कानपुर में राष्ट्रीय लोक अदालत का बहिष्कार करेंगे वकील:प्रदेश स्तरीय सम्मेलन में 7 प्रस्तावों पर लगी मुहर, मांगे पूरी न होने तक एक दिन हड़ताल करेंगे
राष्ट्रीय लोक अदालत का कानपुर के अधिवक्ता बहिष्कार करेंगे। साथ ही प्रदेश भर के बार संघों से भी बहिष्कार करने की अपील की गई है। बार व लॉयर्स एसोसिएशन के संयुक्त तत्वाधान में आयोजित अधिवक्ताओं के प्रदेश स्तरीय सम्मेलन में दूसरे और आखिरी दिन प्रदेश के कई जिलों से सैकड़ों अधिवक्ताओं का हुजूम पहुंचा। सम्मेलन में वकीलों के मुकदमे गैर जनपद ट्रांसफर करने, हड़ताल की अंडरटेकिंग देने समेत 7 प्रस्ताव पर अधिवक्ताओं ने मुहर लगायी। साथ ही तय किया गया कि मांगे पूरी न होने तक प्रदेश के सभी अधिवक्ता सप्ताह में एक दिन हड़ताल पर रहेंगे। सम्मेलन के दौरान दूसरे दिन भी न्यायिक कार्य से विरत रहे, जिससे अदालतों में सन्नाटा पसरा है। दूर-दराज से आए वादकारियों को मुकदमों में तारीख लेकर वापस लौटना पड़ रहा है। कुछ अधिवक्ताओं ने रजिस्ट्री दफ्तर में पहुंचकर नारेबाजी करते हुए काम बंद करा दिया है। जिससे रजिस्ट्री कराने आए लोग वापस लौट रहे हैं। शुक्रवार को दूसरे दिन के प्रदेश स्तरीय सम्मेलन के तीसरे चरण की शुरुआत की गई। बार एसोसिएशन के अध्यक्ष योगेंद्र अवस्थी, महामंत्री बिनय मिश्रा, लायर्स एसोसिएशन के अधक्ष दिनेश वर्मा व महामंत्री राजीव यादव ने बाहर के जिलों से आए अधिवक्ताओं का स्वागत करते हुए उन्हें मंच पर स्थान दिया। विभिन्न जिलों से आए पदाधिकारियों ने अपने–अपने विचार रखे। प्रदेश से आए लगभग 58 जिलों से बार संघों के अध्यक्ष, महामंत्री एवं उनके प्रतिनिधियों ने न्यायपालिका द्वारा किए जाने वाले गैर जरुरी विधि के प्रतिकूल आदेशो को न मानने पर बल दिया गया। इसी के साथ सर्व सम्मति से यह भी तय किया गया कि 12 सितंबर को आयोजित की जाने वाली राष्ट्रीय लोक अदालत का भी पूरी तरह से बहिष्कार किया जायेगा। सभी प्रस्तावों को ध्वनि मत से पारित किया गया। कहा गया कि जब तक अधिवक्ताओ की मांगों को पूरा नही किया जाएगा, तब तक प्रदेश के सभी अधिवक्ता सप्ताह के प्रत्येक बुधवर को न्यायिक कार्य से विरत रहेगें। दूसरे दिन इन जनपदों से पहुंचे अधिवक्ता कौशांबी, हरदोई, रायबरेली, गाजियाबाद, हापुड़, इटावा, गोरखपुर, गाजीपुर, संत कबीर नगर, हरदोई, आजमगढ़, रामपुर, बिल्हौर, लालगंज, प्रतापगढ़, कानपुर देहात, महोबा, प्रयागराज, डेरापुर, से सैकड़ो की संख्या में अधिवक्ता सम्मेलन में पहुंचे । यह प्रस्ताव पास हुए 1- सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुपालन हेतु बार कौंसिल ऑफ इण्डिया, बार कौंसिल उ०प्र० एवं जनपद न्यायालय स्तर पर हड़ताल न किये जाने की अण्डरटेकिंग देने का दबाव बनाये जाने के सम्बन्ध में विचार। 2. एडवोकेट एक्ट 1961 में बार कौंसिल ऑफ इण्डिया द्वारा प्रस्तावित प्रस्तावित संशोधन बिल पर विचार।3. उच्च न्यायालय के द्वारा रिट सं० 12231 सन् 2025 में अधिवक्ता विरोधी निर्णय दिये जाने के सम्बन्ध में विचार। 4. अधिवक्ता सुरक्षा अधिनियम को उ०प्र० सरकार द्वारा शीघ्र लागू किये जाने के सम्बन्ध में विचार। 5. गोरखपुर बार एसोसिशन के दिवंगत अधिवक्ताओ को मुआवजा मिले। 6. न्यायपालिका के न्यायाधीशों की जवाबदेही के लिये एक न्यायिक आयोग का गठन किया जाये। 7. पश्चिमी जनपदो के लिये मेरठ जनपद में हाईकोर्ट बेंच की स्थापना की जाए
राष्ट्रीय लोक अदालत का कानपुर के अधिवक्ता बहिष्कार करेंगे। साथ ही प्रदेश भर के बार संघों से भी बहिष्कार करने की अपील की गई है। बार व लॉयर्स एसोसिएशन के संयुक्त तत्वाधान में आयोजित अधिवक्ताओं के प्रदेश स्तरीय सम्मेलन में दूसरे और आखिरी दिन प्रदेश के कई जिलों से सैकड़ों अधिवक्ताओं का हुजूम पहुंचा। सम्मेलन में वकीलों के मुकदमे गैर जनपद ट्रांसफर करने, हड़ताल की अंडरटेकिंग देने समेत 7 प्रस्ताव पर अधिवक्ताओं ने मुहर लगायी। साथ ही तय किया गया कि मांगे पूरी न होने तक प्रदेश के सभी अधिवक्ता सप्ताह में एक दिन हड़ताल पर रहेंगे। सम्मेलन के दौरान दूसरे दिन भी न्यायिक कार्य से विरत रहे, जिससे अदालतों में सन्नाटा पसरा है। दूर-दराज से आए वादकारियों को मुकदमों में तारीख लेकर वापस लौटना पड़ रहा है। कुछ अधिवक्ताओं ने रजिस्ट्री दफ्तर में पहुंचकर नारेबाजी करते हुए काम बंद करा दिया है। जिससे रजिस्ट्री कराने आए लोग वापस लौट रहे हैं। शुक्रवार को दूसरे दिन के प्रदेश स्तरीय सम्मेलन के तीसरे चरण की शुरुआत की गई। बार एसोसिएशन के अध्यक्ष योगेंद्र अवस्थी, महामंत्री बिनय मिश्रा, लायर्स एसोसिएशन के अधक्ष दिनेश वर्मा व महामंत्री राजीव यादव ने बाहर के जिलों से आए अधिवक्ताओं का स्वागत करते हुए उन्हें मंच पर स्थान दिया। विभिन्न जिलों से आए पदाधिकारियों ने अपने–अपने विचार रखे। प्रदेश से आए लगभग 58 जिलों से बार संघों के अध्यक्ष, महामंत्री एवं उनके प्रतिनिधियों ने न्यायपालिका द्वारा किए जाने वाले गैर जरुरी विधि के प्रतिकूल आदेशो को न मानने पर बल दिया गया। इसी के साथ सर्व सम्मति से यह भी तय किया गया कि 12 सितंबर को आयोजित की जाने वाली राष्ट्रीय लोक अदालत का भी पूरी तरह से बहिष्कार किया जायेगा। सभी प्रस्तावों को ध्वनि मत से पारित किया गया। कहा गया कि जब तक अधिवक्ताओ की मांगों को पूरा नही किया जाएगा, तब तक प्रदेश के सभी अधिवक्ता सप्ताह के प्रत्येक बुधवर को न्यायिक कार्य से विरत रहेगें। दूसरे दिन इन जनपदों से पहुंचे अधिवक्ता कौशांबी, हरदोई, रायबरेली, गाजियाबाद, हापुड़, इटावा, गोरखपुर, गाजीपुर, संत कबीर नगर, हरदोई, आजमगढ़, रामपुर, बिल्हौर, लालगंज, प्रतापगढ़, कानपुर देहात, महोबा, प्रयागराज, डेरापुर, से सैकड़ो की संख्या में अधिवक्ता सम्मेलन में पहुंचे । यह प्रस्ताव पास हुए 1- सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुपालन हेतु बार कौंसिल ऑफ इण्डिया, बार कौंसिल उ०प्र० एवं जनपद न्यायालय स्तर पर हड़ताल न किये जाने की अण्डरटेकिंग देने का दबाव बनाये जाने के सम्बन्ध में विचार। 2. एडवोकेट एक्ट 1961 में बार कौंसिल ऑफ इण्डिया द्वारा प्रस्तावित प्रस्तावित संशोधन बिल पर विचार।3. उच्च न्यायालय के द्वारा रिट सं० 12231 सन् 2025 में अधिवक्ता विरोधी निर्णय दिये जाने के सम्बन्ध में विचार। 4. अधिवक्ता सुरक्षा अधिनियम को उ०प्र० सरकार द्वारा शीघ्र लागू किये जाने के सम्बन्ध में विचार। 5. गोरखपुर बार एसोसिशन के दिवंगत अधिवक्ताओ को मुआवजा मिले। 6. न्यायपालिका के न्यायाधीशों की जवाबदेही के लिये एक न्यायिक आयोग का गठन किया जाये। 7. पश्चिमी जनपदो के लिये मेरठ जनपद में हाईकोर्ट बेंच की स्थापना की जाए