'SC/ST समाज के लोगों की शिक्षा, रोजगार-सुरक्षा सरकार की प्राथमिकता':विभाग बोला- विकास के लिए 2752 करोड़ का बजट, हॉस्टल-स्कूल और अन्य सुविधा होगी बेहतर
बिहार सरकार अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति समाज के विकास के लिए लगातार काम कर रही है। शिक्षा, आवास, छात्रवृत्ति और सामाजिक सुरक्षा जैसे अहम क्षेत्रों में सरकार ने कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। इसे लेकर पटना में आज अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति कल्याण विभाग की ओर से पीसी हुई। विभाग के सचिव डॉ. संदीप कुमार आर. पुदकलकट्टी और मंत्री लखींद्र पासवान मौजूद रहे। उन्होंने बताया कि सरकार की प्राथमिकता है कि एससी-एसटी समाज के लोगों को शिक्षा, रोजगार और सुरक्षा के बेहतर अवसर मिलें, ताकि वे समाज की मुख्यधारा से जुड़ सकें। डॉ. पुदकलकट्टी ने बताया कि जनगणना 2011 के अनुसार बिहार की कुल आबादी में अनुसूचित जाति की हिस्सेदारी करीब 15.9 प्रतिशत और अनुसूचित जनजाति की 1.28 प्रतिशत है। राज्य में 22 अनुसूचित जातियां और 32 अनुसूचित जनजातियां अधिसूचित हैं। इसके अलावा कुछ विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूह भी बिहार में रहते हैं, जिनके लिए अलग-अलग योजनाएं चलाई जा रही हैं। वित्तीय वर्ष 2025-26 में विभाग का कुल बजट 2752 करोड़ वित्तीय वर्ष 2025-26 में विभाग का कुल बजट 2752 करोड़ रुपये से ज्यादा रखा गया है। यह पिछले साल से अधिक है। सरकार का कहना है कि इस बढ़े हुए बजट से छात्रावास, स्कूल और अन्य बुनियादी सुविधाओं के निर्माण में तेजी आएगी। शिक्षा के क्षेत्र में सरकार ने बड़ी पहल की है। राज्य में फिलहाल 91 आवासीय विद्यालय चल रहे हैं, जहां हजारों छात्र पढ़ाई कर रहे हैं। कई विद्यालयों को 10+2 तक अपग्रेड किया गया है, ताकि बच्चों को बेहतर शिक्षा मिल सके। दूर-दराज और ग्रामीण इलाकों के छात्रों के लिए छात्रावास की सुविधा भी उपलब्ध कराई जा रही है। छात्रों को मिल रही प्री-मैट्रिक और पोस्ट-मैट्रिक स्कॉलरशिप छात्रों को पढ़ाई में आर्थिक परेशानी न हो, इसके लिए प्री-मैट्रिक और पोस्ट-मैट्रिक स्कॉलरशिप दी जा रही है। यह राशि डीबीटी के जरिए सीधे छात्रों के बैंक खातों में भेजी जाती है। प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए भी सरकार मदद कर रही है। यूपीएससी, बीपीएससी जैसी परीक्षा के लिए छात्रों को प्रोत्साहन राशि दी जा रही है। साथ ही सामाजिक सुरक्षा के तहत अत्याचार निवारण कानून को सख्ती से लागू किया जा रहा है। पीड़ितों को सहायता दी जा रही है। मंत्री लखींद्र पासवान ने कहा कि इन योजनाओं से एससी-एसटी समाज के लोगों का जीवन स्तर बेहतर हो रहा है और वे आत्मनिर्भर बन रहे हैं।
बिहार सरकार अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति समाज के विकास के लिए लगातार काम कर रही है। शिक्षा, आवास, छात्रवृत्ति और सामाजिक सुरक्षा जैसे अहम क्षेत्रों में सरकार ने कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। इसे लेकर पटना में आज अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति कल्याण विभाग की ओर से पीसी हुई। विभाग के सचिव डॉ. संदीप कुमार आर. पुदकलकट्टी और मंत्री लखींद्र पासवान मौजूद रहे। उन्होंने बताया कि सरकार की प्राथमिकता है कि एससी-एसटी समाज के लोगों को शिक्षा, रोजगार और सुरक्षा के बेहतर अवसर मिलें, ताकि वे समाज की मुख्यधारा से जुड़ सकें। डॉ. पुदकलकट्टी ने बताया कि जनगणना 2011 के अनुसार बिहार की कुल आबादी में अनुसूचित जाति की हिस्सेदारी करीब 15.9 प्रतिशत और अनुसूचित जनजाति की 1.28 प्रतिशत है। राज्य में 22 अनुसूचित जातियां और 32 अनुसूचित जनजातियां अधिसूचित हैं। इसके अलावा कुछ विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूह भी बिहार में रहते हैं, जिनके लिए अलग-अलग योजनाएं चलाई जा रही हैं। वित्तीय वर्ष 2025-26 में विभाग का कुल बजट 2752 करोड़ वित्तीय वर्ष 2025-26 में विभाग का कुल बजट 2752 करोड़ रुपये से ज्यादा रखा गया है। यह पिछले साल से अधिक है। सरकार का कहना है कि इस बढ़े हुए बजट से छात्रावास, स्कूल और अन्य बुनियादी सुविधाओं के निर्माण में तेजी आएगी। शिक्षा के क्षेत्र में सरकार ने बड़ी पहल की है। राज्य में फिलहाल 91 आवासीय विद्यालय चल रहे हैं, जहां हजारों छात्र पढ़ाई कर रहे हैं। कई विद्यालयों को 10+2 तक अपग्रेड किया गया है, ताकि बच्चों को बेहतर शिक्षा मिल सके। दूर-दराज और ग्रामीण इलाकों के छात्रों के लिए छात्रावास की सुविधा भी उपलब्ध कराई जा रही है। छात्रों को मिल रही प्री-मैट्रिक और पोस्ट-मैट्रिक स्कॉलरशिप छात्रों को पढ़ाई में आर्थिक परेशानी न हो, इसके लिए प्री-मैट्रिक और पोस्ट-मैट्रिक स्कॉलरशिप दी जा रही है। यह राशि डीबीटी के जरिए सीधे छात्रों के बैंक खातों में भेजी जाती है। प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए भी सरकार मदद कर रही है। यूपीएससी, बीपीएससी जैसी परीक्षा के लिए छात्रों को प्रोत्साहन राशि दी जा रही है। साथ ही सामाजिक सुरक्षा के तहत अत्याचार निवारण कानून को सख्ती से लागू किया जा रहा है। पीड़ितों को सहायता दी जा रही है। मंत्री लखींद्र पासवान ने कहा कि इन योजनाओं से एससी-एसटी समाज के लोगों का जीवन स्तर बेहतर हो रहा है और वे आत्मनिर्भर बन रहे हैं।