गयाजी का निखिल बना IFS ऑफिसर, देशभर में 66वां रैंक:पिता रिटायर्ड टीचर, बहन प्रखंड आपूर्ति पदाधिकारी; IAS अधिकारी बनने का है सपना

गयाजी के सरेबा निवासी निखिल कुमार ने जिले का नाम रोशन किया है। संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की भारतीय वन सेवा (IFS) परीक्षा में निखिल ने देशभर में 66वां स्थान हासिल किया है। दूसरे अटेम्प्ट में सफलता मिली है। निखिल को यह कामयाबी अचानक नहीं मिली। इसके पीछे वर्षों की मेहनत, संघर्ष और खुद पर अटूट भरोसे की कहानी छिपी है। पहले प्रयास में वे इंटरव्यू तक पहुंचे थे, लेकिन चयन नहीं हो सका। इसके बाद भी हार नहीं मानी। अपनी कमजोरियों पर काम किया, तैयारी को और धार दी। इसके बाद दूसरे प्रयास में शानदार सफलता हासिल कर ली। 21 लाख का पैकेज मिला था 12वीं तक की पढ़ाई डीएवी गयाजी से पूरी की। इसके बाद उनका चयन देश के प्रतिष्ठित संस्थान IIT दिल्ली में हुआ, जहां से उन्होंने बीटेक किया। IIT जैसी बड़ी उपलब्धि के बाद कॉरपोरेट दुनिया में आसान और आकर्षक करियर चुनना उनके लिए मुश्किल नहीं था। 21 लाख रुपए का सालाना जॉब पैकेज मिला था, लेकिन निखिल ने ठुकरा दिया। उन्होंने प्रशासनिक सेवा का सपना देखा और उसी दिशा में खुद को झोंक दिया। IAS अधिकारी बनने का सपना है भारतीय वन सेवा में चयन के बाद भी निखिल का कहना है कि उनका अंतिम सपना IAS अधिकारी बनना है। इसके लिए उनका प्रयास आगे भी जारी रहेगा। यही सोच उन्हें बाकी युवाओं से अलग बनाती है। बहन प्रखंड आपूर्ति पदाधिकारी निखिल के परिवार में शिक्षा और अनुशासन की मजबूत नींव रही है। पिता चंद्रभूषण सिंह गुरारु के सर्वोदय विद्या मंदिर प्लस टू विद्यालय से रिटायर्ड शिक्षक हैं। बड़ी बहन जमुई में प्रखंड आपूर्ति पदाधिकारी हैं, जबकि भाई भी IIT से पढ़ाई कर चुके हैं। वह भी दिल्ली में यूपीएससी की तैयारी में जुटा है। यानी घर का माहौल शुरू से ही पढ़ाई और लक्ष्य केंद्रित रहा। सफलता से पूरे क्षेत्र में खुशी की लहर पिता चंद्रभूषण सिंह ने बताया कि वह पहले भेल में शिक्षक थे। उस समय निखिल रांची के डीएवी स्कूल में पढ़ता था। जब वह पहली क्लास में था तो उसे गीता चैटिंग कंपटीशन में ले जाया गया था। इसके पीछे की वजह गीता के 52 श्लोक उसे कंठस्थ थे। वह शुरू से ही सीरियस स्टूडेंट्स रहा है। हर काम ईमानदारी और सीरियसनेस के साथ करता था। घर में सभी को भरोसे में लेकर कोई भी काम करता था। भाई-बहन के साथ खेला करता था। थोड़ा शांत स्वभाव का वह शुरू से रहा है। इसलिए उसके प्रति ज्यादा सीरियस होने की जरूरत कभी नहीं पड़ी।

May 10, 2026 - 10:35
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गयाजी का निखिल बना IFS ऑफिसर, देशभर में 66वां रैंक:पिता रिटायर्ड टीचर, बहन प्रखंड आपूर्ति पदाधिकारी; IAS अधिकारी बनने का है सपना
गयाजी के सरेबा निवासी निखिल कुमार ने जिले का नाम रोशन किया है। संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की भारतीय वन सेवा (IFS) परीक्षा में निखिल ने देशभर में 66वां स्थान हासिल किया है। दूसरे अटेम्प्ट में सफलता मिली है। निखिल को यह कामयाबी अचानक नहीं मिली। इसके पीछे वर्षों की मेहनत, संघर्ष और खुद पर अटूट भरोसे की कहानी छिपी है। पहले प्रयास में वे इंटरव्यू तक पहुंचे थे, लेकिन चयन नहीं हो सका। इसके बाद भी हार नहीं मानी। अपनी कमजोरियों पर काम किया, तैयारी को और धार दी। इसके बाद दूसरे प्रयास में शानदार सफलता हासिल कर ली। 21 लाख का पैकेज मिला था 12वीं तक की पढ़ाई डीएवी गयाजी से पूरी की। इसके बाद उनका चयन देश के प्रतिष्ठित संस्थान IIT दिल्ली में हुआ, जहां से उन्होंने बीटेक किया। IIT जैसी बड़ी उपलब्धि के बाद कॉरपोरेट दुनिया में आसान और आकर्षक करियर चुनना उनके लिए मुश्किल नहीं था। 21 लाख रुपए का सालाना जॉब पैकेज मिला था, लेकिन निखिल ने ठुकरा दिया। उन्होंने प्रशासनिक सेवा का सपना देखा और उसी दिशा में खुद को झोंक दिया। IAS अधिकारी बनने का सपना है भारतीय वन सेवा में चयन के बाद भी निखिल का कहना है कि उनका अंतिम सपना IAS अधिकारी बनना है। इसके लिए उनका प्रयास आगे भी जारी रहेगा। यही सोच उन्हें बाकी युवाओं से अलग बनाती है। बहन प्रखंड आपूर्ति पदाधिकारी निखिल के परिवार में शिक्षा और अनुशासन की मजबूत नींव रही है। पिता चंद्रभूषण सिंह गुरारु के सर्वोदय विद्या मंदिर प्लस टू विद्यालय से रिटायर्ड शिक्षक हैं। बड़ी बहन जमुई में प्रखंड आपूर्ति पदाधिकारी हैं, जबकि भाई भी IIT से पढ़ाई कर चुके हैं। वह भी दिल्ली में यूपीएससी की तैयारी में जुटा है। यानी घर का माहौल शुरू से ही पढ़ाई और लक्ष्य केंद्रित रहा। सफलता से पूरे क्षेत्र में खुशी की लहर पिता चंद्रभूषण सिंह ने बताया कि वह पहले भेल में शिक्षक थे। उस समय निखिल रांची के डीएवी स्कूल में पढ़ता था। जब वह पहली क्लास में था तो उसे गीता चैटिंग कंपटीशन में ले जाया गया था। इसके पीछे की वजह गीता के 52 श्लोक उसे कंठस्थ थे। वह शुरू से ही सीरियस स्टूडेंट्स रहा है। हर काम ईमानदारी और सीरियसनेस के साथ करता था। घर में सभी को भरोसे में लेकर कोई भी काम करता था। भाई-बहन के साथ खेला करता था। थोड़ा शांत स्वभाव का वह शुरू से रहा है। इसलिए उसके प्रति ज्यादा सीरियस होने की जरूरत कभी नहीं पड़ी।