ईरान-अमेरिका युद्ध पर प्रधानमंत्री मोदी के भाषण के क्या मायने, कोविड से क्यों की तुलना
PM Modi Lok Sabha Speech: पश्चिमी एशिया में चल रहे ईरान और इजराइल, अमेरिका युद्ध पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के लोकसभा में दिए गए भाषण के कई मायने निकाले जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि जिस क्षेत्र में युद्ध हो रहा है वह दुनिया के दूसरे देशों के साथ ...
PM Modi Lok Sabha Speech: पश्चिमी एशिया में चल रहे ईरान और इजराइल, अमेरिका युद्ध पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के लोकसभा में दिए गए भाषण के कई मायने निकाले जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि जिस क्षेत्र में युद्ध हो रहा है वह दुनिया के दूसरे देशों के साथ हमारे व्यापार का भी एक महत्वपूर्ण रास्ता है। विशेष रूप से कच्चे तेल और गैस की हमारी जरूरतों का एक बड़ा हिस्सा यही क्षेत्र पूरा करता है। उन्होंने इसे वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए भी गंभीर संकट बताया है।
मोदी ने खाड़ी देशों में फंसे भारतीयों को लेकर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा- भारत की संसद से इस संकट को लेकर एकमत और एकजुट आवाज दुनिया में जानी चाहिए। पीएम ने कहा कि सरकार इस संकट से निपटने के लिए अल्पावधि, मध्यावधि और दीर्घकालिक रणनीति पर काम कर रही है, जैसा कि कोविड-19 के दौरान किया था। दरअसल, पीएम मोदी द्वारा इस युद्ध की तुलना 'कोविड-19' महामारी से की है, ऐसे में इसके गहरे रणनीतिक और आर्थिक मायने हैं।
युद्ध की तुलना कोविड महामारी से
प्रधानमंत्री ने युद्ध की तुलना कोविड से इसलिए की क्योंकि महामारी की तरह ही युद्ध का प्रभाव भी केवल युद्ध लड़ने वाले देशों तक सीमित नहीं रहता। जैसे कोरोना वायरस ने सरहदों को नहीं माना, वैसे ही आधुनिक युद्ध की लहरें पूरी दुनिया को संक्रमित करती हैं। कोविड की तरह युद्ध भी अनिश्चित है, कब खत्म होगा, यह कोई नहीं जानता। इससे ग्लोबल मार्केट में घबराहट फैलती है।
गुजरात में ही दिख रहा है असर
कोविड के दौरान दुनिया ने देखा था कि कैसे चीन या अन्य देशों से होने वाली सप्लाई रुकने से कारखानों में ताले लग गए थे। ताजा मामले में इसका असर प्रधानमंत्री मोदी के अपने राज्य गुजरात में देखने को मिल रहा है। सिरेमिक कारखानों में काम बंद हो गया है, टेक्सटाइल उद्योग पर भी इसका असर देखने को मिला है। यूपी और बिहार के मजदूर यहां से पलायन कर रहे हैं। लगभग यही हालात कोरोना के समय थे। हालांकि उस समय यातायात के साधन भी बंद थे।
शेयर बाजार से लेकर सर्राफा तक, सब पर असर
पश्चिम एशिया के इस युद्ध से शेयर बाजार से लेकर सर्राफा व्यवसाय भी प्रभावित हुआ है। एलपीजी और कॉमर्शियल गैस के दाम बढ़ गए हैं। आने वाले समय में यदि हालात नहीं सुधरे तो पेट्रोल और डीजल के दाम भी बढ़ाए जा सकते हैं। यदि ऐसा हुआ तो इसका सभी चीजों पर असर होगा। निश्चित ही महंगाई भी बढ़ेगी। कुल मिलाकर प्रधानमंत्री ने देशवासियों को यह संदेश देने का प्रयास किया है कि हालात नियंत्रण में हैं, घबराने की जरूरत नहीं है। इन हालात में थोड़ी-बहुत समस्याएं आती भी हैं तो धैर्य से रखना होगा।
पीएम मोदी का संकेत साफ है कि अगर ईरान के पास मौजूद यह समुद्री रास्ता बंद हुआ, तो दुनिया की तेल और गैस की सप्लाई वैसे ही ठप हो जाएगी जैसे लॉकडाउन के समय हुई थी। युद्ध के कारण बढ़ने वाली तेल की कीमतें एक ऐसे आर्थिक वायरस की तरह काम करेंगी जो हर गरीब और मध्यम वर्गीय परिवार की जेब पर असर डालेगी।
Edited by: Vrijendra Singh Jhala



