मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने किया महाभारत समागम का शुभारंभ
वैश्विक सभ्यताओं के संघर्ष और औदार्य की महागाथा महाभारत पर केन्द्रित देश का पहला और अब तक का सबसे बड़ा सांस्कृतिक आयोजन का शुभारंभ मुख्यमंत्री डॉ. माेहन यादव ने किया। शुभारंभ अवसर पर इण्डोनेशिया के प्रतिष्ठित नाट्य समूह द्वारा प्रस्तुत “भीष्म का ...
वैश्विक सभ्यताओं के संघर्ष और औदार्य की महागाथा महाभारत पर केन्द्रित देश का पहला और अब तक का सबसे बड़ा सांस्कृतिक आयोजन का शुभारंभ मुख्यमंत्री डॉ. माेहन यादव ने किया। शुभारंभ अवसर पर इण्डोनेशिया के प्रतिष्ठित नाट्य समूह द्वारा प्रस्तुत “भीष्म का पतन” नाट्य प्रस्तुति तथा “कर्मचक्र की गाथा” ने दर्शकों को भावविभोर कर दिया।
इसके पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इमर्सिव डोम थियेटर, प्रदर्शनियाँ नेपथ्य, अस्त्र-शस्त्र, चक्रव्यूह एवं पताकाएँ, भारतीय कठपुतली, श्रीकृष्ण पाथेय न्यास की पत्रिका एवं वेबसाइट तथा वीर भारत न्यास के प्रकाशन- सभ्यताओं की सॉंस (वैश्विक कविताओं का संकलन), भूली बिसरी सभ्यताएँ पुस्तकों का लोकार्पण भी किया।
समागम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि भारत भवन के इस परिसर में महाभारत जैसा भव्य समागम के आयोजन के लिए मैं संस्कृति विभाग और वीर भारत न्यास को बधाई देता हूँ। उन्होंने कहा कि महाभारत केवल युद्ध का आख्यान नहीं, बल्कि मानवता को विवेक, संवाद और शांति का मार्ग दिखाने वाला महाकाव्य है। आज जब विश्व युद्ध, हिंसा और असहिष्णुता से जूझ रहा है, तब महाभारत का संदेश और भी प्रासंगिक हो जाता है।
भगवान श्रीकृष्ण का जीवन हमें सिखाता है कि संघर्ष से पहले संवाद और शक्ति से पहले करुणा का चयन ही सच्चा धर्म है। मध्यप्रदेश की धरती से इस समागम के माध्यम से हम विश्व को यह संदेश दे रहे हैं कि सभ्यताओं का भविष्य टकराव में नहीं, बल्कि सहअस्तित्व और औदार्य में सुरक्षित है। यह आयोजन हमारी सांस्कृतिक चेतना को नई ऊर्जा देगा और आने वाली पीढ़ियों को अपनी विरासत से जोड़ेगा।
उन्होंने कहा कि माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी द्वारा सोमनाथ को राष्ट्रीय स्वाभिमान का प्रतीक बनाना उसी सांस्कृतिक चेतना का आधुनिक स्वरूप है, जिसकी जड़ें महाभारत जैसे ग्रंथों में हैं। यह समागम उस चेतना को वैचारिक धरातल प्रदान करता है और राष्ट्र को उसकी बौद्धिक विरासत से जोड़ता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह समागम भारत की सांस्कृतिक चेतना को वैश्विक संदर्भ में प्रस्तुत करता है और नई पीढ़ी को अपनी सभ्यतागत विरासत से जोड़ने का सशक्त माध्यम बनेगा।
वीर भारत न्यास द्वारा आयोजित श्रीमद्भगवद्गीता ज्ञान प्रतियोगिता के विजेता प्रतिभागियों का मुख्यमंत्री जी ने सम्मान किया। वीर भारत न्यास एवं अमर्त्यलोक टेल्स, मुंबई द्वारा आयोजित इमर्सिव डोम थिएटर भारत का पहला पौराणिक डोम थियेटर प्रस्तुत किया गया। डोम थिएटर में पहली प्रस्तुति है नारायणः सर्वम्, जो भगवद्गीता के 12वें अध्याय पर आधारित 6 मिनट की एक इमर्सिव फिल्म है, जिसका समापन श्रीकृष्ण के विराट विश्वरूप दर्शन के साथ होता है। इस फिल्म में श्रीकृष्ण की दिव्य वाणी सुप्रसिद्ध अभिनेता सौरव राज जैन ने दी है, जिन्होंने टेलीविजन पर कई बार श्रीकृष्ण की भूमिका निभाकर विशेष पहचान बनाई है।
वीर भारत व्यास द्वारा आयोजित सभ्यताओं के संघर्ष एवं औदार्य की महागाथा पर केंद्रित महाभारत समागम के शुभारंभ अवसर पर इंडोनेशिया के समूह द्वारा भीष्म का पतन नृत्य नाट्य प्रस्तुति का मंचन किया।



