ऑनलाइन फार्मेसी के खिलाफ केमिस्टों का प्रदर्शन:मुजफ्फरनगर में डीप डिस्काउंट से कारोबार खत्म होने का आरोप

मुजफ्फरनगर में दवा विक्रेताओं ने ऑनलाइन फार्मेसी और कॉरपोरेट कंपनियों के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया। बुधवार को मुजफ्फरनगर जिला केमिस्ट एसोसिएशन के एक प्रतिनिधिमंडल ने कलेक्ट्रेट पहुंचकर सिटी मजिस्ट्रेट पंकज प्रकाश राठौर को प्रधानमंत्री के नाम संबोधित एक ज्ञापन सौंपा। केमिस्ट एसोसिएशन ने आरोप लगाया कि ऑनलाइन फार्मेसी प्लेटफॉर्म नियमों की अनदेखी कर दवाओं की बिक्री कर रहे हैं। इससे छोटे दवा विक्रेताओं का कारोबार प्रभावित हो रहा है और जनस्वास्थ्य पर भी गंभीर खतरा मंडरा रहा है। संगठन ने बताया कि बिना भौतिक सत्यापन के दवाओं की बिक्री से फर्जी प्रिस्क्रिप्शन का उपयोग बढ़ रहा है, जिससे एंटीबायोटिक्स और नशीली दवाओं की अनियंत्रित उपलब्धता समाज के लिए एक बड़ा खतरा बन रही है। ज्ञापन में यह भी कहा गया कि बड़े कॉरपोरेट घराने "डीप डिस्काउंट" देकर बाजार का संतुलन बिगाड़ रहे हैं। इसका सर्वाधिक प्रभाव ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों के छोटे मेडिकल स्टोर संचालकों पर पड़ रहा है। एसोसिएशन का दावा है कि यदि यह स्थिति जारी रही, तो लाखों छोटे दवा कारोबारियों की आजीविका संकट में पड़ जाएगी और भविष्य में आम लोगों के लिए दवाओं की उपलब्धता भी प्रभावित हो सकती है। जिला केमिस्ट एसोसिएशन ने केंद्र सरकार से मांग की है कि कोविड काल में लागू की गई अस्थायी अधिसूचनाओं को तुरंत समाप्त किया जाए। उन्होंने ई-फार्मेसी से संबंधित व्यवस्थाओं पर सख्त नियंत्रण लागू करने और दवा कारोबार में सभी के लिए समान अवसर सुनिश्चित करने हेतु एक नई नीति बनाने की भी अपील की। प्रतिनिधिमंडल ने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने उनकी मांगों पर शीघ्र निर्णय नहीं लिया, तो आंदोलन को और अधिक व्यापक किया जाएगा।

May 20, 2026 - 12:32
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ऑनलाइन फार्मेसी के खिलाफ केमिस्टों का प्रदर्शन:मुजफ्फरनगर में डीप डिस्काउंट से कारोबार खत्म होने का आरोप
मुजफ्फरनगर में दवा विक्रेताओं ने ऑनलाइन फार्मेसी और कॉरपोरेट कंपनियों के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया। बुधवार को मुजफ्फरनगर जिला केमिस्ट एसोसिएशन के एक प्रतिनिधिमंडल ने कलेक्ट्रेट पहुंचकर सिटी मजिस्ट्रेट पंकज प्रकाश राठौर को प्रधानमंत्री के नाम संबोधित एक ज्ञापन सौंपा। केमिस्ट एसोसिएशन ने आरोप लगाया कि ऑनलाइन फार्मेसी प्लेटफॉर्म नियमों की अनदेखी कर दवाओं की बिक्री कर रहे हैं। इससे छोटे दवा विक्रेताओं का कारोबार प्रभावित हो रहा है और जनस्वास्थ्य पर भी गंभीर खतरा मंडरा रहा है। संगठन ने बताया कि बिना भौतिक सत्यापन के दवाओं की बिक्री से फर्जी प्रिस्क्रिप्शन का उपयोग बढ़ रहा है, जिससे एंटीबायोटिक्स और नशीली दवाओं की अनियंत्रित उपलब्धता समाज के लिए एक बड़ा खतरा बन रही है। ज्ञापन में यह भी कहा गया कि बड़े कॉरपोरेट घराने "डीप डिस्काउंट" देकर बाजार का संतुलन बिगाड़ रहे हैं। इसका सर्वाधिक प्रभाव ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों के छोटे मेडिकल स्टोर संचालकों पर पड़ रहा है। एसोसिएशन का दावा है कि यदि यह स्थिति जारी रही, तो लाखों छोटे दवा कारोबारियों की आजीविका संकट में पड़ जाएगी और भविष्य में आम लोगों के लिए दवाओं की उपलब्धता भी प्रभावित हो सकती है। जिला केमिस्ट एसोसिएशन ने केंद्र सरकार से मांग की है कि कोविड काल में लागू की गई अस्थायी अधिसूचनाओं को तुरंत समाप्त किया जाए। उन्होंने ई-फार्मेसी से संबंधित व्यवस्थाओं पर सख्त नियंत्रण लागू करने और दवा कारोबार में सभी के लिए समान अवसर सुनिश्चित करने हेतु एक नई नीति बनाने की भी अपील की। प्रतिनिधिमंडल ने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने उनकी मांगों पर शीघ्र निर्णय नहीं लिया, तो आंदोलन को और अधिक व्यापक किया जाएगा।