Iran में युद्ध और दमन ने आम जनता का जीना दूभर किया, Nobel Laureate Narges Mohammadi का बयान

ईरान की प्रमुख मानवाधिकार कार्यकर्ता नरगिस मोहम्मदी ने कहा है कि पिछले डेढ़ साल से जारी युद्धों के बीच आर्थिक बदहाली और देश के भीतर बढ़ते दमन ने लोगों के लिए ‘‘सांस लेने की भी जगह नहीं छोड़ी है’’ और इस स्थिति की भारी कीमत आम ईरानियों को चुकानी पड़ रही है। नोबेल शांति पुरस्कार से सम्मानित 54 वर्षीय मोहम्मदी को इस वर्ष की शुरुआत में स्वास्थ्य कारणों से जेल से अस्थायी रूप से रिहा किया गया था। ‘एसोसिएटेड प्रेस’ (एपी) ने शुक्रवार को ईरान के बाहर से मोहम्मदी का साक्षात्कार किया।मोहम्मदी ने कहा कि युद्ध, बढ़ते आर्थिक दबाव और विरोध प्रदर्शनों के खिलाफ कठोर कार्रवाई के कारण ईरान के लोग कई तरह की परेशानियों का सामना कर रहे हैं। मोहम्मदी ने कहा, ‘‘मुझे यह कहते हुए दुख हो रहा है, लेकिन युद्ध शुरू होने के बाद पिछले कुछ महीनों और पिछले डेढ़ साल में हमने देखा है कि समाज में दमन काफी बढ़ गया है और अब आर्थिक दबाव तथा दमन ने लोगों के लिए सांस लेने की भी कोई जगह नहीं छोड़ी है। इसकी भारी कीमत लोगों को चुकानी पड़ रही है।’’ मोहम्मदी ने कहा, ‘‘अगर आप सड़कों पर निकलते हैं तो आपको लोगों के बीच प्रतिरोध, जागरूकता और अपने अधिकारों के लिए खड़े होने का उनका दृढ़ संकल्प साफ नजर आएगा।’’ उन्होंने कहा कि सरकार की ओर से दमन बढ़ा है, लेकिन युवा पीढ़ी के कई लोग ‘‘अपने अधिकारों को जानते हैं’’ और मजबूती से डटे हुए हैं।उन्होंने कहा, ‘‘और यही हमें उम्मीद देता है।’’ एसोसिएटेड प्रेस ने उनकी सुरक्षा के मद्देनजर ईरान की राजनीतिक स्थिति और नेतृत्व से जुड़े विशिष्ट सवाल नहीं पूछे। हालांकि, मोहम्मदी ने युद्ध की आम लोगों को चुकानी पड़ रही कीमत पर सामान्य रूप से अपनी बात रखी। मानवाधिकारों की वकालत के कारण कई बार जेल जा चुकीं नरगिस मोहम्मदी ने एपी को बताया कि दिसंबर में मशहद शहर में गिरफ्तारी के दौरान सुरक्षा बलों ने उन्हें कथित तौर पर बुरी तरह पीटा।उन्हें एक मानवाधिकार वकील की स्मृति में आयोजित कार्यक्रम में भाषण देने के दौरान गिरफ्तार किया गया था और उस रैली में शामिल होने पर साढ़े सात साल की सजा सुनाई गई। अब वह कुल 16 साल के कारावास और 100 से अधिक कोड़े की सजा का सामना कर रही हैं। वह एक मई को बेहोश हो गई थीं।करीब 10 दिन बाद जमानत पर रिहा किए जाने के बाद उन्हें तेहरान के एक अस्पताल ले जाया गया, जहां वह दो सप्ताह और रहीं।

Sep 20, 2026 - 10:54
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Iran में युद्ध और दमन ने आम जनता का जीना दूभर किया, Nobel Laureate Narges Mohammadi का बयान

ईरान की प्रमुख मानवाधिकार कार्यकर्ता नरगिस मोहम्मदी ने कहा है कि पिछले डेढ़ साल से जारी युद्धों के बीच आर्थिक बदहाली और देश के भीतर बढ़ते दमन ने लोगों के लिए ‘‘सांस लेने की भी जगह नहीं छोड़ी है’’ और इस स्थिति की भारी कीमत आम ईरानियों को चुकानी पड़ रही है। नोबेल शांति पुरस्कार से सम्मानित 54 वर्षीय मोहम्मदी को इस वर्ष की शुरुआत में स्वास्थ्य कारणों से जेल से अस्थायी रूप से रिहा किया गया था। ‘एसोसिएटेड प्रेस’ (एपी) ने शुक्रवार को ईरान के बाहर से मोहम्मदी का साक्षात्कार किया।

मोहम्मदी ने कहा कि युद्ध, बढ़ते आर्थिक दबाव और विरोध प्रदर्शनों के खिलाफ कठोर कार्रवाई के कारण ईरान के लोग कई तरह की परेशानियों का सामना कर रहे हैं। मोहम्मदी ने कहा, ‘‘मुझे यह कहते हुए दुख हो रहा है, लेकिन युद्ध शुरू होने के बाद पिछले कुछ महीनों और पिछले डेढ़ साल में हमने देखा है कि समाज में दमन काफी बढ़ गया है और अब आर्थिक दबाव तथा दमन ने लोगों के लिए सांस लेने की भी कोई जगह नहीं छोड़ी है। इसकी भारी कीमत लोगों को चुकानी पड़ रही है।’’ मोहम्मदी ने कहा, ‘‘अगर आप सड़कों पर निकलते हैं तो आपको लोगों के बीच प्रतिरोध, जागरूकता और अपने अधिकारों के लिए खड़े होने का उनका दृढ़ संकल्प साफ नजर आएगा।’’ उन्होंने कहा कि सरकार की ओर से दमन बढ़ा है, लेकिन युवा पीढ़ी के कई लोग ‘‘अपने अधिकारों को जानते हैं’’ और मजबूती से डटे हुए हैं।

उन्होंने कहा, ‘‘और यही हमें उम्मीद देता है।’’ एसोसिएटेड प्रेस ने उनकी सुरक्षा के मद्देनजर ईरान की राजनीतिक स्थिति और नेतृत्व से जुड़े विशिष्ट सवाल नहीं पूछे। हालांकि, मोहम्मदी ने युद्ध की आम लोगों को चुकानी पड़ रही कीमत पर सामान्य रूप से अपनी बात रखी। मानवाधिकारों की वकालत के कारण कई बार जेल जा चुकीं नरगिस मोहम्मदी ने एपी को बताया कि दिसंबर में मशहद शहर में गिरफ्तारी के दौरान सुरक्षा बलों ने उन्हें कथित तौर पर बुरी तरह पीटा।

उन्हें एक मानवाधिकार वकील की स्मृति में आयोजित कार्यक्रम में भाषण देने के दौरान गिरफ्तार किया गया था और उस रैली में शामिल होने पर साढ़े सात साल की सजा सुनाई गई। अब वह कुल 16 साल के कारावास और 100 से अधिक कोड़े की सजा का सामना कर रही हैं। वह एक मई को बेहोश हो गई थीं।

करीब 10 दिन बाद जमानत पर रिहा किए जाने के बाद उन्हें तेहरान के एक अस्पताल ले जाया गया, जहां वह दो सप्ताह और रहीं।