अदालत की रोक के बावजूद जमीन का निबंधन, कांड दर्ज:बक्सर में गलत न्यायादेश-झूठे शपथ पत्र के आधार पर हुआ निबंधन

बक्सर जिला निबंधन कार्यालय में अदालत की रोक के बावजूद गलत सूचना और भ्रामक दस्तावेजों के आधार पर जमीन का निबंधन करने का गंभीर मामला सामने आया है। इस मामले में एसपीजीआरओ कार्यालय के आदेश पर अवर निबंधन कार्यालय बक्सर के प्रधान लिपिक ने नगर थाना बक्सर में प्राथमिकी (कांड संख्या 55/2026) दर्ज कराई है। यह मामला अनुमंडल लोक शिकायत निवारण कार्यालय, डुमरांव में सुनवाई के दौरान उजागर हुआ। जांच में यह स्पष्ट हुआ कि न्यायालय द्वारा बिक्री पर रोक लगी जमीन का निबंधन गलत तथ्यों और भ्रामक दस्तावेजों के आधार पर कर दिया गया। शिवजी राय ने किया था परिवाद दायर बक्सर के अर्जुनपुर निवासी शिवजी राय ने इस संबंध में परिवाद दायर किया था। उन्होंने आरोप लगाया कि डुमरांव मौजा के नया खाता संख्या 60, नया खेसरा संख्या 2013 की कुल 10.1562 डिसमिल जमीन की बिक्री आदा देवी द्वारा की गई। इस जमीन का निबंधन डुमरांव के हरीजी के हाता निवासी पियुष कुमार उपाध्याय और डुमरांव स्टेशन बाइपास रोड निवासी निर्भय राज के नाम कराया गया था। परिवाद में बताया गया कि उक्त जमीन पर अनुमंडलीय न्यायालय में वाद लंबित था, जिसके कारण जमीन की बिक्री पर रोक लगी हुई थी। 30 दिनों तक बिक्री पर था रोक इसके बावजूद, रोक सूची में दर्ज होने के बाद भी अवर निबंधन कार्यालय बक्सर द्वारा जमीन का निबंधन कर दिया गया। विक्रेता आदा देवी द्वारा जिला निबंधन कार्यालय में 29 जून 2024 को जारी एक आदेश की सत्यापित प्रति समर्पित की गई थी, जिसमें केवल 30 दिनों के लिए बिक्री पर रोक लगाए जाने का उल्लेख था। इसके साथ ही विक्रेता द्वारा एक शपथ पत्र भी दाखिल किया गया था, जिसमें यह घोषणा की गई थी कि अब उक्त जमीन पर किसी प्रकार की कोई कानूनी रोक या विवाद नहीं है। दस्तावेजों में भी यह दर्शाया गया था कि संपत्ति किसी भी न्यायालय में विवादित नहीं है। इन्हीं दस्तावेजों के आधार पर निबंधन प्रक्रिया पूरी कर दी गई। एसपीजीआरओ डुमरांव के समक्ष हुई सुनवाई हालांकि, बाद में शिवजी राय द्वारा एसपीजीआरओ कार्यालय को यह जानकारी दी गई कि प्रस्तुत किया गया न्यायादेश अपूर्ण और भ्रामक था तथा शपथ पत्र पूरी तरह झूठा था। इस गंभीर चूक को लेकर मामले की विधिवत सुनवाई एसपीजीआरओ डुमरांव के समक्ष हुई। आरोप है कि इन्हीं गलत और अधूरी जानकारियों के सहारे कार्यालय को दिग्भ्रमित कर निबंधन कराया गया। मामले को गंभीर मानते हुए एसपीजीआरओ ने निबंधन अधिनियम की धारा 82 के तहत दंडनीय अपराध मानते हुए संबंधित सभी पक्षों भूमि विक्रेता, खरीदार, पहचानकर्ता सहित के विरुद्ध कार्रवाई का आदेश दिया। इसके आलोक में जिला अवर निबंधन कार्यालय के प्रधान लिपिक के आवेदन पर नगर थाना बक्सर में कांड संख्या 55/2026 दर्ज की गई है। अब पुलिस पूरे मामले की जांच में जुट गई है।

Jan 29, 2026 - 11:44
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अदालत की रोक के बावजूद जमीन का निबंधन, कांड दर्ज:बक्सर में गलत न्यायादेश-झूठे शपथ पत्र के आधार पर हुआ निबंधन
बक्सर जिला निबंधन कार्यालय में अदालत की रोक के बावजूद गलत सूचना और भ्रामक दस्तावेजों के आधार पर जमीन का निबंधन करने का गंभीर मामला सामने आया है। इस मामले में एसपीजीआरओ कार्यालय के आदेश पर अवर निबंधन कार्यालय बक्सर के प्रधान लिपिक ने नगर थाना बक्सर में प्राथमिकी (कांड संख्या 55/2026) दर्ज कराई है। यह मामला अनुमंडल लोक शिकायत निवारण कार्यालय, डुमरांव में सुनवाई के दौरान उजागर हुआ। जांच में यह स्पष्ट हुआ कि न्यायालय द्वारा बिक्री पर रोक लगी जमीन का निबंधन गलत तथ्यों और भ्रामक दस्तावेजों के आधार पर कर दिया गया। शिवजी राय ने किया था परिवाद दायर बक्सर के अर्जुनपुर निवासी शिवजी राय ने इस संबंध में परिवाद दायर किया था। उन्होंने आरोप लगाया कि डुमरांव मौजा के नया खाता संख्या 60, नया खेसरा संख्या 2013 की कुल 10.1562 डिसमिल जमीन की बिक्री आदा देवी द्वारा की गई। इस जमीन का निबंधन डुमरांव के हरीजी के हाता निवासी पियुष कुमार उपाध्याय और डुमरांव स्टेशन बाइपास रोड निवासी निर्भय राज के नाम कराया गया था। परिवाद में बताया गया कि उक्त जमीन पर अनुमंडलीय न्यायालय में वाद लंबित था, जिसके कारण जमीन की बिक्री पर रोक लगी हुई थी। 30 दिनों तक बिक्री पर था रोक इसके बावजूद, रोक सूची में दर्ज होने के बाद भी अवर निबंधन कार्यालय बक्सर द्वारा जमीन का निबंधन कर दिया गया। विक्रेता आदा देवी द्वारा जिला निबंधन कार्यालय में 29 जून 2024 को जारी एक आदेश की सत्यापित प्रति समर्पित की गई थी, जिसमें केवल 30 दिनों के लिए बिक्री पर रोक लगाए जाने का उल्लेख था। इसके साथ ही विक्रेता द्वारा एक शपथ पत्र भी दाखिल किया गया था, जिसमें यह घोषणा की गई थी कि अब उक्त जमीन पर किसी प्रकार की कोई कानूनी रोक या विवाद नहीं है। दस्तावेजों में भी यह दर्शाया गया था कि संपत्ति किसी भी न्यायालय में विवादित नहीं है। इन्हीं दस्तावेजों के आधार पर निबंधन प्रक्रिया पूरी कर दी गई। एसपीजीआरओ डुमरांव के समक्ष हुई सुनवाई हालांकि, बाद में शिवजी राय द्वारा एसपीजीआरओ कार्यालय को यह जानकारी दी गई कि प्रस्तुत किया गया न्यायादेश अपूर्ण और भ्रामक था तथा शपथ पत्र पूरी तरह झूठा था। इस गंभीर चूक को लेकर मामले की विधिवत सुनवाई एसपीजीआरओ डुमरांव के समक्ष हुई। आरोप है कि इन्हीं गलत और अधूरी जानकारियों के सहारे कार्यालय को दिग्भ्रमित कर निबंधन कराया गया। मामले को गंभीर मानते हुए एसपीजीआरओ ने निबंधन अधिनियम की धारा 82 के तहत दंडनीय अपराध मानते हुए संबंधित सभी पक्षों भूमि विक्रेता, खरीदार, पहचानकर्ता सहित के विरुद्ध कार्रवाई का आदेश दिया। इसके आलोक में जिला अवर निबंधन कार्यालय के प्रधान लिपिक के आवेदन पर नगर थाना बक्सर में कांड संख्या 55/2026 दर्ज की गई है। अब पुलिस पूरे मामले की जांच में जुट गई है।