अगर अब इजरायल ने हिजबुल्लाह को निशाना बनाकर लेबनान पर अटैक किया तो ईरान सीधे इजरायल पर हमला कर देगा। यह धमकी नहीं बल्कि अगली जंग का खुला ऐलान है। दरअसल, यह ऐलान किसी छोटे-मोटे लीडर की तरफ से नहीं बल्कि ईरान के फॉरेन मिनिस्टर सैयद अब्बास अरागची की तरफ से आया है। वो अब्बास अरागची जो पूरी दुनिया में ईरान की नुमाइंदगी करते हैं और ईरान अमेरिका डील के लिए चल रही बातचीत का हिस्सा भी हैं। देखा जाए तो फॉरेन मिनिस्टर सैयद अब्बास अरागची ईरान के सुप्रीम लीडर आयतुल्लाह मुजतबा खामनेई की बात को ही दोहरा रहे होंगे और ये इसराइल और अमेरिका के लिए सीधी और अंतिम धमकी है कि अगर अब लेबनान पर अटैक हुआ तो ईरान इसराइल को नहीं छोड़ेगा। ईरान के इरादे भांप कर ही हो सकता है। ट्रंप ने नेतन्याहू को बाकायदा फोन पर फटकार लगाई थी और पागल तक कह दिया था। क्योंकि अमेरिका जानता है कि हिजबुल्ला के लिए ईरान कुछ भी कर गुजरेगा।
एक इंटरव्यू में ट्रंप ने यह तक कह दिया है कि इसराइल का वजूद ही अमेरिका की वजह से बचा हुआ है। वह ना होते तो इसराइल का नामोनिशान ही मिट जाता। ऐसे में अब इसराइल पर सीधे हमले की धमकी के मायने को समझा जा सकता है। एक्सपर्ट कहते हैं कि दरअसल ईरान अब इस मोड़ में आ गया है कि तुम अगर एक थप्पड़ मारोगे तो मैं दो मारूंगा। पिछली बार थोपी गई जंग में उसने भयंकर पलटवार किया था। लेकिन इस बार इजरायल की लेबनान में किसी भी जुर्रत पर सीधा हमला कर सकता है। हाल ही में कुवैत में अमेरिका की पांचवी फ्लट के हेड क्वार्टर और बहरीन में अमेरिकी ठिकानों पर हमला करके ईरान ने अपने इरादे जता दिए हैं। फिलहाल तो प्रेसिडेंट ट्रंप के कहने पर इजरायल ने लेबनान पर हमले रोक दिए हैं। लेकिन ईरान की यह ताजा धमकी बता रही है कि वह किसी भी सूरत में अब इजरायल की किसी भी हरकत को माफ नहीं करेगा।
गौरतलब है कि ईरान, अमेरिका, इसराइल जंग में सीज फायर के बावजूद इसराइल, साउथ लेबनान पर हमले जारी रखे हुए था। वहीं हिजबुल्ला भी उसे लगातार जवाब दे रहा था। हालांकि पाकिस्तान में हुई सीजफायर टॉक से पहले ही ईरान ने कहा था कि जंगबंदी में लेबनान पर इजरायल के हमले भी बंद होने चाहिए। बावजूद इसके इजरायल नहीं मान रहा था। और अब ईरान का नया ऐलान कि लेबनान पर एक भी हमला इसराइल पर सीधे अटैक की वजह बनेगा। देखना होगा कि इजरायल और हिजबुल्ला के बीच कब तक यह जंगबंदी रहती है और अगर यह जरा भी टूटी तो इजरायल पर ईरान का कहर बरपेगा और अमेरिका और अरब देश इसे अच्छी तरह से समझ रहे हैं। मिडिल ईस्ट में अमेरिका हिमायती अरब देशों जिन्होंने अमेरिका की खातिर ईरान से पंगा लिया अपनी इज्जत वकार सब दांव पर लगा दिया। अब उन्हें अमेरिका ने अधर में छोड़ दिया है।