नालंदा में मक्का और सब्जियों को भारी नुकसान:आंधी और ओलावृष्टि से किसानों की उम्मीदों पर फिरा पानी; बिहारशरीफ में सबसे ज्यादा असर

नालंदा जिले में शनिवार की शाम मौसम के बदले मिजाज ने किसानों की कमर तोड़कर रख दी है। तेज आंधी और मूसलाधार बारिश के साथ भीषण ओलावृष्टि ने खेतों में लहलहाती फसलों को मलबे में तब्दील कर दिया है। इस प्राकृतिक आपदा की सबसे भीषण मार मक्का और लत्तरवाली सब्जियों पर पड़ी है, जिससे किसानों के सामने अब आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। अपनी आंखों के सामने मेहनत की कमाई को बर्बाद होते देख किसान बेबस और लाचार नजर आ रहे हैं। शनिवार की शाम आसमान में उमड़े काले बादलों के बाद शुरू हुए तांडव ने सबसे ज्यादा नुकसान कद्दू, नेनुआ, झिंगनी, खीरा और परोर जैसी सब्जी फसलों को पहुंचाया है। ओले की सीधी चोट से सब्जियों के कोमल फूल और पत्तियां पूरी तरह नष्ट हो गई हैं, जिसका सीधा असर आने वाले समय में उत्पादन पर पड़ेगा। खेतों में तैयार हो रही मक्के की फसल भी मौसम की मार से नहीं बच सकी। तेज हवा के झोंकों ने मक्के के पौधों को जड़ से उखाड़कर खेतों में बिछा दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि दाने लगने के समय पौधों के गिरने से पैदावार में भारी गिरावट आएगी, जिससे किसानों को तगड़ा आर्थिक झटका लगा है। आम के बगीचों को भी नुकसान बागवानों की स्थिति तो और भी दयनीय हो गई है, जिनकी रही-सही उम्मीदें शनिवार की आंधी में उड़ गईं। इस साल पहले से ही खराब मौसम के कारण पेड़ों पर टिकोले कम बचे थे, लेकिन ताजा आंधी और ओलों ने बची-खुची 20 से 30 फीसदी फसल को भी जमीन पर गिरा दिया। अब आम के बागों में फलों की जगह सिर्फ पत्तियां ही नजर आ रही हैं। हालांकि, राहत की बात यह रही कि इस तबाही का असर पूरे जिले में एक समान नहीं दिखा। ओलावृष्टि और बारिश का मुख्य प्रकोप जिला मुख्यालय बिहारशरीफ और उसके आसपास के क्षेत्रों तक ही सीमित रहा, जबकि नूरसराय और परवलपुर जैसे ग्रामीण इलाकों में केवल तेज हवाएं चलकर शांत हो गईं, जिससे वहां के किसानों ने राहत की सांस ली है।

May 10, 2026 - 10:35
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नालंदा में मक्का और सब्जियों को भारी नुकसान:आंधी और ओलावृष्टि से किसानों की उम्मीदों पर फिरा पानी; बिहारशरीफ में सबसे ज्यादा असर
नालंदा जिले में शनिवार की शाम मौसम के बदले मिजाज ने किसानों की कमर तोड़कर रख दी है। तेज आंधी और मूसलाधार बारिश के साथ भीषण ओलावृष्टि ने खेतों में लहलहाती फसलों को मलबे में तब्दील कर दिया है। इस प्राकृतिक आपदा की सबसे भीषण मार मक्का और लत्तरवाली सब्जियों पर पड़ी है, जिससे किसानों के सामने अब आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। अपनी आंखों के सामने मेहनत की कमाई को बर्बाद होते देख किसान बेबस और लाचार नजर आ रहे हैं। शनिवार की शाम आसमान में उमड़े काले बादलों के बाद शुरू हुए तांडव ने सबसे ज्यादा नुकसान कद्दू, नेनुआ, झिंगनी, खीरा और परोर जैसी सब्जी फसलों को पहुंचाया है। ओले की सीधी चोट से सब्जियों के कोमल फूल और पत्तियां पूरी तरह नष्ट हो गई हैं, जिसका सीधा असर आने वाले समय में उत्पादन पर पड़ेगा। खेतों में तैयार हो रही मक्के की फसल भी मौसम की मार से नहीं बच सकी। तेज हवा के झोंकों ने मक्के के पौधों को जड़ से उखाड़कर खेतों में बिछा दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि दाने लगने के समय पौधों के गिरने से पैदावार में भारी गिरावट आएगी, जिससे किसानों को तगड़ा आर्थिक झटका लगा है। आम के बगीचों को भी नुकसान बागवानों की स्थिति तो और भी दयनीय हो गई है, जिनकी रही-सही उम्मीदें शनिवार की आंधी में उड़ गईं। इस साल पहले से ही खराब मौसम के कारण पेड़ों पर टिकोले कम बचे थे, लेकिन ताजा आंधी और ओलों ने बची-खुची 20 से 30 फीसदी फसल को भी जमीन पर गिरा दिया। अब आम के बागों में फलों की जगह सिर्फ पत्तियां ही नजर आ रही हैं। हालांकि, राहत की बात यह रही कि इस तबाही का असर पूरे जिले में एक समान नहीं दिखा। ओलावृष्टि और बारिश का मुख्य प्रकोप जिला मुख्यालय बिहारशरीफ और उसके आसपास के क्षेत्रों तक ही सीमित रहा, जबकि नूरसराय और परवलपुर जैसे ग्रामीण इलाकों में केवल तेज हवाएं चलकर शांत हो गईं, जिससे वहां के किसानों ने राहत की सांस ली है।