मधुश्रावणी व्रत का समापन, नवविवाहिताओं ने दी 'अग्नि परीक्षा':पति की दीर्घायु के लिए टेमी दागने की रस्म हुई पूरी

मुंगेर में मिथिलांचल के 13 दिवसीय लोकप्रिय मधुश्रावणी व्रत का शनिवार को समापन हो गया। यह व्रत 3 अगस्त को नाग पंचमी के दिन शुरू हुआ था। मुख्य रूप से ब्राह्मण समुदाय की नवविवाहिताएं पति की दीर्घायु के लिए यह अनुष्ठान करती हैं। व्रत के अंतिम दिन सुहाग की रक्षा के लिए नवविवाहिताओं को 'अग्नि परीक्षा' से गुजरना पड़ा। इस 'अग्नि परीक्षा' को 'टेमी दागना' कहा जाता है। इसमें पूजा के दौरान जलने वाले दीपक की बाती से दुल्हन के शरीर पर आठ स्थानों पर दागा जाता है। टेमी दागते समय भाई पान के पत्ते पर पानी की बूंदें डालते हैं। मान्यता है कि टेमी दागने के बाद घाव जितना बड़ा होता है, वह उतना ही शुभ माना जाता है। बाद में घाव पर चंदन का लेप लगाया जाता है। मधुश्रावणी व्रत के 13 दिनों तक व्रती महिलाएं बिना नमक का भोजन करती हैं। प्रतिदिन सुबह वे अन्य महिलाओं के साथ फूल तोड़कर लाती हैं और उन्हीं फूलों से पूजन करती हैं। कलश को व्रती महिलाओं ने गंगा में प्रवाहित किया व्रत के समापन पर पूजा में चढ़ाए गए फूल सहित कलश को व्रती महिलाओं ने गीत गाकर गंगा में प्रवाहित किया। इसके अतिरिक्त, सोना या चांदी के नाग-नागिन और मिट्टी से बनी देवी-देवताओं की प्रतिमाओं का भी गंगा में विसर्जन किया जाएगा। यह व्रत जिला मुख्यालय स्थित बसंत बिहार कॉलोनी, वासुदेवपुर, सदर प्रखंड के गढ़ी रामपुर, महमदा, बधौना, बगेसवरी, रामगढ़, जमालपुर के कटघर, बरियारपुर प्रखंड के बिरहिया गांव, खड़गपुर प्रखंड के रतनपुर, तेलिया गांव और संग्रामपुर के मालचक सहित ब्राह्मण समुदाय बहुल बस्तियों में मनाया गया। महिला पंडित शांति देवी ने पूजन संपन्न कराया जिले भर में बड़ी संख्या में नवविवाहिताओं ने इस व्रत का अनुष्ठान किया, जिसका शनिवार को विधिवत समापन हुआ। संग्रामपुर प्रखंड के सन्हौली गांव में नवविवाहिता नैना पाठक ने व्रत किया, जबकि बरियारपुर प्रखंड के रतनपुर पंचायत के चिरैयाबाद गांव में नवविवाहिता दुर्गा झा पूजन कर रही थीं। इन स्थानों पर महिला पंडित शांति देवी ने पूजन संपन्न कराया। वहीं अंतिम दिन पूजा पर बैठी नवविवाहिताओं को परंपरा के अनुसार व्रती के भाई ने अपनी बहन का हाथ पकड़कर पूजन पर से उठवाया। इसके एवज में ससुराल से आया भाई के कपड़ा, धोती सहित मिठाई व्रती ने अपने भाई को ढिया। आरती के साथ ही 13 दिवसीय पूजा का समापन हो गया। मधुश्रावणी पूजन को लेकर ग्रामीण महिलाओं में काफी उत्साह का माहौल देखा गया।

Aug 15, 2026 - 20:35
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मधुश्रावणी व्रत का समापन, नवविवाहिताओं ने दी 'अग्नि परीक्षा':पति की दीर्घायु के लिए टेमी दागने की रस्म हुई पूरी
मुंगेर में मिथिलांचल के 13 दिवसीय लोकप्रिय मधुश्रावणी व्रत का शनिवार को समापन हो गया। यह व्रत 3 अगस्त को नाग पंचमी के दिन शुरू हुआ था। मुख्य रूप से ब्राह्मण समुदाय की नवविवाहिताएं पति की दीर्घायु के लिए यह अनुष्ठान करती हैं। व्रत के अंतिम दिन सुहाग की रक्षा के लिए नवविवाहिताओं को 'अग्नि परीक्षा' से गुजरना पड़ा। इस 'अग्नि परीक्षा' को 'टेमी दागना' कहा जाता है। इसमें पूजा के दौरान जलने वाले दीपक की बाती से दुल्हन के शरीर पर आठ स्थानों पर दागा जाता है। टेमी दागते समय भाई पान के पत्ते पर पानी की बूंदें डालते हैं। मान्यता है कि टेमी दागने के बाद घाव जितना बड़ा होता है, वह उतना ही शुभ माना जाता है। बाद में घाव पर चंदन का लेप लगाया जाता है। मधुश्रावणी व्रत के 13 दिनों तक व्रती महिलाएं बिना नमक का भोजन करती हैं। प्रतिदिन सुबह वे अन्य महिलाओं के साथ फूल तोड़कर लाती हैं और उन्हीं फूलों से पूजन करती हैं। कलश को व्रती महिलाओं ने गंगा में प्रवाहित किया व्रत के समापन पर पूजा में चढ़ाए गए फूल सहित कलश को व्रती महिलाओं ने गीत गाकर गंगा में प्रवाहित किया। इसके अतिरिक्त, सोना या चांदी के नाग-नागिन और मिट्टी से बनी देवी-देवताओं की प्रतिमाओं का भी गंगा में विसर्जन किया जाएगा। यह व्रत जिला मुख्यालय स्थित बसंत बिहार कॉलोनी, वासुदेवपुर, सदर प्रखंड के गढ़ी रामपुर, महमदा, बधौना, बगेसवरी, रामगढ़, जमालपुर के कटघर, बरियारपुर प्रखंड के बिरहिया गांव, खड़गपुर प्रखंड के रतनपुर, तेलिया गांव और संग्रामपुर के मालचक सहित ब्राह्मण समुदाय बहुल बस्तियों में मनाया गया। महिला पंडित शांति देवी ने पूजन संपन्न कराया जिले भर में बड़ी संख्या में नवविवाहिताओं ने इस व्रत का अनुष्ठान किया, जिसका शनिवार को विधिवत समापन हुआ। संग्रामपुर प्रखंड के सन्हौली गांव में नवविवाहिता नैना पाठक ने व्रत किया, जबकि बरियारपुर प्रखंड के रतनपुर पंचायत के चिरैयाबाद गांव में नवविवाहिता दुर्गा झा पूजन कर रही थीं। इन स्थानों पर महिला पंडित शांति देवी ने पूजन संपन्न कराया। वहीं अंतिम दिन पूजा पर बैठी नवविवाहिताओं को परंपरा के अनुसार व्रती के भाई ने अपनी बहन का हाथ पकड़कर पूजन पर से उठवाया। इसके एवज में ससुराल से आया भाई के कपड़ा, धोती सहित मिठाई व्रती ने अपने भाई को ढिया। आरती के साथ ही 13 दिवसीय पूजा का समापन हो गया। मधुश्रावणी पूजन को लेकर ग्रामीण महिलाओं में काफी उत्साह का माहौल देखा गया।