Gyirong की तस्वीरों को लेकर उठे सवाल, 600 से ज्यादा मौतें, 3 हजार लापता, नेपाल-तिब्बत बाढ़ की तबाही के वीडियो हटाने का चीन पर आरोप

नेपाल और तिब्बत में आई भीषण बाढ़ की भयावहता को दिखाने वाले वीडियो और फुटेज को चीन द्वारा सेंसर किए जाने की खबरों ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। दावा है कि स्थानीय लोगों और पत्रकारों ने आपदा की तबाही को रिकॉर्ड कर सोशल मीडिया पर शेयर किया, लेकिन कुछ ...

Aug 30, 2026 - 21:20
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Gyirong की तस्वीरों को लेकर उठे सवाल, 600 से ज्यादा मौतें, 3 हजार लापता, नेपाल-तिब्बत बाढ़ की तबाही के वीडियो हटाने का चीन पर आरोप

nepal flood नेपाल और तिब्बत में आई भीषण बाढ़ की भयावहता को दिखाने वाले वीडियो और फुटेज को चीन द्वारा सेंसर किए जाने की खबरों ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। दावा है कि स्थानीय लोगों और पत्रकारों ने आपदा की तबाही को रिकॉर्ड कर सोशल मीडिया पर शेयर  किया, लेकिन कुछ वीडियो बाद में चीनी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म से हटा दिए गए। ताजा आंकड़ों के मुताबिक, इस विनाशकारी बाढ़ में अब तक 600 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है।  जबकि करीब 3,000 लोग लापता बताए जा रहे हैं।

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Gyirong में तबाही का वीडियो हटाने का दावा

 

तिब्बत के स्थानीय निवासियों ने बाढ़ के कई वीडियो बनाकर ऑनलाइन शेयर किए थे। इनमें Gyirong County में एक सीमा चौकी के पास भारी मलबे और मिट्टी का सैलाब आने का भयावह दृश्य भी शामिल था। रिपोर्टों के मुताबिक, यह फुटेज चीनी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर साझा किया गया, लेकिन बाद में कुछ वीडियो हटा दिए गए। चीन के सरकारी मीडिया ने भी कथित तौर पर पूरे वीडियो के बजाय उसकी केवल एक तस्वीर का इस्तेमाल अपनी रिपोर्ट में किया।

 

चीन के सरकारी मीडिया कवरेज में मुख्य रूप से बचाव अभियान और राहत कार्यों पर जोर दिया गया है, जबकि बाढ़ से हुई वास्तविक तबाही की व्यापक तस्वीर को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं।

 

चीन का दावा- बड़े पैमाने पर चल रहा राहत अभियान

 

चीनी अधिकारियों का कहना है कि प्रभावित इलाकों में सेना के जवानों, आपातकालीन कर्मचारियों, ड्रोन और हेलीकॉप्टरों को तैनात किया गया है। चीन के सरकारी अखबार पीपुल्स डेली के अनुसार, राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने अधिकारियों को Gyirong में प्रभावित लोगों की हरसंभव मदद करने के निर्देश दिए हैं।

 

तिब्बत में विदेशी पत्रकारों पर सख्ती का आरोप

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बाढ़ की वास्तविक स्थिति की स्वतंत्र रूप से जांच को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। रिपोर्टों के अनुसार, विदेशी पत्रकारों को तिब्बत की यात्रा करने और स्थानीय लोगों से फोन पर संपर्क करने में कड़े प्रतिबंधों का सामना करना पड़ा है। तिब्बत लंबे समय से चीन के सबसे अधिक नियंत्रित और राजनीतिक रूप से संवेदनशील क्षेत्रों में शामिल रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि क्षेत्र से जुड़ी खबरों को लेकर सुरक्षा के नजरिए से कड़ी निगरानी रखी जाती है।

 

नेपाल के पूर्व सांसद राजेंद्र बजगाईं ने भी चीन की पारदर्शिता पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि अगर बाढ़ से जुड़े वीडियो हटाए जाते हैं, तो इससे लोगों के लिए यह सवाल उठाना मुश्किल हो सकता है कि वास्तव में वहां क्या हुआ था।