अररिया में कल्याण अधिकारियों ने काली पट्टी बांधकर काम किया:7 सूत्रीय मांगों को लेकर आंदोलन शुरू,मांगें नहीं मानी गईं तो सामूहिक अवकाश पर जाने की चेतावनी
अररिया में अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति कल्याण पदाधिकारी संघ (बिसवा) के आह्वान पर कल्याण संवर्ग के अधिकारियों ने सात सूत्रीय मांगों को लेकर आंदोलन शुरू कर दिया है। शुक्रवार को अररिया जिले के सभी प्रखंड और अनुमंडल कल्याण अधिकारियों ने काली पट्टी बांधकर शांतिपूर्ण विरोध जताया। हालांकि, विरोध के दौरान अधिकारियों ने अपने कार्यालयीय कार्य जारी रखे। संसाधनों की कमी से काम प्रभावित होने का आरोप संघ के अधिकारियों का कहना है कि राज्य की करीब 20 प्रतिशत अनुसूचित जाति एवं जनजाति आबादी के विकास की जिम्मेदारी कल्याण अधिकारियों पर है। इसके बावजूद मूलभूत संसाधनों की कमी और प्रशासनिक उपेक्षा के कारण अधिकारी अपने संवैधानिक दायित्वों का प्रभावी ढंग से निर्वहन नहीं कर पा रहे हैं। सरकार को पहले भी सौंप चुके हैं मांगों का पत्र अधिकारियों के मुताबिक, संघ की ओर से पहले भी जिला प्रशासन के माध्यम से सरकार और विभाग को मांगों से संबंधित पत्र दिया जा चुका है। विभागीय सचिव और मंत्री से मुलाकात कर भी समस्याओं और मांगों से अवगत कराया गया था। इसके बावजूद अब तक अपेक्षित सकारात्मक निर्णय नहीं होने पर आंदोलन का रास्ता अपनाया गया है। सात सूत्रीय मांगों को लेकर आंदोलन बिसवा की प्रमुख मांगों में अधिकारियों को मूलभूत संसाधन उपलब्ध कराना, अनधिकृत कार्रवाइयों से मुक्ति और नियमानुसार समय पर प्रोन्नति देना शामिल है। बिना सक्षम अनुशासनिक अधिकारी के शुरू की गई गैर-समानुपाती विभागीय कार्रवाइयों को रद्द करने की भी मांग की गई है। मुख्यालय प्रतिनियुक्ति में पारदर्शिता की मांग संघ ने मुख्यालय प्रतिनियुक्ति में पारदर्शिता बरतने और तीन साल की चक्रीय नीति लागू करने की मांग की है। इसके साथ ही अव्यवहारिक अनुश्रवण कोषांग को भंग करने की मांग भी रखी गई है। क्षेत्रीय दौरे के लिए वाहन या भत्ता मांगा कल्याण अधिकारियों ने क्षेत्रीय निरीक्षण और दौरे के लिए वाहन अथवा उचित भत्ता उपलब्ध कराने की मांग की है। विद्यालय और छात्रावास प्रबंधकों की नियुक्ति में हो रही देरी को दूर करने की भी मांग की गई है। राजपत्रित दर्जा और पारदर्शी तबादला नीति की मांग संघ ने संवर्ग नियमावली में सुधार कर अधिकारियों को राजपत्रित दर्जा देने तथा आसान और पारदर्शी स्थानांतरण नीति लागू करने की मांग की है। मांगें नहीं मानीं तो सामूहिक अवकाश की चेतावनी संघ के प्रदेश संयुक्त सचिव सह भरगामा प्रखंड कल्याण पदाधिकारी नरेश कुमार, अररिया के प्रखंड कल्याण पदाधिकारी प्रवीण कुमार, पलासी के प्रिंस कुमार, सिकटी के मनीष भारद्वाज, रानीगंज के कैसर आलम, अनुमंडल कल्याण पदाधिकारी अररिया रंजीत कुमार वर्मा और फारबिसगंज के बसंत कुमार ने संयुक्त रूप से कहा कि मांगों पर शीघ्र सकारात्मक निर्णय नहीं हुआ तो बिसवा राज्य स्तर पर सामूहिक अवकाश पर जाने को बाध्य होगा। अधिकारियों ने कहा कि आंदोलन फिलहाल शांतिपूर्ण तरीके से जारी रहेगा। मांगों की अनदेखी होने पर आंदोलन को और तेज किया जा सकता है।
अररिया में अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति कल्याण पदाधिकारी संघ (बिसवा) के आह्वान पर कल्याण संवर्ग के अधिकारियों ने सात सूत्रीय मांगों को लेकर आंदोलन शुरू कर दिया है। शुक्रवार को अररिया जिले के सभी प्रखंड और अनुमंडल कल्याण अधिकारियों ने काली पट्टी बांधकर शांतिपूर्ण विरोध जताया। हालांकि, विरोध के दौरान अधिकारियों ने अपने कार्यालयीय कार्य जारी रखे। संसाधनों की कमी से काम प्रभावित होने का आरोप संघ के अधिकारियों का कहना है कि राज्य की करीब 20 प्रतिशत अनुसूचित जाति एवं जनजाति आबादी के विकास की जिम्मेदारी कल्याण अधिकारियों पर है। इसके बावजूद मूलभूत संसाधनों की कमी और प्रशासनिक उपेक्षा के कारण अधिकारी अपने संवैधानिक दायित्वों का प्रभावी ढंग से निर्वहन नहीं कर पा रहे हैं। सरकार को पहले भी सौंप चुके हैं मांगों का पत्र अधिकारियों के मुताबिक, संघ की ओर से पहले भी जिला प्रशासन के माध्यम से सरकार और विभाग को मांगों से संबंधित पत्र दिया जा चुका है। विभागीय सचिव और मंत्री से मुलाकात कर भी समस्याओं और मांगों से अवगत कराया गया था। इसके बावजूद अब तक अपेक्षित सकारात्मक निर्णय नहीं होने पर आंदोलन का रास्ता अपनाया गया है। सात सूत्रीय मांगों को लेकर आंदोलन बिसवा की प्रमुख मांगों में अधिकारियों को मूलभूत संसाधन उपलब्ध कराना, अनधिकृत कार्रवाइयों से मुक्ति और नियमानुसार समय पर प्रोन्नति देना शामिल है। बिना सक्षम अनुशासनिक अधिकारी के शुरू की गई गैर-समानुपाती विभागीय कार्रवाइयों को रद्द करने की भी मांग की गई है। मुख्यालय प्रतिनियुक्ति में पारदर्शिता की मांग संघ ने मुख्यालय प्रतिनियुक्ति में पारदर्शिता बरतने और तीन साल की चक्रीय नीति लागू करने की मांग की है। इसके साथ ही अव्यवहारिक अनुश्रवण कोषांग को भंग करने की मांग भी रखी गई है। क्षेत्रीय दौरे के लिए वाहन या भत्ता मांगा कल्याण अधिकारियों ने क्षेत्रीय निरीक्षण और दौरे के लिए वाहन अथवा उचित भत्ता उपलब्ध कराने की मांग की है। विद्यालय और छात्रावास प्रबंधकों की नियुक्ति में हो रही देरी को दूर करने की भी मांग की गई है। राजपत्रित दर्जा और पारदर्शी तबादला नीति की मांग संघ ने संवर्ग नियमावली में सुधार कर अधिकारियों को राजपत्रित दर्जा देने तथा आसान और पारदर्शी स्थानांतरण नीति लागू करने की मांग की है। मांगें नहीं मानीं तो सामूहिक अवकाश की चेतावनी संघ के प्रदेश संयुक्त सचिव सह भरगामा प्रखंड कल्याण पदाधिकारी नरेश कुमार, अररिया के प्रखंड कल्याण पदाधिकारी प्रवीण कुमार, पलासी के प्रिंस कुमार, सिकटी के मनीष भारद्वाज, रानीगंज के कैसर आलम, अनुमंडल कल्याण पदाधिकारी अररिया रंजीत कुमार वर्मा और फारबिसगंज के बसंत कुमार ने संयुक्त रूप से कहा कि मांगों पर शीघ्र सकारात्मक निर्णय नहीं हुआ तो बिसवा राज्य स्तर पर सामूहिक अवकाश पर जाने को बाध्य होगा। अधिकारियों ने कहा कि आंदोलन फिलहाल शांतिपूर्ण तरीके से जारी रहेगा। मांगों की अनदेखी होने पर आंदोलन को और तेज किया जा सकता है।