निकलने वाला पीएम 2.5 बहुत ज्यादा जहरीला होता है, क्योंकि इसमें जलने वाली कई चीजों का मिश्रण होता है। गांव, देहात के जंगलों की आग और शहरों तक फैलने वाली आग में जलने वाली चीजें अलग होती हैं। इसलिए, इनका असर भी बदल जाता है।
हार्वर्ड टीएच चान स्कूल ऑफ पब्लिक हेल्थ के एनवायर्नमेंटल हेल्थ डिपार्टमेंट में प्रिंसिपल रिसर्च साइंटिस्ट मैरी जॉनसन का कहना है, "यह पूरी तरह इस बात पर निर्भर करता है कि आग कहां लगी है। यहां तक कि एक ही शहर के अलग अलग मोहल्लों में भी धुएं का असर बदल सकता है, क्योंकि इसमें घुले तत्व अलग अलग हो सकते हैं।”
मैरी जॉनसन ने एक अंतरराष्ट्रीय टीम का नेतृत्व किया, जिसने हाल ही में वनाग्नि के धुएं के संपर्क में आए स्वस्थ दमकलकर्मियों और आम नागरिकों पर धुएं के जहरीले असर का अध्ययन किया। वे यह समझना चाहते थे कि ये जहरीले तत्व हमारी रोग प्रतिरोधक क्षमता को कैसे नुकसान पहुंचाते हैं और शरीर को संक्रमणों व पुरानी बीमारियों के प्रति कितना संवेदनशील बना देते हैं।
शोधकर्ताओं को इसमें पारा और कैडमियम जैसी जहरीली धातुएं मिलीं, जो कुदरती रूप से पौधों और मिट्टी में पाई जाती हैं और ये इंसान की बनाई चीजों में भी होती हैं। इसके अलावा, उन्हें कैंसर पैदा करने वाले तत्व और कभी न खत्म होने वाले केमिकल भी मिले, जिन्हें ‘फॉरएवर केमिकल्स' या पीफास कहा जाता है।
पीफास इंसानों द्वारा बनाए गए रसायन (सिंथेटिक केमिकल) हैं, जिनका इस्तेमाल रोजमर्रा की कई चीजों और निर्माण सामग्री में होता है। इन्हें कई तरह के कैंसर और मेटाबॉलिज्म से जुड़ी बीमारियों से जोड़कर देखा जाता है।
इन नतीजों के आधार पर शोधकर्ताओं ने सुझाव दिया कि भविष्य में किए जाने वाले शोध में बच्चों, बुजुर्गों और पुरानी बीमारियों से जूझ रहे लोगों जैसे संवेदनशील वर्गों के लिए इलाज ढूंढने पर ध्यान दिया जाना चाहिए। ALSO READ: मानसून का बदलता पैटर्न बढ़ा रहा भारत का जलवायु संकट
समय और दूरी के साथ ज्यादा घातक हो जाता है जंगल की आग का धुआं
जंगल की आग का धुआं हवा में जितने ज्यादा समय तक रहता है, उतना ही जहरीला होता जाता है। वक्त के साथ इसमें ऐसे केमिकल रिएक्शन होते हैं कि यह हमारे शरीर की कोशिकाओं को और भी बुरी तरह से नुकसान पहुंचाने लगता है।
ग्रीस के शोधकर्ताओं ने पाया कि आग लगने के अगले कुछ दिनों में धुआं चार गुना तक ज्यादा जहरीला हो सकता है। यह लंबी दूरी भी तेजी से तय कर सकता है और जहां आग लगी थी, वहां से हजारों मील दूर के इलाकों में भी फैल सकता है।
नेशनल ऑब्जर्वेटरी ऑफ एथेंस के इंस्टीट्यूट फॉर एनवायर्नमेंटल रिसर्च एंड सस्टेनेबल डेवलपमेंट के निदेशक निकोलॉस मिहालोपोलोस ने बताया, "अगर इन कणों को साफ करने के लिए बारिश न हो, तो ये हवा में दस दिन या उससे भी ज्यादा समय तक बने रह सकते हैं। इतने समय में ये पूरे गोलार्ध का चक्कर लगाकर वापस अपनी शुरुआत वाली जगह पर आ सकते हैं।”
उदाहरण के लिए, 2023 में कनाडा के जंगलों में 6,000 जगहों पर लगी आग से 1.5 करोड़ हेक्टेयर जमीन जल गई थी। इसकी वजह से "दूर तक फैलने वाला पीएम2.5 प्रदूषण” पूरे उत्तरी अमेरिका में फैल गया और यहां तक कि यूरोप और एशिया तक पहुंच गया था।
सितंबर 2025 में प्रकाशित एक शोध में शोधकर्ताओं ने अनुमान लगाया कि 2023 में कनाडा के जंगलों में लगी आग से निकले पीएम2।5 के संपर्क में आने के कारण उत्तरी अमेरिका में करीब 5,400 लोगों की अचानक मौत हुई। वहीं, उत्तरी अमेरिका व यूरोप में करीब 64,300 लोगों की लंबी बीमारी के कारण मौत हो सकती है।
हालांकि, यह ध्यान देने वाली बात है कि वायु प्रदूषण के अन्य स्रोत, जैसे कि गाड़ियों से निकलने वाला धुआं, उद्योगों से होने वाला उत्सर्जन और खाना पकाने के लिए ईंधन जलाना, कुल मिलाकर ज्यादा स्वास्थ्य समस्याओं का कारण बनते हैं, क्योंकि लोग रोजाना इनके संपर्क में आते हैं।
बार्सिलोना इंस्टीट्यूट फॉर ग्लोबल हेल्थ की एनवायर्नमेंटल एपिडेमियोलॉजिस्ट कैथरीन टोन कहती हैं, "जब हम यह देखते हैं कि पूरी आबादी में मौत की मुख्य वजह क्या है, तो पता चलता है कि वायु प्रदूषण के ये बाकी दूसरे स्रोत ही असल में इतनी मौतों के लिए जिम्मेदार हैं।” ALSO READ: पृथ्वी पर ऑक्सीजन की उत्पत्ति की पहेली थोड़ी और सुलझी
वनाग्नि के धुएं से खुद को कैसे बचाएं
जंगल की आग का धुआं बहुत जहरीला होता है, खासकर उन लोगों के लिए जो आग लगने की आशंका वाले इलाकों के पास रहते हैं। बतौर जॉनसन, "आप धुएं से बचने के लिए जितना प्रयास करेंगे, उतना ही अच्छा होगा।”
उनकी सलाह है कि आग के दौरान और उसके तुरंत बाद घर के अंदर रहें, हीटिंग और एयर कंडीशनिंग सिस्टम में फिल्टर का इस्तेमाल करें, अपने पास एन95 मास्क रखें और यह ध्यान रखें कि बीमार या संवेदनशील लोगों को उनकी दवाइयां और इनहेलर आसानी से उपलब्ध हों।
आग का मौसम शुरू होने से पहले, लोगों को अपने घर और जमीन से आग पकड़ने वाली चीजों को हटा देना चाहिए। साथ ही, आस-पड़ोस में ऐसे निगरानी समूह बनाने चाहिए जो आग के शुरुआती संकेतों पर नजर रखें और छोटी आग को बड़ी तबाही में तब्दील होने से रोकने में मदद करे।



