गुरुग्राम में फर्जी डोमिसाइल सर्टिफिकेट रैकेट का दावा:दूसरे राज्यों के लोगों को बनाया हरियाणा निवासी; एडवोकेट ने खोली पोल
गुरुग्राम में हरियाणा का गलत तरीके से निवासी प्रमाण पत्र (डोमिसाइल) बनाने के मामले का खुलासा हुआ है। मेवात से सटे इलाकों में सक्रिय इस सिंडिकेट के जरिए दूसरे राज्यों के नागरिकों को अवैध तरीके से हरियाणा का स्थायी निवासी दिखाया जा रहा है। गुरुग्राम कोर्ट के वरिष्ठ एडवोकेट जगदीप श्योराण ने इस रैकेट का खुलासा किया है। उन्होंने इसकी शिकायत पुलिस, प्रशासन और सीएम विंडो पर भी की, लेकिन आरोपियों पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। जब सीएम विंडो की शिकायतों के समाधान बारे मुख्यमंत्री नायब सैनी से बात की, तो उन्होंने स्पष्ट कहा कि सीएम विंडो की शिकायतों को वे खुद देखते हैं, अगर कोई अधिकारी लापरवाही बरतता है, तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। हाल ही में गुरुग्राम से पकड़े गए बंगलादेश के नागरिकों के पास भी कई स्थानीय डॉक्यूमेंट मिले थे। जिससे राष्ट्रीय सुरक्षा को भी खतरा होने की आशंका रहती है। 15 साल पुराना रेजिडेंस दिखाने का खेल दरअसल दिल्ली और अन्य राज्यों के रहने वाले लोग मेवात सीमा से लगते गुरुग्राम के गांवों में आते हैं। वहां स्थानीय सरपंचों और दलालों के साथ मिलकर कागजी सांठगांठ की जाती है। नियमों को ताक पर रखकर, इन बाहरी लोगों को गांवों में पिछले 15 साल से लगातार रहने वाला निवासी (रेजिडेंट) घोषित कर दिया जाता है। इस फर्जी वेरिफिकेशन के आधार पर प्रशासनिक अधिकारी भी बिना किसी गहन जांच के उनका हरियाणा डोमिसाइल सर्टिफिकेट जारी कर देते हैं। जनकपुरी के व्यक्ति ने बनवाया डोमिसाइल एडवोकेट श्योराण ने हैरान करने वाले एक केस का हवाला देते हुए बताया कि दिल्ली के जनकपुरी के रहने वाले नितिन नंदा नाम के शख्स ने इसी तरीके से सांचोली गांव से डोमिसाइल बनवा लिया। जबकि जिस 15 साल की अवधि का निवास इस गांव में दिखाया गया है, उस दौरान वह दिल्ली के जनकपुरी में रहता था। उन्होंने दावा किया कि यह कोई इकलौता मामला नहीं है। इस तरह के फर्जीवाड़े के एक या दो नहीं, बल्कि अनगिनत केस लगातार सामने आ रहे हैं। गुरुग्राम यूनिवर्सिटी में रिजर्व सीट पर लिया एडमिशन के आधार पर गुरुग्राम यूनिवर्सिटी के लॉ कोर्स में दाखिला ले लिया। उसने हरियाणा के मूल निवासियों के लिए आरक्षित सीट पर अवैध रूप से कब्जा किया है। इस फर्जीवाड़े का सबसे ज्यादा असर हरियाणा के मूल छात्रों और युवाओं के भविष्य पर पड़ रहा है। यानि शिक्षा से लेकर सरकारी नौकरियों और योजनाओं तक, हरियाणा के युवाओं के हक को इस सिंडिकेट के जरिए लूटा जा रहा है। शिकायतों पर प्रशासन मौन, सीएम विंडो भी बेअसर उन्होंने प्रशासनिक तंत्र की सुस्ती पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने बताया कि हमने इस पूरे मामले की पुख्ता सबूतों के साथ पुलिस, जिला प्रशासन से लेकर मुख्यमंत्री की विशेष ‘सीएम विंडो’ तक लिखित शिकायत दर्ज कराई है, लेकिन धरातल पर अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है।" बार-बार गुहार लगाने के बाद भी सिंडिकेट के हौसले बुलंद हैं। सरपंच प्रतिनिधि बोले- जांच चल रही इस बारे में सांचोली गांव की सरपंच के प्रतिनिधि से बात की गई तो उन्होंने फोन पर बताया कि अधिकारियों द्वारा मामले की जांच की जा रही है। जब तक जांच पूरी नहीं हो जाती, वे इस बारे में कुछ कमेंट नहीं कर सकते। हालांकि ग्रामीणों का कहना है कि डोमिसाइल बनाने के मामले में नियमों की अनदेखी की गई है। लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों पर होगी कार्रवाई एक तरफ जहां पीड़ित पक्ष कार्रवाई न होने से निराश है, वहीं दूसरी तरफ गुरुग्राम में जिला लोक संपर्क एवं कष्ट निवारण समिति की बैठक में लोगों की समस्याएं सुनने पहुंचे मुख्यमंत्री नायब सैनी ने दावा कि वे स्वयं 'सीएम विंडो' पर आने वाली शिकायतों की नियमित मॉनिटरिंग करते हैं। सीएम नायब सैनी ने साफ शब्दों में चेतावनी दी कि जनता की शिकायतों के निपटारे में यदि कोई भी कर्मचारी या अधिकारी लापरवाही बरतता पाया गया, तो उसके खिलाफ तत्काल और सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।
गुरुग्राम में हरियाणा का गलत तरीके से निवासी प्रमाण पत्र (डोमिसाइल) बनाने के मामले का खुलासा हुआ है। मेवात से सटे इलाकों में सक्रिय इस सिंडिकेट के जरिए दूसरे राज्यों के नागरिकों को अवैध तरीके से हरियाणा का स्थायी निवासी दिखाया जा रहा है। गुरुग्राम कोर्ट के वरिष्ठ एडवोकेट जगदीप श्योराण ने इस रैकेट का खुलासा किया है। उन्होंने इसकी शिकायत पुलिस, प्रशासन और सीएम विंडो पर भी की, लेकिन आरोपियों पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। जब सीएम विंडो की शिकायतों के समाधान बारे मुख्यमंत्री नायब सैनी से बात की, तो उन्होंने स्पष्ट कहा कि सीएम विंडो की शिकायतों को वे खुद देखते हैं, अगर कोई अधिकारी लापरवाही बरतता है, तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। हाल ही में गुरुग्राम से पकड़े गए बंगलादेश के नागरिकों के पास भी कई स्थानीय डॉक्यूमेंट मिले थे। जिससे राष्ट्रीय सुरक्षा को भी खतरा होने की आशंका रहती है। 15 साल पुराना रेजिडेंस दिखाने का खेल दरअसल दिल्ली और अन्य राज्यों के रहने वाले लोग मेवात सीमा से लगते गुरुग्राम के गांवों में आते हैं। वहां स्थानीय सरपंचों और दलालों के साथ मिलकर कागजी सांठगांठ की जाती है। नियमों को ताक पर रखकर, इन बाहरी लोगों को गांवों में पिछले 15 साल से लगातार रहने वाला निवासी (रेजिडेंट) घोषित कर दिया जाता है। इस फर्जी वेरिफिकेशन के आधार पर प्रशासनिक अधिकारी भी बिना किसी गहन जांच के उनका हरियाणा डोमिसाइल सर्टिफिकेट जारी कर देते हैं। जनकपुरी के व्यक्ति ने बनवाया डोमिसाइल एडवोकेट श्योराण ने हैरान करने वाले एक केस का हवाला देते हुए बताया कि दिल्ली के जनकपुरी के रहने वाले नितिन नंदा नाम के शख्स ने इसी तरीके से सांचोली गांव से डोमिसाइल बनवा लिया। जबकि जिस 15 साल की अवधि का निवास इस गांव में दिखाया गया है, उस दौरान वह दिल्ली के जनकपुरी में रहता था। उन्होंने दावा किया कि यह कोई इकलौता मामला नहीं है। इस तरह के फर्जीवाड़े के एक या दो नहीं, बल्कि अनगिनत केस लगातार सामने आ रहे हैं। गुरुग्राम यूनिवर्सिटी में रिजर्व सीट पर लिया एडमिशन के आधार पर गुरुग्राम यूनिवर्सिटी के लॉ कोर्स में दाखिला ले लिया। उसने हरियाणा के मूल निवासियों के लिए आरक्षित सीट पर अवैध रूप से कब्जा किया है। इस फर्जीवाड़े का सबसे ज्यादा असर हरियाणा के मूल छात्रों और युवाओं के भविष्य पर पड़ रहा है। यानि शिक्षा से लेकर सरकारी नौकरियों और योजनाओं तक, हरियाणा के युवाओं के हक को इस सिंडिकेट के जरिए लूटा जा रहा है। शिकायतों पर प्रशासन मौन, सीएम विंडो भी बेअसर उन्होंने प्रशासनिक तंत्र की सुस्ती पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने बताया कि हमने इस पूरे मामले की पुख्ता सबूतों के साथ पुलिस, जिला प्रशासन से लेकर मुख्यमंत्री की विशेष ‘सीएम विंडो’ तक लिखित शिकायत दर्ज कराई है, लेकिन धरातल पर अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है।" बार-बार गुहार लगाने के बाद भी सिंडिकेट के हौसले बुलंद हैं। सरपंच प्रतिनिधि बोले- जांच चल रही इस बारे में सांचोली गांव की सरपंच के प्रतिनिधि से बात की गई तो उन्होंने फोन पर बताया कि अधिकारियों द्वारा मामले की जांच की जा रही है। जब तक जांच पूरी नहीं हो जाती, वे इस बारे में कुछ कमेंट नहीं कर सकते। हालांकि ग्रामीणों का कहना है कि डोमिसाइल बनाने के मामले में नियमों की अनदेखी की गई है। लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों पर होगी कार्रवाई एक तरफ जहां पीड़ित पक्ष कार्रवाई न होने से निराश है, वहीं दूसरी तरफ गुरुग्राम में जिला लोक संपर्क एवं कष्ट निवारण समिति की बैठक में लोगों की समस्याएं सुनने पहुंचे मुख्यमंत्री नायब सैनी ने दावा कि वे स्वयं 'सीएम विंडो' पर आने वाली शिकायतों की नियमित मॉनिटरिंग करते हैं। सीएम नायब सैनी ने साफ शब्दों में चेतावनी दी कि जनता की शिकायतों के निपटारे में यदि कोई भी कर्मचारी या अधिकारी लापरवाही बरतता पाया गया, तो उसके खिलाफ तत्काल और सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।